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संसद परिसर में महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी की प्रतिमाओं को उनके मूल स्थानों से हटाकर दूसरी जगह स्थापित किए जाने को लेकर अब सियासत तेज हो गई है।
नई दिल्ली,(Shah Times) । संसद परिसर में महात्मा गांधी, बाबासाहेब आंबेडकर और छत्रपति शिवाजी की प्रतिमाओं को उनके मूल स्थानों से हटाकर दूसरी जगह स्थापित किए जाने को लेकर अब सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस फैसले को अनुचित कदम बताया तो वही दूसरी ओर प्रमुख पवन खेड़ा ने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि महाराष्ट्र के मतदाताओं ने भाजपा के लिए वोट नहीं डाला तो शिवाजी और आंबेडकर की प्रतिमाएं संसद में उनके मूल स्थान से हटा दी गईं।
हालांकि इस मामले पर लोकसभा सचिवालय ने प्रतिक्रिया दी है। लोकसभा सचिवालय द्वारा एक बयान में कहा गया की नए संसद भवन के निर्माण के बाद संसद परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए कार्ययोजना बनाई गई है। संसद परिसर में देश के महान नेताओं और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं परिसर के अलग-अलग हिस्सों में स्थापित की गई थीं। संसद परिसर में अलग-अलग स्थानों पर स्थित होने के कारण विजिटर को इन प्रतिमाओं का दर्शन करने में दिक्कतें आ रही थी। इस कारण इन सभी प्रतिमाओं को संसद भवन परिसर में ही एक भव्य प्रेरणा स्थल में सम्मानपूर्वक स्थापित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार आदिवासी नेता बिरसा मुंडा और महाराणा प्रताप की प्रतिमाएं भी पुराने संसद भवन और संसद पुस्तकालय के बीच लॉन में लगाई गई हैं। अब सभी प्रतिमाएं एक ही जगह पर हैं।
इस महीने जब 18वीं लोकसभा का पहला सत्र शुरू होगा तो संसद परिसर नये स्वरूप में नजर आएगा. संसद परिसर के अंदर चार इमारतों को मिलाकर एकीकरण का काम जारी है। बाहरी क्षेत्र के पुनर्विकास के तहत, महात्मा गांधी, शिवाजी और महात्मा ज्योतिबा फुले सहित राष्ट्रीय महापुरुषों की प्रतिमाओं को पुराने संसद भवन के गेट नंबर 5 के पास एक लॉन में स्थानांतरित करने की योजना है, जिसे संविधान सदन नाम दिया गया है।






