
Major political shift as leaders join Congress in Uttarakhand – Shah Times
भाजपा को झटका, उत्तराखंड में कांग्रेस का बढ़ता दायरा
पूर्व विधायकों की वापसी से बदला सियासी समीकरण
2027 से पहले कांग्रेस की सियासी चाल तेज
उत्तराखंड की सियासत में अचानक आई हलचल ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राज्य में पावर बैलेंस बदल रहा है। तीन पूर्व विधायकों समेत छह बड़े नेताओं का कांग्रेस में शामिल होना महज़ एक राजनीतिक घटना नहीं, बल्कि एक बड़े सियासी ट्रेंड की तरफ इशारा है।
यह घटनाक्रम जहां भाजपा के लिए चिंता का सबब बन सकता है, वहीं कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद और ऊर्जा का संकेत है।
📍देहरादून/नई दिल्ली ✍️ शाह नज़र
उत्तराखंड की राजनीति में शनिवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में भाजपा सहित अन्य दलों के 6 प्रमुख नेताओं ने कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुख्यालय, नई दिल्ली में उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत, पूर्व अध्यक्ष करन महारा, सह प्रभारी मनोज यादव, सुरेंद्र शर्मा, महामंत्री प्रशासन गुरदीप सप्पल, राष्ट्रीय सचिव काज़ी निजामुद्दीन, विधायक तिलकराज बेहड़ की मौजूदगी में तीन पूर्व विधायकों व कई वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस पार्टी की नीतियों, विचारधारा और नेतृत्व में पूर्ण आस्था व्यक्त करते हुए कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
कांग्रेस में शामिल होने वालों में पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, बसपा के पूर्व विधायक नारायण पाल, घनसाली से पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, रुड़की के पूर्व महापौर गौरव गोयल, मसूरी के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनुज गुप्ता और लाखन सिंह नेगी शामिल हैं।
क्या ये सिर्फ दल-बदल है या सियासी संकेत?
इस मौके पर कांग्रेस नेताओं ने इसे भाजपा के लिए बड़ा झटका बताया। उनका कहना है कि इन नेताओं के शामिल होने से स्पष्ट संकेत गया है कि राज्य में भाजपा की पकड़ कमजोर हो रही है और कई नेता पार्टी छोड़ने का मन बना चुके हैं।
प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी में शामिल होने के इच्छुक नेताओं की एक लंबी सूची प्रदेश प्रभारी को सौंपी गई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल 6 नेताओं ने सदस्यता ली है, जबकि आने वाले समय में और भी नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं।
कांग्रेस ने दावा किया कि राज्य में राजनीतिक माहौल तेजी से बदल रहा है और पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव में सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
विचारधारा बनाम सियासी हकीकत
सियासत में स्थिरता नहीं, सिर्फ बदलाव स्थायी है
उत्तराखंड की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता।
आज जो नेता एक पार्टी में है, कल दूसरी में हो सकता है।
आज जो पार्टी मजबूत दिख रही है, कल कमजोर भी पड़ सकती है।
इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को किसी एक लाइन में समेटना मुश्किल है। यह न तो पूरी तरह भाजपा की हार है, न ही कांग्रेस की जीत।
असल में यह एक ongoing process है—जहां हर चाल के पीछे एक बड़ी रणनीति छिपी होती है।
और शायद यही सियासत की सबसे दिलचस्प बात है—
यह कभी पूरी तरह predict नहीं की जा सकती।




