नई दिल्ली में NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के विरोध में हुए प्रदर्शनों से जुड़ी FIR का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। दिल्ली पुलिस ने शीर्ष अदालत से 13 FIR को खत्म करने की मांग की है। इस अर्ज़ी पर सुप्रीम कोर्ट आज, 1 सितंबर को सुनवाई करेगा।
दिल्ली पुलिस ने अपनी मांग के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का सहारा लिया है। पुलिस का कहना है कि वह इन 13 मामलों में आगे जांच या अभियोजन जारी नहीं रखना चाहती। साथ ही उसने प्रदर्शन स्थल पर मौजूद 2,873 लोगों से जुड़े मामलों में अलग FIR दर्ज कर उनकी भूमिका की जांच की अनुमति मांगी है।
पुलिस ने क्या मांग रखी है
दिल्ली पुलिस की अर्ज़ी का मुख्य मुद्दा जुलाई 2026 में NEET से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज की गई 13 FIR हैं। पुलिस अब इन मामलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहती और सुप्रीम कोर्ट से इन्हें समाप्त करने का आदेश मांग रही है।
इसके साथ ही पुलिस ने 2,873 ऐसे लोगों की पहचान का उल्लेख किया है, जिन्हें प्रदर्शन स्थल से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर अलग जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। पुलिस का तर्क है कि इन लोगों की भूमिका को अलग से देखा जाना चाहिए, खासकर उन मामलों में जहां हिंसा, शारीरिक नुकसान या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोपों की जांच जरूरी हो।
इसका मतलब यह नहीं है कि 2,873 लोगों के खिलाफ अपराध सिद्ध हो चुका है। पुलिस की मांग जांच की अनुमति से संबंधित है। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी अदालत में साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।
अनुच्छेद 142 क्यों अहम है
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने असाधारण अधिकार का इस्तेमाल करने की अपील की है। अनुच्छेद 142 शीर्ष अदालत को किसी मामले में पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश देने की शक्ति देता है।
सोमवार को सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले को तत्काल सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को सुनवाई के लिए मामले को सूचीबद्ध करने पर सहमति दी। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।
अदालत ने सोमवार को यह भी कहा था कि यदि पक्षकार किसी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो अदालत को आपत्ति नहीं है। हालांकि, FIR खत्म करने का अंतिम फैसला सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
जुलाई में क्या हुआ था
NEET से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। जुलाई में संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति बनी थी।
दिल्ली पुलिस ने इसके बाद अलग-अलग घटनाओं को लेकर FIR दर्ज की थीं। इनमें दंगा, हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान जैसे गंभीर आरोप शामिल होने की रिपोर्ट सामने आई थी।
इन घटनाओं के बाद मामला केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। पुलिस कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी और FIR की प्रक्रिया को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल हुईं।
सुप्रीम कोर्ट पहले क्या कह चुका है
NEET प्रदर्शन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कानून के मुताबिक FIR बंद या वापस लेने की स्वतंत्रता दी थी। अदालत ने साथ ही प्रदर्शन में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम उम्र के उन बच्चों को रिहा करने का निर्देश दिया था, जिनका कोई आपराधिक पूर्ववृत्त नहीं था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि FIR की जांच कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ सामान्य तौर पर जबरन कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। आपराधिक पूर्ववृत्त वाले व्यक्तियों के मामले में स्थिति अलग रखी गई थी।
इस न्यायिक पृष्ठभूमि में दिल्ली पुलिस की नई अर्ज़ी महत्वपूर्ण हो जाती है। पुलिस अब 13 मामलों को खत्म करने के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट से आदेश चाहती है।
2,873 लोगों का मामला क्या है
दिल्ली पुलिस ने 2,873 लोगों से संबंधित एक अलग जांच की अनुमति मांगकर मामले में एक महत्वपूर्ण अंतर रखा है। एक तरफ 13 FIR खत्म करने का अनुरोध है, दूसरी तरफ कुछ लोगों की कथित आपराधिक पृष्ठभूमि और प्रदर्शन के दौरान उनकी भूमिका की अलग जांच की मांग है।
कुछ रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान चेहरा पहचानने वाली तकनीक और उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के जरिए लोगों की पहचान की थी। इस प्रक्रिया को लेकर नागरिक अधिकार, निजता और पुलिस जांच की सीमा पर भी सवाल उठे हैं।
यहां एक अहम कानूनी बिंदु है। किसी व्यक्ति का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड अपने आप में उसे किसी नए अपराध का दोषी साबित नहीं करता। नए मामले में उसकी कथित भूमिका के संबंध में स्वतंत्र साक्ष्य और जांच जरूरी होगी।
प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन
इस पूरे मामले में दो संवैधानिक हित आमने-सामने दिखाई देते हैं। एक तरफ शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। दूसरी तरफ हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की राज्य की जिम्मेदारी है।
सुप्रीम कोर्ट के सामने अब यह सवाल भी रहेगा कि जिन मामलों में पुलिस खुद आगे जांच नहीं करना चाहती, उन्हें किस कानूनी प्रक्रिया के तहत खत्म किया जाए और किन परिस्थितियों में अलग व्यक्तियों की भूमिका की जांच जारी रखी जाए।
यह मामला इसलिए भी अहम है क्योंकि FIR का समाप्त होना और किसी व्यक्ति को हर आरोप से न्यायिक रूप से निर्दोष घोषित किया जाना एक ही बात नहीं है। FIR खत्म करने का आदेश मामले की परिस्थितियों और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।
5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च का संदर्भ
इस घटनाक्रम के बीच Cockroach Janta Party ने 5 सितंबर को दिल्ली में एक और मार्च का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने पहले किए गए आश्वासनों को पूरी तरह लागू नहीं किया।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रस्तावित मार्च पर रोक लगाने से इनकार किया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फिलहाल अदालत के पास यह मानने का कोई ठोस कारण नहीं है कि प्रस्तावित मार्च में कुछ गलत होगा और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष जिम्मेदारी से और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करेंगे।
इससे साफ है कि अदालत ने कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार और पुलिस पर छोड़ी है। वहीं FIR से जुड़े सवाल को अलग न्यायिक प्रक्रिया के जरिए देखा जा रहा है।
आज की सुनवाई क्यों महत्वपूर्ण है
आज की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट को दिल्ली पुलिस की उस मांग पर विचार करना है जिसमें 13 FIR खत्म करने के लिए अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल का अनुरोध किया गया है। अदालत यह भी देखेगी कि 2,873 लोगों के संबंध में प्रस्तावित अलग जांच को किस सीमा और कानूनी आधार पर आगे बढ़ाया जाए।
सुनवाई का परिणाम दिल्ली में NEET विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई युवाओं के लिए महत्वपूर्ण होगा। साथ ही यह फैसला भविष्य में बड़े छात्र आंदोलनों के दौरान FIR, पुलिस जांच और विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर भी एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदर्भ बना सकता है।
फिलहाल किसी अंतिम राहत या अभियोजन से जुड़ा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। 1 सितंबर की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट का आदेश ही तय करेगा कि 13 FIR का भविष्य क्या होगा और 2,873 लोगों से संबंधित पुलिस की प्रस्तावित कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।