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यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर 25% जुर्माना

Shah Times • 2026-08-24 16:01:27
यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर 25% जुर्माना

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर ICC का जुर्माना

कोलंबो टेस्ट की झड़प पर यशस्वी-जायसवाल को सज़ा

जायसवाल-फर्नांडो विवाद में ICC का फैसला, 25% जुर्माना


कोलंबो में भारत और श्रीलंका के दूसरे टेस्ट के पहले दिन यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच तीखी झड़प हुई। ICC ने दोनों को 25% मैच फीस का जुर्माना और एक-एक डिमेरिट पॉइंट दिया। दोनों ने उल्लंघन स्वीकार किया। कार्रवाई के बाद मामला औपचारिक सुनवाई के बिना निपट गया।


कोलंबो, श्रीलंका | 24 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स 

By Mohd Haris


कोलंबो टेस्ट की झड़प पर ICC की कार्रवाई

भारत के सलामी बल्लेबाज़ यशस्वी जायसवाल और श्रीलंका के तेज़ गेंदबाज़ असिथा फर्नांडो पर कोलंबो में हुई मैदान के भीतर की झड़प को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। ICC ने दोनों खिलाड़ियों पर उनकी मैच फीस का 25 प्रतिशत जुर्माना लगाया और एक-एक डिमेरिट पॉइंट उनके रिकॉर्ड में जोड़ा। ICC के मुताबिक दोनों खिलाड़ियों ने प्लेयर्स और प्लेयर सपोर्ट पर्सनेल के लिए बनाए गए कोड ऑफ कंडक्ट के आर्टिकल 2.12 का उल्लंघन किया। यह प्रावधान अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान किसी खिलाड़ी, मैच अधिकारी या अन्य संबंधित व्यक्ति के साथ अनुचित शारीरिक संपर्क से जुड़ा है। दोनों ने आरोप स्वीकार किए और प्रस्तावित सज़ा मान ली, इसलिए औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं पड़ी।

घटना कैसे शुरू हुई

विवाद भारत की पहली पारी के 17वें ओवर में हुआ। फर्नांडो ने जायसवाल को 45 रन पर आउट किया। इसके बाद श्रीलंकाई गेंदबाज़ ने आक्रामक अंदाज़ में जश्न मनाया, जिसके बाद जायसवाल उनकी तरफ लौटे और दोनों के बीच बातचीत तथा तीखी बहस शुरू हो गई। ICC के आधिकारिक विवरण के मुताबिक जायसवाल फर्नांडो की तरफ बढ़े और दोनों के बीच शब्दों का आदान-प्रदान हुआ। इसके बाद फर्नांडो ने अपना सिर जायसवाल की ओर बढ़ाया। जायसवाल भी आगे झुके और दोनों के सिर आपस में टकरा गए। मैदान पर मौजूद खिलाड़ियों ने स्थिति को आगे बढ़ने से रोका। इस घटना को अलग-अलग रिपोर्टों में तीखी भिड़ंत, बहस और शारीरिक संपर्क के तौर पर वर्णित किया गया है। हालांकि ICC की कार्रवाई का आधिकारिक आधार आर्टिकल 2.12 के तहत अनुचित शारीरिक संपर्क है। इसलिए घटना को केवल मौखिक बहस के रूप में देखना सही नहीं होगा।

ICC के नियमों के तहत क्या हुआ

ICC ने दोनों खिलाड़ियों को लेवल 1 उल्लंघन का दोषी माना। इस स्तर के अपराधों में आधिकारिक फटकार से लेकर मैच फीस के 50 प्रतिशत तक जुर्माने का प्रावधान है। इसके साथ डिमेरिट पॉइंट भी दिए जा सकते हैं। इस मामले में दोनों खिलाड़ियों पर 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना और एक-एक डिमेरिट पॉइंट लगाया गया। ICC ने यह भी स्पष्ट किया कि जायसवाल और फर्नांडो, दोनों के पिछले 24 महीनों में कोई पिछला अपराध दर्ज नहीं था। यह तथ्य अनुशासनात्मक रिकॉर्ड के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, क्योंकि डिमेरिट पॉइंट की व्यवस्था लगातार उल्लंघनों पर कड़ी कार्रवाई की दिशा में काम करती है। दोनों खिलाड़ियों ने अपराध स्वीकार किया और मैच रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट की प्रस्तावित सज़ा मान ली। इसलिए मामले को औपचारिक सुनवाई के बिना निपटा दिया गया। इससे यह साफ होता है कि ICC ने इस प्रकरण को गंभीर लेकिन लेवल 1 अनुशासनात्मक उल्लंघन के तौर पर वर्गीकृत किया।

डिमेरिट पॉइंट का क्या असर होगा

एक-एक डिमेरिट पॉइंट मिलने का तत्काल असर किसी खिलाड़ी के अगले मैच से बाहर होने के रूप में नहीं हुआ है। ICC की मौजूदा व्यवस्था में डिमेरिट पॉइंट 24 महीने तक अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में रहते हैं। यदि किसी खिलाड़ी के डिमेरिट पॉइंट इस अवधि में निर्धारित सीमा तक पहुंचते हैं, तो वे सस्पेंशन पॉइंट में बदल सकते हैं और इसके बाद प्रतिबंध लग सकता है। इसलिए जायसवाल और फर्नांडो के लिए मौजूदा सज़ा को तत्काल निलंबन के तौर पर देखना सही नहीं होगा। असली महत्व उनके भविष्य के अनुशासनात्मक रिकॉर्ड में इस एक पॉइंट के जुड़ने का है।

यशस्वी जायसवाल की भूमिका पर सवाल

घटना के बाद भारतीय टीम के भीतर भी इस पहलू पर चर्चा हुई। भारतीय बल्लेबाज़ी कोच सितांशु कोटक ने माना कि ऐसे हाई-प्रेशर मुकाबलों में भावनाएं उभर सकती हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि जायसवाल को फर्नांडो के इतने करीब नहीं जाना चाहिए था। यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय टीम के दृष्टिकोण से मामला केवल विपक्षी खिलाड़ी के साथ हुई बहस तक सीमित नहीं है। मैदान पर आक्रामक क्रिकेट और अनुशासन के बीच संतुलन भी टीम मैनेजमेंट के लिए अहम मुद्दा है। जायसवाल ने घटना के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने लोगों से पूरे संदर्भ को जाने बिना फैसला नहीं करने की अपील की। उनके बयान से यह संकेत मिलता है कि खिलाड़ी घटना को केवल एकतरफा विवाद के रूप में नहीं देख रहे थे। हालांकि ICC की आधिकारिक कार्रवाई में किसी कथित मौखिक उकसावे को अलग आधार बनाकर सज़ा नहीं दी गई।

क्या फर्नांडो पर भी बराबर कार्रवाई उचित थी

ICC का फैसला दोनों खिलाड़ियों पर समान रहा। दोनों को 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना और एक-एक डिमेरिट पॉइंट मिला। इसका आधार यह था कि दोनों ने आर्टिकल 2.12 के तहत अनुचित शारीरिक संपर्क से जुड़े उल्लंघन को स्वीकार किया। यहां एक अहम अंतर समझना जरूरी है। सार्वजनिक चर्चा में अक्सर यह सवाल उठता है कि विवाद किसने शुरू किया और किस खिलाड़ी ने किस तरह प्रतिक्रिया दी। लेकिन ICC की आधिकारिक अनुशासनात्मक प्रक्रिया का नतीजा उस उपलब्ध घटना और संबंधित नियम के आधार पर तय हुआ, जिसमें दोनों खिलाड़ियों को उल्लंघन का दोषी माना गया। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि ICC ने किसी एक खिलाड़ी को पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया। आधिकारिक फैसला दोनों के खिलाफ समान वित्तीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई का है।

भारत-श्रीलंका टेस्ट में बढ़ा तनाव

यह घटना भारत और श्रीलंका के बीच दूसरे टेस्ट के दौरान हुई, जहां मुकाबला पहले से प्रतिस्पर्धी माहौल में चल रहा था। इससे पहले दोनों टीमों के बीच गाले में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने 165 रन से जीत दर्ज की थी। दूसरा टेस्ट 23 से 27 अगस्त तक कोलंबो में निर्धारित है। टेस्ट क्रिकेट में खिलाड़ियों के बीच तीखी नोकझोंक नई बात नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शारीरिक संपर्क की सीमा पार होने पर ICC का कोड ऑफ कंडक्ट लागू होता है। यही वजह है कि मैदान पर भावनात्मक प्रतिक्रिया और अनुशासनात्मक उल्लंघन के बीच की सीमा अहम बन जाती है।

विवाद से बड़ा मुद्दा खेल भावना का

जायसवाल और फर्नांडो की घटना ने एक पुराने क्रिकेट सवाल को फिर सामने रखा है। मैदान पर आक्रामकता कितनी स्वीकार्य है और किस बिंदु पर वह खेल भावना की सीमा से बाहर निकल जाती है? प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश करते हैं। आक्रामक जश्न, नज़रें मिलाना और शब्दों का इस्तेमाल कई बार खेल के माहौल का हिस्सा होते हैं। लेकिन ICC के नियम शारीरिक संपर्क को अलग श्रेणी में रखते हैं। इस मामले में यही सीमा निर्णायक बनी। दोनों खिलाड़ियों की भिड़ंत आगे नहीं बढ़ी, लेकिन सिरों के संपर्क ने ICC के नियम के तहत कार्रवाई का आधार तैयार किया।

क्या यह सज़ा पर्याप्त है

लेवल 1 उल्लंघन के लिए 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना और एक डिमेरिट पॉइंट मध्यम स्तर की अनुशासनात्मक कार्रवाई है। यह तत्काल प्रतिबंध से अलग है और खिलाड़ियों को भविष्य में ऐसे व्यवहार से बचने का स्पष्ट संदेश देती है। दूसरी तरफ, यह भी ध्यान रखना होगा कि दोनों खिलाड़ियों ने अपना अपराध स्वीकार किया। ICC ने औपचारिक सुनवाई की जरूरत नहीं समझी। इस वजह से प्रक्रिया अपेक्षाकृत संक्षिप्त रही। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि ICC ने घटना को गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन माना, लेकिन इसे ऐसे स्तर पर नहीं रखा जहां तत्काल मैच प्रतिबंध जरूरी हो।

आगे क्या होगा

फिलहाल दोनों खिलाड़ियों के लिए सबसे अहम पहलू यह है कि उनके रिकॉर्ड में एक-एक डिमेरिट पॉइंट दर्ज हो चुका है। अगले 24 महीनों में किसी अन्य अनुशासनात्मक घटना की स्थिति में इन पॉइंट्स का महत्व बढ़ सकता है। मैदान पर दोनों खिलाड़ियों की आगे की प्रतिक्रिया भी निगरानी में रहेगी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में खिलाड़ियों की लोकप्रियता और प्रतिस्पर्धी दबाव के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। भारत के लिए जायसवाल एक अहम बल्लेबाज़ हैं और श्रीलंका के लिए फर्नांडो गेंदबाज़ी आक्रमण का हिस्सा हैं। इसलिए दोनों टीमों के लिए प्राथमिकता यही होगी कि प्रतिस्पर्धा जारी रहे, लेकिन व्यक्तिगत टकराव दोबारा मैच के केंद्र में न आए।

निष्कर्ष

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो पर ICC की कार्रवाई इस बात की पुष्टि करती है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रतिस्पर्धी तेवर की भी एक निर्धारित सीमा है। दोनों खिलाड़ियों पर 25 प्रतिशत मैच फीस का जुर्माना और एक-एक डिमेरिट पॉइंट लगाया गया है, जबकि किसी तत्काल मैच प्रतिबंध की घोषणा नहीं हुई। स्थापित तथ्य यह है कि दोनों खिलाड़ियों के बीच 17वें ओवर के बाद तीखी भिड़ंत हुई और शारीरिक संपर्क भी हुआ। जो बात सार्वजनिक चर्चा में अलग-अलग तरीके से सामने आई, उसका अनुशासनात्मक फैसला ICC ने दोनों खिलाड़ियों के स्वीकार किए गए उल्लंघन और आर्टिकल 2.12 के आधार पर किया। आगे इस मामले का असर मुख्य रूप से उनके अनुशासनात्मक रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा। फिलहाल कोलंबो टेस्ट की यह घटना भारत-श्रीलंका मुकाबले के खेल पक्ष से अलग एक महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक अध्याय बन चुकी है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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