संसदीय समिति ने NCERT और CBSE में खाली पदों पर चिंता जताई है। NCERT में 2,844 स्वीकृत पदों में 1,596 और CBSE में 2,117 में 933 पद रिक्त हैं। समिति ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने की सिफारिश की है। स्टाफ की कमी से परीक्षा प्रबंधन प्रभावित होने की आशंका है।
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नई दिल्ली | 14 अगस्त 2026 | Apurva Choudhary
NCERT और CBSE में स्टाफ शॉर्टेज का मामला
राष्ट्रीय शिक्षा व्यवस्था से जुड़े दो अहम संस्थानों NCERT और CBSE में बड़ी संख्या में पद खाली होने का मामला संसदीय समिति की समीक्षा में सामने आया है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक NCERT में 2,844 स्वीकृत पदों में 1,596 पद खाली हैं, जबकि CBSE में 2,117 स्वीकृत पदों में 933 पद रिक्त हैं। दोनों आंकड़े संस्थानों की प्रशासनिक और अकादमिक क्षमता को लेकर सवाल खड़े करते हैं।
NCERT की रिक्तियों का हिस्सा लगभग 56.1 प्रतिशत और CBSE का करीब 44.1 प्रतिशत बैठता है। संसदीय समिति ने खास तौर पर CBSE में स्थायी कर्मचारियों की कमी को गंभीरता से लेते हुए भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया है।
NCERT में 1,596 पद क्यों अहम हैं
NCERT यानी नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में पाठ्यक्रम, शैक्षणिक सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा संबंधी शोध जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके काम का असर सिर्फ एक संस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर स्कूल शिक्षा से जुड़े कई हिस्सों तक पहुंचता है।
संसदीय समीक्षा में सामने आया आंकड़ा बताता है कि NCERT के 2,844 स्वीकृत पदों में 1,596 पद रिक्त हैं। रिपोर्टिंग के अनुसार इन खाली पदों में अकादमिक, शिक्षण, मिनिस्टीरियल और अन्य सहायक श्रेणियों के पद शामिल हैं।
इतनी बड़ी vacancy का मतलब यह जरूरी नहीं कि NCERT का पूरा काम ठप है। लेकिन लंबे समय तक बड़ी संख्या में पद खाली रहने पर कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी, भर्ती प्रक्रिया में देरी और संस्थागत क्षमता पर दबाव जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
CBSE में 933 पद रिक्त
CBSE यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन देश के सबसे बड़े स्कूल बोर्डों में शामिल है। बोर्ड की जिम्मेदारियों में affiliation, examinations, curriculum-related work, assessment और देश-विदेश में affiliated schools से जुड़े कई प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।
रिपोर्ट में CBSE के 2,117 sanctioned posts में 933 vacancies बताई गई हैं, यानी लगभग 44 प्रतिशत पद खाली हैं। संसदीय समिति की चिंता खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि CBSE का प्रशासनिक दायरा बड़ा है और उसके सामने examinations तथा affiliated institutions से जुड़े काम लगातार रहते हैं।
CBSE के उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट होता है कि बोर्ड recruitment activity चला रहा है। उसकी वेबसाइट पर 2026 में Direct Recruitment Quota से संबंधित examination और दिसंबर 2025 की vacancy notification समेत भर्ती से जुड़ी कई सूचनाएं उपलब्ध हैं।
संसदीय समिति ने क्या चिंता जताई
संसदीय समिति का मुख्य नज़रिया यह है कि महत्वपूर्ण शिक्षा संस्थानों की कार्यक्षमता के लिए पर्याप्त और स्थायी manpower जरूरी है। CBSE के मामले में committee ने permanent staff की कमी और recruitment को तेज करने की जरूरत पर जोर दिया है।
यह सिफारिश ऐसे समय सामने आई है जब बोर्ड के सामने examinations, affiliation और विभिन्न regulatory तथा academic responsibilities का व्यापक दायरा है। इसलिए सवाल केवल खाली पदों की संख्या का नहीं, बल्कि यह भी है कि sanctioned strength और actual workload के बीच संतुलन किस तरह कायम रखा जाए।
क्या vacancies से बोर्ड परीक्षाएं प्रभावित होंगी?
यह कहना अभी सही नहीं होगा कि खाली पदों के कारण CBSE की परीक्षाएं निश्चित रूप से प्रभावित होंगी। संसदीय समिति ने स्टाफ की कमी को लेकर चिंता जताई है और इसके संभावित असर पर ध्यान दिलाया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी से किसी विशेष परीक्षा में हुई विफलता या व्यवधान को इन vacancies का प्रत्यक्ष परिणाम घोषित नहीं किया जा सकता।
CBSE की मौजूदा गतिविधियां यह भी दिखाती हैं कि बोर्ड अपने नियमित academic और examination functions जारी रख रहा है। जुलाई 2026 में supplementary examinations से संबंधित guidelines और admit-card updates भी बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए गए हैं।
इसलिए ज्यादा सटीक निष्कर्ष यह है कि बड़ी vacancy एक institutional capacity concern है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि recruitment कितनी जल्दी होती है और मौजूदा staff workload को किस तरह manage किया जाता है।
भर्ती प्रक्रिया में क्या हो रहा है
CBSE के एक आधिकारिक parliamentary-question reply में recruitment efforts का उल्लेख मिलता है। इसमें Superintendent और Junior Assistant के पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया का जिक्र है और कहा गया है कि कुछ vacancies को भरने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी। साथ ही, बोर्ड ने operationalisation के साथ नए regional offices और Centres of Excellence से जुड़े अतिरिक्त posts का भी उल्लेख किया है।
इसी दस्तावेज में CBSE ने यह भी बताया कि कुछ vacant posts के कारण manpower deficiency को संभालने के लिए outsourced manpower का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे एक अहम policy question सामने आता है—क्या long-term institutional requirements के लिए permanent recruitment पर्याप्त तेजी से पूरी होगी या temporary arrangements पर निर्भरता बनी रहेगी।
NCERT और CBSE की भूमिका में फर्क
दोनों संस्थान शिक्षा मंत्रालय से जुड़े महत्वपूर्ण संगठन हैं, लेकिन उनकी भूमिकाएं अलग हैं। NCERT का फोकस research, curriculum development, educational resources और teacher education जैसे academic क्षेत्रों पर अधिक है, जबकि CBSE का प्रमुख operational role school affiliation, examinations और board-related administration से जुड़ा है।
इसलिए दोनों संस्थानों की vacancies को एक ही नजरिए से देखना उचित नहीं होगा। NCERT में academic posts की कमी research और content development capacity को प्रभावित कर सकती है, जबकि CBSE में administrative और examination-related manpower की कमी workload और service delivery पर दबाव डाल सकती है।
क्या यह सिर्फ नई समस्या है?
रिक्त पदों का मुद्दा अचानक पैदा हुआ ऐसा मानना सही नहीं होगा। सरकारी संस्थानों में sanctioned posts और filled posts के बीच अंतर कई बार recruitment rules, promotion processes, cadre restructuring और नए पदों के creation जैसे कारणों से बना रहता है।
CBSE के हालिया आधिकारिक जवाब में भी vacancies के साथ recruitment process, promotion quota और नए regional offices से जुड़े posts का संदर्भ मिलता है। इससे संकेत मिलता है कि vacancy position को समझने के लिए केवल एक संख्या देखने के बजाय recruitment cycle और organisational expansion को भी देखना जरूरी है।
शिक्षा व्यवस्था पर संभावित असर
NCERT और CBSE दोनों की institutional capacity का संबंध व्यापक school-education ecosystem से है। NCERT की क्षमता curriculum और academic resources से जुड़ी है, जबकि CBSE की क्षमता लाखों विद्यार्थियों, affiliated schools और examination-related processes से जुड़े प्रशासनिक कामों के लिए महत्वपूर्ण है।
अगर vacancies लंबे समय तक बनी रहती हैं तो मौजूदा कर्मचारियों पर workload बढ़ सकता है और कुछ administrative या academic processes में अधिक समय लग सकता है। लेकिन यह भी जरूरी है कि किसी vacancy figure को सीधे student-level नुकसान का प्रमाण न माना जाए, जब तक उसके प्रत्यक्ष प्रभाव का स्वतंत्र और ठोस data उपलब्ध न हो।
समिति की सिफारिश का महत्व
संसदीय समितियां सरकार की नीतियों और संस्थागत कामकाज की समीक्षा कर recommendations देती हैं। शिक्षा से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने 2026 में Department of School Education and Literacy की Demands for Grants पर भी विस्तृत समीक्षा की थी और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों से जानकारी ली थी।
इस प्रक्रिया का महत्व इसलिए है क्योंकि NCERT, CBSE और अन्य education bodies के कामकाज को सिर्फ annual expenditure के आधार पर नहीं, बल्कि manpower और institutional capacity के नजरिए से भी देखा जाता है। Recruitment को तेज करने की सिफारिश इसी broader administrative review का हिस्सा है।
सामने मौजूद चुनौती
सबसे बड़ी चुनौती vacant posts को केवल notification जारी करके भरना नहीं, बल्कि पूरी recruitment cycle को समय पर पूरा करना है। इसमें vacancy identification, recruitment rules, examination, selection, document verification, appointment और joining जैसी कई stages शामिल होती हैं।
CBSE के official records में भर्ती से जुड़े कई चरणों का उल्लेख मौजूद है। इसका मतलब है कि recruitment process शुरू होना और सभी vacant positions का वास्तविक रूप से भर जाना दो अलग-अलग स्थितियां हैं।
आगे का रास्ता
NCERT और CBSE दोनों के लिए vacancy management अब सिर्फ administrative issue नहीं, बल्कि institutional capacity का सवाल बन गया है। बड़ी संख्या में sanctioned posts खाली रहने पर सरकार और संबंधित संस्थानों को recruitment timelines, cadre requirements और workload assessment को साथ लेकर चलना होगा।
CBSE के मामले में नए regional offices और Centres of Excellence के operationalisation से manpower requirements भी बदल सकती हैं। इसलिए भविष्य की staffing policy में मौजूदा vacancies भरने के साथ-साथ बढ़ती institutional responsibilities का आकलन भी जरूरी होगा।