
मुजफ्फरनगर नगरपालिका परिषद की अधिशासी अधिकारी प्रज्ञा सिंह का शासन स्तर से तबादला कर मुरादाबाद नगर निगम में सहायक नगर आयुक्त के पद पर तैनात किया गया है। उनके कार्यकाल में शहर की सफाई व्यवस्था, अतिक्रमण हटाओ अभियान और जनसंवाद को नई पहचान मिली थी।
प्रज्ञा सिंह का तबादला: मुरादाबाद नगर निगम में मिली अहम जिम्मेदारीमुजफ्फरनगर। नगरपालिका परिषद मुजफ्फरनगर की अधिशासी अधिकारी (ईओ) प्रज्ञा सिंह का तबादला शासन स्तर से कर दिया गया है। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगर निगमों में शामिल मुरादाबाद नगर निगम में सहायक नगर आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को केवल स्थानांतरण नहीं बल्कि उनके उत्कृष्ट कार्य प्रदर्शन के आधार पर दी गई बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है।प्रज्ञा सिंह का तबादला ऐसे समय हुआ है जब मुजफ्फरनगर नगरपालिका में कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाएं गति पकड़ चुकी हैं। उनके नेतृत्व में नगर पालिका ने स्वच्छता, अतिक्रमण नियंत्रण और नागरिक सुविधाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए।
शासन द्वारा उन्हें मुरादाबाद जैसे बड़े नगर निगम में तैनात किया जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि प्रशासन उनके अनुभव और कार्यक्षमता पर भरोसा करता है। मुरादाबाद नगर निगम में सहायक नगर आयुक्त का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है,
जहां राजस्व प्रबंधन से लेकर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं तक कई अहम जिम्मेदारियां निभानी होती हैं।मुजफ्फरनगर में अपने कार्यकाल के दौरान प्रज्ञा सिंह ने नगर प्रशासन को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने का प्रयास किया।
उन्होंने कार्यालयी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ जन समस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान दिया।उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने जनता और प्रशासन के बीच संवाद की दूरी को कम करने का प्रयास किया। यही कारण है कि आम नागरिकों से लेकर व्यापारिक संगठनों तक, सभी वर्गों में उनकी सकारात्मक छवि बनी
।स्वच्छता, अतिक्रमण हटाओ अभियान और जनसंवाद बने पहचानप्रज्ञा सिंह के कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शहर की सफाई व्यवस्था में सुधार को माना जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन को स्थानीय स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत किया गया।
इसके साथ ही कूड़ा निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने के प्रयास किए गए। विभिन्न वार्डों में स्वच्छता जागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को भी इसमें सहभागी बनाया गया।इसके अलावा शहर की लंबे समय से चली आ रही यातायात जाम की समस्या को कम करने के लिए उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया।
रेलवे रोड, मीनाक्षी चौक, बुढ़ाना गेट और अन्य व्यस्त बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।विशेष बात यह रही कि यह अभियान बिना किसी राजनीतिक या अन्य दबाव के संचालित किया गया। कई स्थानों पर विरोध के बावजूद प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई जारी रखी, जिसकी आम जनता ने सराहना की।
प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि मुजफ्फरनगर में उनके द्वारा किए गए कार्यों ने उन्हें बड़े नगर निगम में जिम्मेदारी संभालने के लिए उपयुक्त साबित किया है। मुरादाबाद स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ा हुआ शहर है, जहां शहरी विकास की चुनौतियां और अपेक्षाएं दोनों अधिक हैं।
सहायक नगर आयुक्त के रूप में उन्हें कर वसूली व्यवस्था को सुदृढ़ करने, भवन निर्माण संबंधी अनुमतियों के प्रबंधन, स्मार्ट सिटी योजनाओं की निगरानी और नागरिक सुविधाओं के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालनी होगी।इधर, उनके तबादले की खबर सामने आते ही नगरपालिका कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और व्यापारिक मंडलों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
कई लोगों ने उनके कार्यकाल को शहर के लिए सकारात्मक बदलाव का दौर बताया।व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रज्ञा सिंह ने हमेशा संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास किया। यही कारण रहा कि प्रशासन और व्यापारिक समुदाय के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला
।स्थानीय नागरिकों ने भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से उनके कार्यकाल की सराहना की है। लोगों का मानना है कि उन्होंने नगर पालिका प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सक्रिय बनाने का प्रयास किया।हालांकि उनके तबादले के बाद अब नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर में अधिशासी अधिकारी का पद रिक्त हो गया है। ऐसे में शहर के विकास कार्यों और नियमित प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखना शासन की प्राथमिकता होगी।
सूत्रों के अनुसार शासन जल्द ही नए अधिशासी अधिकारी की नियुक्ति कर सकता है। तब तक किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने की संभावना जताई जा रही है।नगरपालिका से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं। इसलिए नए अधिकारी के सामने इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की चुनौती भी होगी।






