
बुढ़ाना में राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती की 301वीं वर्षगांठ श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा और विचार गोष्ठी में हजारों लोगों ने भाग लेकर लोकमाता को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर बुढ़ाना में दिखा ऐतिहासिक उत्साहबुढ़ाना में रविवार को राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती का आयोजन अभूतपूर्व उत्साह और भव्यता के साथ किया गया। लोकमाता राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की 301वीं जयंती के अवसर पर पाल समाज और सर्व समाज के लोगों ने संयुक्त रूप से विशाल कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।सुबह से ही श्री शिव मंदिर पाल धर्मशाला परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र सहित आसपास के दर्जनों गांवों और कस्बों से बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे। कार्यक्रम का शुभारंभ राजमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पर माल्यार्पण, वैदिक मंत्रोच्चार तथा हवन-यज्ञ के साथ किया गया।श्रद्धालुओं ने लोकमाता के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों का अनुसरण करने का संकल्प लिया। आयोजन स्थल पर महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि आज भी राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का व्यक्तित्व और कृतित्व समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।इसके बाद निकाली गई विशाल पैदल शोभायात्रा कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी, जहां विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर प्रतिभागियों का स्वागत किया। पूरे मार्ग में “राजमाता अहिल्याबाई होल्कर अमर रहें” और “समाज एकता जिंदाबाद” जैसे जयघोष गूंजते रहे।आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार कार्यक्रम की तैयारियां लगभग एक माह पहले शुरू कर दी गई थीं। कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव और घर-घर जाकर जनसंपर्क अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप कार्यक्रम में भारी जनसहभागिता देखने को मिली।राजमाता अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन महान शासकों में गिनी जाती हैं जिन्होंने प्रशासन, धर्म, समाज सेवा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। उनके शासनकाल में अनेक मंदिरों, धर्मशालाओं और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण कराया गया, जिसकी चर्चा आज भी देशभर में होती है।विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने बताया महिला सशक्तिकरण और सुशासन का प्रतीकभव्य शोभायात्रा का समापन शंकर पैलेस, बुढ़ाना में हुआ। यहां आयोजित विचार गोष्ठी की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी राम प्यारे प्रधान ने की, जबकि संचालन डॉ. सुभाष पाल द्वारा किया गया।गोष्ठी में वक्ताओं ने राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन, संघर्ष, प्रशासनिक क्षमता और समाज सुधार संबंधी कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर केवल एक सफल शासक ही नहीं थीं, बल्कि वे महिला सशक्तिकरण, सामाजिक समरसता और लोककल्याण की सशक्त प्रतीक थीं।वक्ताओं ने बताया कि उन्होंने अपने शासनकाल में धर्म और विकास के बीच संतुलन स्थापित करते हुए जनता की आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। यही कारण है कि उन्हें आज भी लोकमाता के रूप में सम्मानपूर्वक याद किया जाता है।कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के जीवन से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जीवन संघर्ष, सेवा और नेतृत्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोगों ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। समाजवादी पार्टी शिक्षक सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष सत्येंद्र पाल, गन्ना समिति डायरेक्टर संजीव पाल, सभासद राकेश पाल, सुनील पाल लुहसाना (पाल फैमिली व्लॉग), खाटू श्याम परिवार बुढ़ाना के अध्यक्ष शंकर पाल, तेजेंद्र पाल, पिंटू पाल, आदित्य पाल, निखिल पाल और अंकित पाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।सामाजिक दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में ऐतिहासिक चेतना को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देते हैं। साथ ही नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और प्रेरणादायी व्यक्तित्वों से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।कार्यक्रम के दौरान समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की सहभागिता ने यह संदेश भी दिया कि महान व्यक्तित्व किसी एक समाज या वर्ग तक सीमित नहीं होते, बल्कि उनके आदर्श पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनते हैं।Conclusionबुढ़ाना में आयोजित राजमाता अहिल्याबाई होल्कर जयंती समारोह केवल एक स्मृति आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और ऐतिहासिक विरासत के सम्मान का प्रतीक बनकर सामने आया। भव्य शोभायात्रा, वैचारिक गोष्ठी और हजारों लोगों की सहभागिता ने यह साबित किया कि राजमाता अहिल्याबाई होल्कर के आदर्श आज भी समाज को दिशा देने की क्षमता रखते हैं। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।




