
President Droupadi Murmu in Uttarakhand Rajat Jayanti Session
देहरादून विधानसभा में उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर आयोजित रजत जयंती विशेष सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य की विकास यात्रा की सराहना की। उन्होंने कहा—“यह देवभूमि न केवल भौगोलिक ऊँचाइयों पर है, बल्कि अपने मूल्यों और संस्कृति में भी सर्वोच्च है।”
📍 Dehradun 🗓️ 3 November 2025✍️Shahnazar
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सोमवार को विधानसभा का विशेष रजत जयंती सत्र शुरू हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य की विकास यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि “यह ऐतिहासिक क्षण उत्तराखंड के आत्मगौरव और युवा ऊर्जा का प्रतीक है।”
उत्तराखंड की रजत जयंती के इस ऐतिहासिक अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि
“यह देवभूमि न केवल भौगोलिक दृष्टि से ऊँची है, बल्कि अपने मूल्यों, संस्कृति और जनसेवा के संकल्प में भी सर्वोच्च है।”
महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी
देहरादून स्थित विधानसभा भवन में आयोजित विशेष सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वर्ष 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में उत्तराखंड का गठन हुआ था, और तब से राज्य ने विकास के कई नए मानक स्थापित किए हैं।
उन्होंने पर्यावरण, ऊर्जा, पर्यटन, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि “महिला सशक्तीकरण की दिशा में उत्तराखंड ने सराहनीय कदम उठाए हैं।”
राष्ट्रपति ने कहा—“सुशीला बलूनी, बछेंद्री पाल और वंदना कटारिया जैसी असाधारण महिलाओं की गौरवशाली परंपरा आगे बढ़ेगी। ऋतु खंडूड़ी भूषण की पहली महिला विधानसभा अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति राज्य का गौरव बढ़ाती है।”




उन्होंने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने वाले राज्य के रूप में उत्तराखंड विधानसभा की सराहना की और कहा कि 550 से अधिक विधेयक पारित कर राज्य ने लोकतंत्र को मजबूत किया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने भेंट की रम्माण कला आधारित स्मृति चिह्न
सत्र की शुरुआत विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण द्वारा राष्ट्रपति को रम्माण कला पर आधारित स्मृति चिह्न भेंट कर हुई। इसी अवसर पर राष्ट्रपति ने रम्माण कला पर आधारित एक पुस्तक का भी विमोचन किया।सदन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि), पूर्व मुख्यमंत्री, वर्तमान व पूर्व सांसद, सभी विधायक तथा दर्शक दीर्घा में आमंत्रित अतिथि मौजूद रहे।
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने दिया स्वागत भाषण
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि यह राज्य की गौरवपूर्ण घड़ी है। उन्होंने राज्य आंदोलन में प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि दी। आर्य ने कहा कि “उत्तराखंड भारत भूमि का ऑक्सीजन टावर है। यहां की महिलाएं जंगलों को अपना मायका मानती हैं, जैसे गौरा देवी ने किया।”
उन्होंने स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा और वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन जैसी चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बोले—“25 वर्ष आत्मगौरव का प्रतीक”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य स्थापना की रजत जयंती उन ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों के बलिदान की याद दिलाती है जिनके संघर्ष से उत्तराखंड का जन्म हुआ।
उन्होंने कहा—“हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड को सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने के लिए संकल्पित हैं। जिन आदर्शों के लिए राज्य का गठन हुआ था, उन्हें साकार करना हमारी जिम्मेदारी है।”धामी ने राष्ट्रपति के प्रति आभार जताते हुए कहा कि यह दूसरा अवसर है जब किसी राष्ट्रपति ने उत्तराखंड विधानसभा को संबोधित किया है। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति स्वर्गीय प्रणब मुखर्जी ने सदन को संबोधित किया था।
उन्होंने कहा इस रजत जयंती विशेष सत्र में प्रदेश सरकार बीते 25 वर्षों के विकास कार्यों की समीक्षा के साथ ही आगामी 25 वर्षों के विकास रोडमैप को सदन में प्रस्तुत कर रही है। सदन में यह भी चर्चा होगी कि कैसे उत्तराखंड को “विकसित भारत का अग्रणी पर्वतीय राज्य” बनाया जा सके।
विकास कार्यों का मूल्यांकन करेगा यह सत्र: राज्यपाल
राज्यपाल ले. जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि यह सत्र न केवल राज्य की विकास यात्रा का मूल्यांकन करेगा, बल्कि अगले 25 वर्षों के विकास की दिशा भी तय करेगा।
उन्होंने कहा—“उत्तराखंड ने 25 वर्षों में अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विकसित उत्तराखंड का अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि ऐसा चहुंमुखी विकास है जिसमें प्रगति और प्रकृति दोनों साथ चलें।”राज्यपाल ने मातृशक्ति, युवा शक्ति और पूर्व सैनिकों की भूमिका को राज्य की प्रगति का आधार बताया और कहा कि पलायन रोकना, स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान देना और सुशासन को हर गांव तक पहुंचाना सरकार का संकल्प है।






