
Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath and Muzaffarnagar officials highlight the ‘Ek Ped Maa Ke Naam’ plantation campaign during World Environment Day 2026. | Shah Times
विश्व पर्यावरण दिवस पर बड़ा संदेश, लेकिन क्या पौधे बनेंगे पेड़?
डीएम उमेश मिश्रा का हरित संकल्प, अब असली चुनौती संरक्षण की
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर उत्तर प्रदेश में चल रहा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान केवल पौधरोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के उस व्यापक हरित नैरेटिव का हिस्सा है जिसमें पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा अमरूद का पौधा रोपित किया जाना इसी बड़े अभियान की स्थानीय अभिव्यक्ति माना जा सकता है।
📍 मुजफ्फरनगर
📰 तिथि: 5 जून 2026
✍️ Wasi Siddiqui
एक पेड़ माँ के नाम अभियान: पौधरोपण से आगे संरक्षण का असली इम्तिहान
विश्व पर्यावरण दिवस पर जब मुजफ्फरनगर कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने अमरूद का पौधा रोपित किया, तब यह दृश्य केवल एक सरकारी कार्यक्रम तक सीमित नहीं था। यह उस बड़े नैरेटिव का हिस्सा था जिसमें पर्यावरण संरक्षण को जनभावनाओं, सामाजिक जिम्मेदारी और विकास के एजेंडा से जोड़ा जा रहा है। “एक पेड़ माँ के नाम अभियान” इसी सोच का प्रतीक है, जो प्रकृति और मातृ सम्मान के बीच एक भावनात्मक रिश्ता स्थापित करने की कोशिश करता है।
भारत समेत पूरी दुनिया आज जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, घटते हरित क्षेत्र और जल संकट जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे दौर में पौधरोपण केवल एक प्रतीकात्मक गतिविधि नहीं रह गया है, बल्कि यह भविष्य की सुरक्षा का सवाल बन चुका है। मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम इसी व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ का हरित नैरेटिव और “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 पर उत्तर प्रदेश में चल रहा “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान केवल पौधरोपण कार्यक्रम नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के उस व्यापक हरित नैरेटिव का हिस्सा है जिसमें पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। मुजफ्फरनगर में जिलाधिकारी उमेश मिश्रा द्वारा अमरूद का पौधा रोपित किया जाना इसी बड़े अभियान की स्थानीय अभिव्यक्ति माना जा सकता है।
एक पेड़ माँ के नाम अभियान क्यों चर्चा में है
केंद्र सरकार के बारह वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर चल रहे “सेवा, संस्कार, सुशासन एवं सम्मान” थीम आधारित अभियान के अंतर्गत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशासनिक स्तर पर इसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है।
इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसका भावनात्मक पक्ष है। सामान्य तौर पर सरकारी वृक्षारोपण कार्यक्रम कुछ दिनों तक चर्चा में रहते हैं और फिर सार्वजनिक स्मृति से गायब हो जाते हैं। लेकिन जब किसी पौधे को माँ के सम्मान से जोड़ा जाता है तो उसके प्रति व्यक्ति का लगाव बढ़ने की संभावना बनती है।
यही कारण है कि “एक पेड़ माँ के नाम अभियान” केवल पर्यावरणीय पहल नहीं बल्कि सामाजिक मनोविज्ञान को समझने वाली रणनीति भी प्रतीत होती है।
डीएम उमेश मिश्रा का संदेश और उसका व्यापक अर्थ
जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने पौधरोपण के दौरान जिस बात पर सबसे अधिक बल दिया, वह संरक्षण था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे वृक्ष बनाना ही वास्तविक पर्यावरण सेवा है।
यह टिप्पणी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत में वर्षों से वृक्षारोपण अभियानों की सफलता का आकलन प्रायः लगाए गए पौधों की संख्या से किया जाता रहा है। जबकि असली सवाल यह होता है कि उनमें से कितने पौधे जीवित बचे।
नीतिगत स्तर पर भी अब यह बहस तेज हो रही है कि सफलता का पैमाना “प्लांटेशन नंबर” नहीं बल्कि “सर्वाइवल रेट” होना चाहिए।
विश्व पर्यावरण दिवस और बदलता वैश्विक परिप्रेक्ष्य
विश्व पर्यावरण दिवस केवल औपचारिक आयोजन का अवसर नहीं है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार चेतावनी देती रही हैं कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुके हैं।
हीटवेव, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और वायु प्रदूषण जैसी समस्याएं सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं। उत्तर प्रदेश भी इन चुनौतियों से अछूता नहीं है।
ऐसे में स्थानीय स्तर पर होने वाले पौधरोपण अभियान राष्ट्रीय और वैश्विक प्रयासों का हिस्सा बन जाते हैं। यही वजह है कि मुजफ्फरनगर में हुआ यह कार्यक्रम केवल जिला स्तरीय घटना नहीं बल्कि एक बड़े पर्यावरणीय विमर्श का हिस्सा है।



उत्तर प्रदेश का हरित एजेंडा और नई पहलें
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियानों को बढ़ावा देती रही है। विभिन्न सरकारी अभियानों के माध्यम से करोड़ों पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के अवसर पर भी राज्य स्तर पर व्यापक हरित अभियान की चर्चा रही। सरकार का दावा है कि इससे पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और हरित आवरण को मजबूती मिलेगी।
हालांकि स्वतंत्र पर्यावरण विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि केवल पौधे लगाने से लक्ष्य हासिल नहीं होगा। पौधों की निगरानी, सिंचाई, सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी उतनी ही जरूरी है।
जमीनी हकीकत क्या कहती है
यह एक तथ्य है कि देशभर में अनेक स्थानों पर लगाए गए पौधों का बड़ा हिस्सा कुछ वर्षों के भीतर नष्ट हो जाता है। इसके पीछे कई कारण हैं।
कई बार पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिलता। कहीं पशुओं से सुरक्षा की व्यवस्था नहीं होती। कई जगह अभियान समाप्त होते ही निगरानी भी खत्म हो जाती है।
यही वह बिंदु है जहां “एक पेड़ माँ के नाम अभियान” की सफलता का असली इम्तिहान शुरू होगा। यदि लोग पौधे को व्यक्तिगत जिम्मेदारी समझकर उसकी देखभाल करते हैं तो यह पहल दीर्घकालिक असर छोड़ सकती है।
जनभागीदारी के बिना संभव नहीं हरित भविष्य
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारों या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थान, उद्योग, किसान और आम लोग सभी इस प्रक्रिया के हिस्सेदार हैं।
मुजफ्फरनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पौधरोपण किया। यह सकारात्मक संकेत है। लेकिन स्थायी बदलाव तब आएगा जब यह भागीदारी पूरे समाज में दिखाई दे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि स्कूलों, कॉलेजों और स्थानीय समुदायों को ऐसे अभियानों से स्थायी रूप से जोड़ना अधिक प्रभावी परिणाम दे सकता है।
क्या भावनात्मक अपील व्यवहार बदल सकती है?
सामाजिक अभियानों में भावनात्मक अपील की भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण रही है। स्वच्छता, जल संरक्षण और बेटी शिक्षा जैसे कई अभियानों में यह रणनीति अपनाई गई है।
“एक पेड़ माँ के नाम अभियान” भी इसी मॉडल पर आधारित दिखाई देता है। माँ के प्रति सम्मान और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को एक साथ जोड़ने की कोशिश लोगों के व्यवहार में बदलाव ला सकती है।
हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव समय के साथ ही स्पष्ट होगा। किसी भी अभियान की सफलता केवल उसके संदेश से नहीं बल्कि उसके परिणामों से तय होती है।
आगे की राह
आने वाले वर्षों में पर्यावरण संरक्षण विकास नीति का केंद्रीय विषय बनने वाला है। स्मार्ट सिटी, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, सड़क निर्माण और शहरी विस्तार जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ हरित संतुलन बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
इसलिए वृक्षारोपण को केवल समारोह नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखने की जरूरत है। तकनीक, सामुदायिक निगरानी और स्थानीय भागीदारी इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का हरित एजेंडा और मुजफ्फरनगर में डीएम उमेश मिश्रा का पौधरोपण कार्यक्रम एक साझा संदेश देते हैं—पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का विषय है। “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान की वास्तविक सफलता तब दिखाई देगी जब लगाए गए पौधे आने वाले वर्षों में मजबूत वृक्ष बनकर पर्यावरण और समाज दोनों को लाभ पहुंचाएंगे।





