
कौन सी होती है कुलथी की दाल और यह हमारी सेहत के लिए कैसे है फायदेमंद?

भारतीय खान–पान परंपरा में दालों का विशेष स्थान रहा है। इन्हीं पारंपरिक दालों में एक है कुलथी की दाल, जिसे कई क्षेत्रों में कुल्थ, कुलथी और घोड़ा चना के नाम से जाना जाता है। आधुनिक समय में भले ही इसका प्रयोग कम हो गया हो, लेकिन आयुर्वेद और ग्रामीण खानपान में कुलथी की दाल को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।
क्या होती है कुलथी की दाल
कुलथी एक गहरे भूरे या काले रंग की छोटी दाल होती है। यह मुख्य रूप से पहाड़ी क्षेत्रों, मध्य भारत और दक्षिण भारत में उगाई जाती है। इसका स्वाद हल्का कसैला होता है और इसे पचने योग्य बनाने के लिए प्रायः भिगोकर या अंकुरित कर उपयोग किया जाता है।
कुलथी की दाल का सेवन करने से होने वाले फायदे।
पोषण तत्वों से भरपूर
कुलथी की दाल में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और पॉलीफेनॉल जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसमें वसा की मात्रा कम होती है, जिससे यह स्वास्थ्य के प्रति सजग लोगों के लिए उपयोगी मानी जाती है।
किडनी स्टोन में सहायक
कुलथी की दाल को पारंपरिक रूप से पथरी (किडनी स्टोन) में लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेद में कुलथी के काढ़े का उपयोग पथरी को तोड़ने और पेशाब के रास्ते बाहर निकालने में सहायक बताया गया है।
वजन घटाने में मददगार
इस दाल में मौजूद उच्च फाइबर लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम होती है। यही कारण है कि इसे वजन घटाने वाले आहार में शामिल किया जाता है।
पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में सहायक।
कुलथी की दाल कब्ज की समस्या में लाभकारी मानी जाती है। यह पाचन को दुरुस्त करने और आंतों की सफाई में सहायक होती है।
शुगर मरीजों के लिए फायदेमंद
इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह रक्त शर्करा को तेजी से नहीं बढ़ाती। इसलिए सीमित मात्रा में यह मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद हो सकती है।
सर्दी–जुकाम और खांसी से राहत मिलना
ग्रामीण क्षेत्रों में कुलथी की दाल का सूप सर्दी, खांसी और बलगम की समस्या में दिया जाता है। इसे शरीर में गर्मी पहुंचाने वाला माना जाता है।
ध्यान रखने योग्य बातें
कुलथी की दाल गर्म तासीर वाली होती है। अत्यधिक सेवन करने से एसिडिटी, गैस या जलन की समस्या हो सकती है। गर्भवती महिलाओं और गंभीर रोगों से पीड़ित लोगों को सेवन से पहले चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
कुलथी की दाल एक ऐसी पारंपरिक देन है, जिसे आधुनिक जीवनशैली में दोबारा शामिल किए जाने की जरूरत है। उचित मात्रा और सही तरीके से सेवन करने पर यह दाल न केवल पोषण देती है, बल्कि कई बीमारियों से बचाव में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।





