गिफ्ट निफ्टी और एशियाई बाजारों से मिले संकेत बताते हैं कि सोमवार को भारतीय शेयर बाजार दबाव के साथ खुल सकता है। वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
मुहर्रम के अवसर पर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार बंद रहे, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव ने सोमवार के कारोबार को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। गिफ्ट निफ्टी में कमजोरी और एशियाई बाजारों के मिश्रित संकेत यह इशारा करते हैं कि सप्ताह की शुरुआत दबाव के साथ हो सकती है।
भारतीय बाजार अब पहले की तुलना में वैश्विक घटनाओं से अधिक प्रभावित होते हैं। अमेरिकी बाजार, एशियाई इंडेक्स, डॉलर, बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतें निवेशकों की धारणा बदल सकती हैं। ऐसे माहौल में शुरुआती कारोबार अधिक अस्थिर रहने की संभावना रहती है।
अवकाश से पहले भारतीय बाजार सीमित बढ़त के साथ बंद हुए थे, लेकिन दिन के ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली भी देखने को मिली। इससे यह स्पष्ट हुआ कि ऊंचे स्तरों पर निवेशक अभी भी सतर्क हैं और नई खरीदारी से पहले मजबूत संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
हाल के महीनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख अस्थिर बना हुआ है। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कई अवसरों पर बाजार को सहारा दिया है। यही संतुलन भारतीय बाजार को वैश्विक झटकों के बावजूद अपेक्षाकृत स्थिर बनाए रखने में मदद कर रहा है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। टेक शेयरों में कमजोरी ने निवेशकों की सतर्कता बढ़ाई, जबकि कुछ सेमीकंडक्टर कंपनियों के बेहतर नतीजों ने चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी आकर्षित की। इससे यह संकेत मिलता है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल सेक्टर आधारित रणनीति अपना रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है। इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, चालू खाते का संतुलन बेहतर रह सकता है और रिजर्व बैंक की नीतिगत गुंजाइश भी बढ़ सकती है। हालांकि यह लाभ तभी टिकाऊ होगा जब भू-राजनीतिक तनाव दोबारा न बढ़े।
विश्लेषकों का मानना है कि गिफ्ट निफ्टी शुरुआती संकेत जरूर देता है, लेकिन अंतिम दिशा घरेलू और वैश्विक घटनाओं, संस्थागत निवेश, कॉर्पोरेट समाचार और निवेशकों की धारणा पर निर्भर करती है। इसलिए केवल एक संकेतक के आधार पर निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता।
यदि सोमवार को बाजार कमजोर शुरुआत करता है तो घबराहट में खरीदारी या बिकवाली दोनों से बचना समझदारी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती अस्थिरता के बाद ट्रेंड स्पष्ट होने का इंतजार करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक केंद्रीय बैंकों के संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, कच्चे तेल की चाल, कॉर्पोरेट नतीजे और मानसून से जुड़े आर्थिक संकेतक भारतीय बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि अंतरराष्ट्रीय माहौल स्थिर रहता है तो घरेलू बाजार फिर से संतुलन हासिल कर सकते हैं।
सोमवार का कारोबार वैश्विक संकेतों की परीक्षा होगा। गिफ्ट निफ्टी की कमजोरी शुरुआती दबाव का संकेत दे सकती है, लेकिन अंतिम दिशा पूरे दिन के दौरान बदल भी सकती है। ऐसे समय में अनुशासित निवेश, जोखिम प्रबंधन और तथ्यों पर आधारित निर्णय ही निवेशकों के लिए सबसे प्रभावी रणनीति साबित होंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।