📍 नई दिल्ली: भारत ने 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य तय किया है। SHANTI Act के बाद सरकारी, निजी और संयुक्त उपक्रमों की भागीदारी से नए रिएक्टर लगाने की योजना है।
🗓️ 28 अगस्त 2026
✍️ Mohd Naved
2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा का लक्ष्य
भारत ने अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति में परमाणु बिजली को अहम जगह दी है। केंद्र सरकार ने 2047 तक देश की परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को 100 GW तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बड़े रिएक्टरों के साथ Small Modular Reactors यानी SMRs और स्वदेशी परमाणु तकनीक पर भी जोर दिया जा रहा है।
सरकार के मुताबिक यह रणनीति ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने, कम-कार्बन बिजली की हिस्सेदारी बढ़ाने और 2070 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य में योगदान देने से जुड़ी है। मौजूदा क्षमता के मुकाबले 100 GW का लक्ष्य बड़ा विस्तार है और इसे हासिल करने के लिए लंबी अवधि का रोडमैप तैयार किया गया है।
अभी कितनी है परमाणु बिजली क्षमता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत की मौजूदा परमाणु बिजली क्षमता करीब 8.78 GW है। चल रही परियोजनाओं के क्रमिक पूरा होने के बाद इसे 2031-32 तक करीब 22 GW तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
इसके बाद 2047 तक अतिरिक्त क्षमता जोड़ने की योजना है। सरकार के रोडमैप के अनुसार Nuclear Power Corporation of India Limited यानी NPCIL की ओर से 2032 के बाद करीब 32 GW नई क्षमता विकसित करने की परिकल्पना की गई है। इससे NPCIL की कुल क्षमता करीब 54 GW तक पहुंच सकती है।
शेष करीब 46 GW क्षमता दूसरे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, केंद्र और राज्य सरकारों, निजी क्षेत्र तथा Joint Ventures के अलग-अलग कारोबारी मॉडल के जरिए विकसित करने की योजना बताई गई है। इसका मतलब है कि भविष्य में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में भागीदारी का दायरा मौजूदा सरकारी ढांचे से आगे बढ़ सकता है।
SHANTI Act से बदलेगा परमाणु क्षेत्र का ढांचा
भारत की परमाणु ऊर्जा नीति में SHANTI Act, 2025 को अहम बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। इसका पूरा नाम Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक इस कानून का उद्देश्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी और निजी क्षेत्र की व्यापक भागीदारी का रास्ता तैयार करना है। 100 GW के लक्ष्य को हासिल करने की रणनीति में निजी निवेश और विभिन्न कारोबारी मॉडल को जगह देने की बात कही गई है।
हालांकि परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी का मतलब सुरक्षा और रणनीतिक नियंत्रण से समझौता नहीं है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि परमाणु सुरक्षा, संवेदनशील गतिविधियों और नियामकीय निगरानी में राज्य की केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी।
700 MWe के स्वदेशी रिएक्टरों पर फोकस
100 GW के लक्ष्य के लिए भारत एक तरफ स्वदेशी Pressurised Heavy Water Reactors यानी PHWR तकनीक पर निर्भरता बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। सरकारी रोडमैप में 700 MWe क्षमता वाले स्वदेशी PHWR को बड़े पैमाने पर तैनात करने की रणनीति शामिल है।
दूसरी तरफ ग्रीनफील्ड साइटों पर बड़े आयातित Advanced Reactor Designs लगाने की भी योजना है। यानी भारत की रणनीति में स्वदेशी तकनीक और अंतरराष्ट्रीय तकनीकी सहयोग दोनों के लिए जगह रखी गई है।
यह मॉडल परमाणु क्षमता में तेज विस्तार के साथ घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की कोशिश से जुड़ा है। सरकार ने परमाणु उपकरण और तकनीकी क्षमताओं में घरेलू उद्योग की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
Small Modular Reactors पर भी बड़ा दांव
परमाणु ऊर्जा विस्तार की दूसरी अहम कड़ी Small Modular Reactors हैं। सरकार ने 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMRs को विकसित और ऑपरेशनल करने का लक्ष्य रखा है।
BARC की ओर से 220 MWe Bharat Small Modular Reactor यानी BSMR-200, 55 MWe Small Modular Reactor और हाइड्रोजन उत्पादन के लिए 5 MWth तक क्षमता वाले High Temperature Gas Cooled Reactor पर काम किया जा रहा है।
SMR का इस्तेमाल उन जगहों पर करने की योजना है जहां पारंपरिक बड़े परमाणु संयंत्र लगाना व्यावहारिक नहीं होता। सरकारी रणनीति में पुराने होते जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली संयंत्रों के स्थान के पुनः उपयोग, ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए captive power और दूरदराज के इलाकों में off-grid इस्तेमाल जैसी संभावनाएं शामिल हैं।
2031-32 तक क्षमता बढ़ाने की तैयारी
100 GW का लक्ष्य लंबी अवधि का है, लेकिन इसकी बुनियाद मौजूदा परियोजनाओं से रखी जा रही है। फरवरी 2026 में सरकार ने बताया था कि 17 परमाणु रिएक्टर, कुल 13,600 MW क्षमता के साथ, अलग-अलग चरणों में कार्यान्वयन में हैं। इनमें Prototype Fast Breeder Reactor यानी PFBR भी शामिल है। इन परियोजनाओं के 2031-32 तक क्रमिक रूप से पूरा होने की उम्मीद जताई गई थी।
जुलाई 2026 में सरकार ने यह भी बताया कि पिछले 3 वर्षों में कोई नया परमाणु बिजली प्रोजेक्ट स्वीकृत नहीं किया गया था। इसके बावजूद पहले से चल रही परियोजनाओं और नई नीति व्यवस्था के जरिए क्षमता विस्तार का रोडमैप आगे बढ़ाया जा रहा है।
Fast Breeder Reactors की भूमिका
परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में Fast Breeder Reactors को भी अहम माना जा रहा है। सरकार ने तमिलनाडु के कलपक्कम में 2 x 500 MW Fast Breeder Reactor परियोजनाओं के लिए pre-project activities को मंजूरी दी है।
इसी कड़ी में देश में स्वदेशी तकनीक के विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश हो रही है। अप्रैल 2026 में कलपक्कम स्थित स्वदेशी 500 MWe Prototype Fast Breeder Reactor ने first criticality हासिल की थी। यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव था।
सुरक्षा और स्थानीय चिंताएं भी अहम
परमाणु परियोजनाओं के विस्तार के साथ सुरक्षा, भूमि, पुनर्वास और स्थानीय आजीविका से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण रहेंगे। सरकार ने संसद में बताया है कि कुछ परमाणु परियोजना स्थलों पर स्थानीय लोगों की ओर से सुरक्षा, पुनर्वास और मछली पालन तथा बागवानी जैसी पारंपरिक आजीविका को लेकर आशंकाएं सामने आई हैं।
सरकार का कहना है कि इन चिंताओं को सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रमों और बहुस्तरीय संवाद के जरिए संबोधित किया जा रहा है। परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में साइट चयन से लेकर डिजाइन, निर्माण, commissioning और संचालन तक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
परमाणु ऊर्जा क्यों महत्वपूर्ण है
भारत की बिजली मांग बढ़ने के साथ लगातार उपलब्ध बिजली का महत्व बढ़ रहा है। सौर और पवन ऊर्जा तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन उनका उत्पादन मौसम और समय पर निर्भर करता है। परमाणु बिजली को सरकार भरोसेमंद base-load electricity के स्रोत के रूप में देखती है।
100 GW का लक्ष्य इसी व्यापक ऊर्जा मिश्रण का हिस्सा है। सरकारी रोडमैप में परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा और कम-कार्बन बिजली उत्पादन को मजबूत करने की कोशिश की गई है।
परमाणु ऊर्जा को लेकर लागत, परियोजना अवधि, सुरक्षा, कचरा प्रबंधन और स्थानीय स्वीकार्यता जैसे सवाल भी बने रहेंगे। सरकारी आंकड़ों के अनुसार परमाणु बिजली परियोजनाओं की project और construction अवधि सामान्य तौर पर 10 से 12 वर्ष तक हो सकती है। इसलिए 2047 के लक्ष्य के लिए समय पर परियोजना स्वीकृति, वित्तीय व्यवस्था, तकनीकी क्षमता और निर्माण गति निर्णायक होगी।
आगे की चुनौती क्या होगी
100 GW तक पहुंचने के लिए भारत को मौजूदा 8.78 GW क्षमता से करीब 11 गुना से अधिक विस्तार करना होगा। शुरुआती चरण में चल रही परियोजनाओं को समय पर पूरा करना जरूरी होगा। इसके बाद बड़े रिएक्टरों, SMRs और नई तकनीकों को बड़े पैमाने पर तैनात करना होगा।
निजी क्षेत्र की भागीदारी से निवेश का आधार व्यापक होने की उम्मीद है, लेकिन परमाणु ऊर्जा में नियामकीय व्यवस्था, दायित्व, सुरक्षा मानक और सार्वजनिक भरोसा लंबे समय तक केंद्रीय मुद्दे बने रहेंगे।
भारत के लिए चुनौती केवल रिएक्टरों की संख्या बढ़ाना नहीं है। असली परीक्षा ऐसी परमाणु क्षमता तैयार करने की होगी जो सुरक्षित, आर्थिक रूप से व्यवहार्य, तकनीकी रूप से विश्वसनीय और सार्वजनिक हित के अनुरूप हो।
100 GW की राह
2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य भारत की ऊर्जा नीति में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। मौजूदा 8.78 GW से 2031-32 तक करीब 22 GW और फिर 2047 तक 100 GW की दिशा में बढ़ने के लिए लगातार परियोजना क्रियान्वयन जरूरी होगा।
SHANTI Act ने निजी भागीदारी के लिए रास्ता तैयार किया है। 700 MWe PHWR, बड़े Advanced Reactors, SMRs और Fast Breeder Reactors इस रणनीति के अलग-अलग हिस्से हैं।
अब असल निगाह परियोजनाओं की समयसीमा, निवेश, तकनीकी तैयारी, सुरक्षा मानकों और स्थानीय सहमति पर रहेगी। अगर ये मोर्चे प्रभावी ढंग से संभाले जाते हैं, तो परमाणु ऊर्जा भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा मिश्रण में पहले से कहीं बड़ी भूमिका निभा सकती है।