ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम शांति समझौते को लेकर नए दौर की वार्ता शुक्रवार से शुरू होगी। यह घोषणा पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के बाद सामने आई है। वार्ता का उद्देश्य युद्ध समाप्ति, क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु विवादों का समाधान तलाशना है।
तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ बैठक के दौरान अराघची ने बताया कि दोनों देशों के बीच समझौते को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहला चरण युद्ध समाप्ति, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा, अमेरिकी नाकेबंदी हटाने और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
According to IRNA, इस प्रारंभिक समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद अब अगले चरण की बातचीत शुरू होगी।
अराघची के अनुसार दूसरे चरण में लगभग 60 दिनों तक वार्ता चल सकती है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने और दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक समझौते पर चर्चा होगी।
विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद विश्वास बहाली आसान नहीं थी, इसलिए वार्ता को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
अराघची ने कहा कि लेबनान में जारी संघर्ष और दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियां भी शांति प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्रीय स्थिरता के बिना व्यापक समझौते को सफल नहीं माना जा सकता।
उनके अनुसार, लेबनान से संबंधित किसी भी नए सैन्य तनाव को भविष्य के समझौते के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है।
"स्थायी शांति सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य है।" — सैयद अब्बास अराघची
हफ्तों चली कूटनीतिक बातचीत के बाद अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने युद्ध समाप्ति के लिए प्रारंभिक समझौते की घोषणा की थी। अब इस समझौते पर स्विट्जरलैंड में शुक्रवार को औपचारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रक्रिया सफल रहती है तो इससे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने, वैश्विक ऊर्जा बाजारों को स्थिरता मिलने और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के भविष्य को लेकर नई दिशा मिल सकती है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।