CBSE की कक्षा 9 की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में 3 सितंबर को सुनवाई हुई। केंद्र ने कार्यान्वयन के तौर-तरीकों पर काम के लिए और समय मांगा। कोर्ट ने कहा कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का उद्देश्य उचित है, लेकिन छात्रों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ना चाहिए। सुनवाई एक सप्ताह टली।
Location: नई दिल्ली
Date: 3 सितंबर 2026
Byline: Apurva Choudhary
CBSE की तीन-भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
CBSE की कक्षा 9 में लागू की गई तीन-भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 3 सितंबर 2026 को अहम सुनवाई हुई। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि CBSE नीति के कार्यान्वयन से जुड़े तौर-तरीकों और कोर्ट के सुझावों पर काम कर रहा है। केंद्र ने इसके लिए और समय मांगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र की दलील को रिकॉर्ड किया और मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाल दी। इसका अर्थ है कि 3 सितंबर की सुनवाई में नीति को रद्द करने या रोकने का कोई अंतिम आदेश नहीं दिया गया।
कक्षा 9 में क्या है तीन-भाषा व्यवस्था
CBSE की नई व्यवस्था National Education Policy 2020 और National Curriculum Framework for School Education 2023 के अनुरूप तीन-भाषा फॉर्मूला लागू करने से जुड़ी है। इसके तहत कक्षा 9 के विद्यार्थियों को R1, R2 और R3 के रूप में तीन भाषाओं का अध्ययन करना है और कम से कम दो भाषाएं भारतीय भाषाओं में होनी चाहिए।
किसी विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के तौर पर चुनने की स्थिति में भी दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन आवश्यक रखा गया है। CBSE ने इस व्यवस्था को 2026-27 अकादमिक सेशन से लागू करने की दिशा में कदम उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य चिंता क्या है
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 20 अगस्त की सुनवाई में स्पष्ट किया था कि भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य पर उसे आपत्ति नहीं है। अदालत की मुख्य चिंता नीति के implementation mechanism को लेकर है, ताकि इसका असर विद्यार्थियों पर अनावश्यक शैक्षणिक दबाव के रूप में न पड़े।
पीठ ने अलग-अलग भाषाओं के लिए पर्याप्त शिक्षक, learning resources और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता जैसे व्यावहारिक पहलुओं पर भी सवाल उठाए थे। अदालत चाहती है कि नीति का उद्देश्य हासिल करते हुए स्कूलों और विद्यार्थियों के सामने आने वाली वास्तविक दिक्कतों का समाधान निकाला जाए।
केंद्र ने मांगा और समय
3 सितंबर की सुनवाई में केंद्र ने कहा कि CBSE अदालत की ओर से उठाए गए मुद्दों और सुझावों पर काम कर रहा है। सरकार की ओर से बताया गया कि विभिन्न modalities तैयार की जा रही हैं और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श जारी है।
अदालत ने इस स्थिति को देखते हुए मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया। इसलिए अगली सुनवाई में कार्यान्वयन को लेकर केंद्र की ओर से अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है।
तीसरी भाषा को लेकर बोर्ड परीक्षा का क्या होगा
इस नीति से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि तीसरी भाषा को लेकर कक्षा 10 में अलग CBSE Board Examination नहीं कराया जाएगा। इसका उद्देश्य भी विद्यार्थियों पर अतिरिक्त परीक्षा संबंधी दबाव को सीमित करना है।
CBSE की उपलब्ध scheme of studies में भाषा व्यवस्था को लेकर R1, R2 और R3 का ढांचा सामने आया है। बोर्ड के रिकॉर्ड में तीन-भाषा फॉर्मूले को कक्षा IX-X की व्यवस्था के साथ align करने का उल्लेख भी मिलता है।
किताबों और शिक्षकों का सवाल क्यों अहम
नीति को लागू करने में सबसे बड़ी व्यावहारिक चुनौतियों में अलग-अलग भारतीय भाषाओं के लिए पर्याप्त teachers और textbooks उपलब्ध कराना शामिल है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी बिंदु पर सरकार और CBSE से यह देखने को कहा था कि देशभर के स्कूलों में प्रस्तावित भाषाओं को पढ़ाने के लिए पर्याप्त human resources और learning material मौजूद हैं या नहीं।
CBSE के अपने रिकॉर्ड में भी यह सामने आया था कि सभी भारतीय भाषाओं के लिए graded NCERT textbooks तुरंत उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में पाठ्यपुस्तकों से जुड़ी व्यवस्था पर विचार करना पड़ा।
इससे स्पष्ट है कि विवाद केवल तीन भाषाएं पढ़ाने के सिद्धांत को लेकर नहीं है। असली सवाल यह भी है कि अलग-अलग राज्यों और स्कूलों में इसे समान रूप से और बिना अतिरिक्त दबाव के कैसे लागू किया जाए।
अंग्रेजी को लेकर भी उठे सवाल
20 अगस्त की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंग्रेजी को “non-native” भाषा के रूप में वर्गीकृत करने को लेकर भी सवाल उठाया था। अदालत ने पूछा था कि भारतीय समाज में लंबे समय से इस्तेमाल होने वाली अंग्रेजी को किस आधार पर इस श्रेणी में रखा जा रहा है।
यह सवाल नीति के व्यापक संवैधानिक और शैक्षणिक पहलुओं से जुड़ सकता है। हालांकि 3 सितंबर की सुनवाई में मुख्य फोकस तत्काल तौर पर नीति के implementation modalities और विद्यार्थियों पर संभावित दबाव को लेकर रहा।
क्या सुप्रीम कोर्ट ने तीन-भाषा नीति पर रोक लगा दी?
नहीं। उपलब्ध रिपोर्टिंग के मुताबिक 3 सितंबर को अदालत ने नीति पर कोई अंतिम रोक नहीं लगाई। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने नीति को अंतरिम तौर पर रोकने के बजाय उसके implementation से जुड़ी समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया था।
इसलिए विद्यार्थियों और स्कूलों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मामले की अगली सुनवाई का इंतजार किया जाए और CBSE या अदालत की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक निर्देशों को ही अंतिम माना जाए।
भाषा सीखने का उद्देश्य बनाम छात्रों का दबाव
तीन-भाषा नीति का एक पक्ष भारतीय भाषाओं और multilingual education को बढ़ावा देना है। दूसरा पक्ष विद्यार्थियों के workload, शिक्षकों की उपलब्धता, पाठ्यक्रम और स्कूलों की infrastructure capacity से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख फिलहाल इसी संतुलन पर केंद्रित दिखाई देता है। अदालत ने भाषा शिक्षा के उद्देश्य को खारिज नहीं किया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया है कि policy implementation ऐसी होनी चाहिए जिससे विद्यार्थी अनावश्यक academic burden में न आएं।
अब आगे क्या होगा
अब केंद्र और CBSE को implementation से जुड़े मुद्दों पर अदालत के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी। अगली सुनवाई में शिक्षक, textbooks, language choices और विद्यार्थियों पर workload जैसे मुद्दों पर आगे की दिशा सामने आ सकती है।
फिलहाल 3 सितंबर की सुनवाई का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यही है कि तीन-भाषा नीति पर कोई अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है। मामला एक सप्ताह के लिए स्थगित हुआ है और केंद्र को अदालत के सुझावों के अनुरूप कार्यान्वयन की रूपरेखा पर आगे काम करना है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।