
भारत मंडपम में वीर बाल दिवस, साहिबजादों को नमन
वीर बाल दिवस पर राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यक्रम
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में वीर बाल दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साहिबजादों के बलिदान को स्मरण करते हुए बच्चों और युवाओं को संबोधित किया।
📍नई दिल्ली🗓️26 दिसंबर ✍️Asif Khan
राजधानी दिल्ली के भारत मंडपम में शुक्रवार को वीर बाल दिवस के अवसर पर एक राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाग लिया और उपस्थित बच्चों, युवाओं, शिक्षकों तथा विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया। यह दिवस गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों—बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह—के अद्वितीय बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है।
वीर बाल दिवस की पृष्ठभूमि
वीर बाल दिवस हर वर्ष 26 दिसंबर को मनाया जाता है। 9 जनवरी 2022 को गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश पर्व के अवसर पर प्रधानमंत्री द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। उद्देश्य यह बताया गया कि साहिबजादों की शहादत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जाए और उनके साहस, त्याग और दृढ़ संकल्प को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाया जाए।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक प्रस्तुति और स्मरण सत्र के साथ हुई। मंच से साहिबजादों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख किया गया। आयोजन स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री का संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने यह तय किया है कि गुलामी की मानसिकता से मुक्ति प्राप्त करनी है। उन्होंने कहा कि देश के नायकों और नायिकाओं के बलिदान को अब भुलाया नहीं जाएगा और वीर बाल दिवस इसी संकल्प का प्रतीक है।
भाषाई विविधता और राष्ट्रीय पहचान
प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि गुलामी की मानसिकता से मुक्त होते हुए भारत में भाषाई विविधता एक शक्ति के रूप में उभर रही है। उन्होंने कहा कि विविधता के साथ एकता भारत की पहचान है और यह पहचान आने वाले समय में और मजबूत होगी।
युवाओं से संवाद
कार्यक्रम में मौजूद बच्चों और युवाओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज की पीढ़ी के पास अवसरों की कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और शिक्षा से जुड़े विभिन्न initiatives ने learning और innovation के नए रास्ते खोले हैं।
नई पीढ़ी की भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि Gen Z और Gen Alpha की भूमिका विकसित भारत के लक्ष्य में अहम है। उन्होंने कहा कि यह पीढ़ी technology, science और innovation के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है और देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखती है।
सपनों और संसाधनों की बात
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पहले के दौर में युवा सपने देखने से भी डरते थे, लेकिन आज का माहौल अलग है। उन्होंने कहा कि आज talent को पहचानने और आगे बढ़ाने के लिए platforms उपलब्ध हैं और internet ने learning को आसान बनाया है।
अल्पकालिक लोकप्रियता से सावधानी
प्रधानमंत्री ने युवाओं को short term popularity की चमक से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि focus और dedication के साथ किया गया प्रयास ही long term success दिलाता है और यही राष्ट्र के लिए उपयोगी होता है।
साहिबजादों का ऐतिहासिक संदर्भ
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने साहिबजादों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने छोटी उम्र में उस समय की सबसे बड़ी सत्ता का सामना किया। यह संघर्ष भारत के मूल विचारों और कट्टरता के बीच था, जिसे इतिहास में विशेष स्थान प्राप्त है।
बलिदान की विरासत
प्रधानमंत्री ने कहा कि साहिबजादे त्याग और साहस की विरासत के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन से मिली प्रेरणा आज भी समाज और राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक है।
बीते वर्षों की पहल
प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में वीर बाल दिवस की परंपरा ने नई पीढ़ी तक साहिबजादों की प्रेरणा पहुंचाने का कार्य किया है। इस अवसर पर हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बच्चों को सम्मानित किया जाता है।
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार का उल्लेख भी किया गया। यह पुरस्कार उन बच्चों को दिया जाता है जिन्होंने समाज, शिक्षा, कला, विज्ञान, sports और innovation जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
शिक्षा और संस्कृति का संगम
कार्यक्रम में शिक्षा और संस्कृति के आपसी संबंध पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि इतिहास और संस्कृति को जानना युवाओं के व्यक्तित्व विकास में सहायक होता है।
उपस्थित लोगों की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में शामिल बच्चों और अभिभावकों ने आयोजन को प्रेरणादायक बताया। कई छात्रों ने कहा कि साहिबजादों की कहानियां उन्हें साहस और आत्मविश्वास देती हैं।
आयोजन की व्यवस्था
भारत मंडपम में सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम का live broadcast भी किया गया, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इसे देख सके।
समापन सत्र
कार्यक्रम का समापन स्मरण संदेश और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुआ। मंच से यह संदेश दिया गया कि वीर बाल दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक चलने वाली प्रेरणा है।






