
Shah Times coverage of Muzaffarnagar Census 2027 Self Enumeration drive led by DM Umesh Kumar Mishra
अब घर बैठे करें Census 2027 Self Enumeration
मुजफ्फरनगर DM उमेश मिश्रा की अपील, 21 मई से पहले भरें डेटा
मुजफ्फरनगर में जनगणना 2027 के तहत ‘स्व-गणना’ अभियान तेज हो गया है। जिलाधिकारी उमेश कुमार मिश्रा ने लोगों से अपील की है कि वे स्मार्टफोन के जरिए आधिकारिक पोर्टल पर खुद अपने परिवार का विवरण दर्ज करें। प्रशासन इसे डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक भागीदारी की बड़ी पहल मान रहा है।
📍Muzaffarnagar📰 14 May 2026✍️ Asif Khan
मुजफ्फरनगर में जनगणना 2027 को लेकर प्रशासन ने अब डिजिटल मॉडल पर ज़ोर बढ़ा दिया है। जिले के जिलाधिकारी Umesh Kumar Mishra ने नागरिकों से अपील की है कि वे पारंपरिक तरीके से प्रगणक के घर आने का इंतज़ार करने के बजाय खुद अपने मोबाइल फोन के जरिए ‘स्व-गणना’ प्रक्रिया पूरी करें। प्रशासन इसे केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि डिजिटल भागीदारी का नया चरण मान रहा है।
देश में लंबे समय से जनगणना को प्रशासनिक ढांचे की सबसे अहम कवायद माना जाता रहा है। आबादी, संसाधन, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, आवास और सामाजिक संरचना से जुड़ी तमाम नीतियों का आधार यही डेटा बनता है। ऐसे में अब ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ मॉडल का प्रयोग इस पूरी प्रक्रिया को बदलने वाला कदम माना जा रहा है।
मुजफ्फरनगर में 7 मई से शुरू हुए इस अभियान को लेकर प्रशासन लगातार जागरूकता बढ़ाने में जुटा है। जिलाधिकारी का कहना है कि लोग आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से खुद अपने परिवार का डेटा दर्ज करें ताकि प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और अधिक सटीक बन सके। प्रशासन ने 21 मई तक इस सुविधा के उपलब्ध रहने की जानकारी भी दी है।
इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें टेक्नोलॉजी को सीधे आम नागरिकों के हाथ में सौंपा जा रहा है। पहले जनगणना का पूरा ढांचा सरकारी कर्मचारियों और फील्ड स्टाफ पर निर्भर रहता था, लेकिन अब सरकार नागरिकों को खुद डेटा एंट्री की जिम्मेदारी दे रही है। इसे डिजिटल इंडिया मॉडल के विस्तार के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालांकि इस बदलाव के साथ कई सवाल भी सामने आ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या हर नागरिक डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने में सक्षम है। मुजफ्फरनगर जैसे जिले में शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट, स्मार्टफोन और डिजिटल समझ का स्तर अलग-अलग है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि कोई परिवार इस प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि बड़ी संख्या में लोग खुद डेटा दर्ज करते हैं तो इससे प्रशासनिक खर्च और समय दोनों में कमी आ सकती है। इसके साथ ही डेटा एंट्री में होने वाली मानवीय त्रुटियों को भी कम किया जा सकता है। लेकिन दूसरी तरफ यह भी तर्क दिया जा रहा है कि आम लोगों द्वारा भरा गया डेटा हमेशा पूरी तरह प्रमाणिक या तकनीकी रूप से सही हो, इसकी गारंटी नहीं दी जा सकती।
यही वजह है कि प्रशासन ने सत्यापन प्रक्रिया को भी समान रूप से महत्वपूर्ण बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, ‘स्व-गणना’ के बाद भी डेटा वेरिफिकेशन का चरण जारी रहेगा ताकि गलत जानकारी, डुप्लीकेट एंट्री या अधूरी जानकारी को रोका जा सके।
Census 2027 Self Enumeration
समय का सदुपयोग करें: घर बैठे आधिकारिक पोर्टल se.census.gov.in पर अपनी ‘स्व-गणना’ तुरंत पूर्ण करें।
✅ अंतिम तिथि का ध्यान रखें: यह सुविधा केवल 21 मई तक उपलब्ध है, इसलिए अंतिम समय की प्रतीक्षा न करें और आज ही अपना विवरण दर्ज करें।
✅ युवाओं की भूमिका: कॉलेज के छात्र और युवा इस अभियान में अपनी तकनीकी दक्षता का उपयोग करें और अपने परिवार की ‘स्व-गणना’ सुनिश्चित कर ‘डिजिटल सारथी’ बनें।
आइए, इस नई व्यवस्था को अपनाएं और स्व-गणना के माध्यम से मुजफ्फरनगर को देश के जागरूक जनपदों में अग्रणी स्थान दिलाएं।
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मुजफ्फरनगर प्रशासन युवाओं को इस अभियान का मुख्य हिस्सा बनाने की कोशिश कर रहा है। जिलाधिकारी ने कॉलेज छात्रों और तकनीकी रूप से जागरूक युवाओं से अपील की है कि वे अपने परिवार और आसपास के लोगों की मदद करें। प्रशासन ऐसे युवाओं को ‘डिजिटल सारथी’ की तरह देख रहा है, जो बुजुर्गों और तकनीकी जानकारी से दूर लोगों को इस प्रक्रिया से जोड़ सकें।
यह पहल केवल डेटा संग्रह तक सीमित नहीं दिखती। इसके पीछे सरकार का बड़ा उद्देश्य डिजिटल प्रशासन की स्वीकार्यता बढ़ाना भी माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में आधार, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन दस्तावेज़ सत्यापन और ई-गवर्नेंस सेवाओं के विस्तार के बाद अब जनगणना को भी डिजिटल फ्रेमवर्क में लाने की कोशिश हो रही है।
हालांकि हर डिजिटल बदलाव के साथ डेटा सुरक्षा का सवाल भी जुड़ता है। नागरिकों के परिवार, पहचान, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा के ऑनलाइन संग्रह को लेकर साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार सतर्क रहने की सलाह देते हैं। फिलहाल प्रशासन ने केवल आधिकारिक पोर्टल के उपयोग पर जोर दिया है और लोगों से किसी भी अनधिकृत लिंक या फर्जी वेबसाइट से बचने को कहा है।
ग्रामीण समाज में अभी भी बड़ी संख्या में लोग सरकारी डिजिटल प्रक्रियाओं को लेकर आशंकित रहते हैं। कई लोगों को डर रहता है कि गलत जानकारी भरने पर भविष्य में सरकारी योजनाओं या दस्तावेज़ों पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रशासन जागरूकता वीडियो, सोशल मीडिया कैंपेन और स्थानीय स्तर पर प्रचार के जरिए भरोसा बनाने की कोशिश कर रहा है।
जनगणना केवल जनसंख्या गिनने की प्रक्रिया नहीं होती। इसके आंकड़ों से भविष्य की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नीतियों की दिशा तय होती है। स्कूलों की संख्या से लेकर अस्पतालों की जरूरत तक और सड़क से लेकर बिजली नेटवर्क तक, कई फैसले जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होते हैं। इसलिए डेटा की शुद्धता और व्यापक भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ‘सेल्फ एन्यूमरेशन’ मॉडल आने वाले समय में भारत की कई सरकारी प्रक्रियाओं का आधार बन सकता है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में अन्य सरकारी सर्वे और नागरिक सेवाएं भी इसी पैटर्न पर शिफ्ट हो सकती हैं।
लेकिन दूसरी तरफ आलोचक यह भी कहते हैं कि डिजिटल मॉडल पर अत्यधिक निर्भरता सामाजिक असमानता को बढ़ा सकती है। जिन लोगों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट या डिजिटल शिक्षा नहीं है, वे धीरे-धीरे सरकारी प्रक्रियाओं से पीछे छूट सकते हैं। इसलिए केवल ऑनलाइन मॉडल पर्याप्त नहीं माना जा सकता।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, वर्तमान अभियान में पारंपरिक जनगणना प्रणाली को पूरी तरह खत्म नहीं किया गया है। जिन परिवारों तक डिजिटल सुविधा नहीं पहुंच पाएगी, वहां प्रगणक की भूमिका जारी रहने की संभावना है। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार फिलहाल हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रही है।
मुजफ्फरनगर के लिए यह अभियान प्रशासनिक छवि से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। यदि जिले में बड़ी संख्या में लोग समय सीमा से पहले ‘स्व-गणना’ पूरी कर लेते हैं तो इसे उत्तर प्रदेश के सफल डिजिटल जिलों में शामिल किया जा सकता है। प्रशासन इसी वजह से लोगों से अंतिम तारीख का इंतजार न करने की अपील कर रहा है।
इस पूरे अभियान का एक बड़ा सामाजिक पहलू भी सामने आता है। पहली बार आम नागरिक को सरकारी डेटा प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने की कोशिश की जा रही है। इससे नागरिक जिम्मेदारी और डिजिटल भागीदारी दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि लोग इस मॉडल को कितनी तेजी से अपनाते हैं। फिलहाल प्रशासन का पूरा फोकस जागरूकता, सहभागिता और सत्यापन पर दिखाई दे रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो मुजफ्फरनगर का यह मॉडल दूसरे जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
डिजिटल इंडिया के दौर में जनगणना का यह नया अध्याय केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासन और नागरिकों के रिश्ते में बदलती भूमिका का संकेत भी माना जा सकता है। अब देखना यह होगा कि लोग इसे सुविधा के रूप में अपनाते हैं या डिजिटल चुनौती के रूप में देखते हैं।





