600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाले ड्रोन से रूस का नया हवाई युद्ध, यूक्रेन की एयर डिफेंस पर बढ़ा दबाव
Harish Qureshi
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2026-09-18 12:25:44
रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जेट-चालित गेरान ड्रोन का इस्तेमाल तेज किया है। 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाले वेरिएंट ने एयर डिफेंस के सामने नई तकनीकी और रणनीतिक चुनौती खड़ी की है।
यूक्रेन | 18 सितंबर 2026
By Mohd Haris
युद्ध में ड्रोन की बदलती भूमिका
रूस-यूक्रेन युद्ध में ड्रोन अब युद्धक्षेत्र का सहायक हथियार नहीं रह गए हैं। रूस ने जेट-चालित ड्रोन के इस्तेमाल और उत्पादन को तेज किया है, जबकि यूक्रेन को ऐसे इंटरसेप्टर विकसित करने पड़ रहे हैं जो पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेज लक्ष्यों को रोक सकें।
नए गेरान ड्रोन की रफ्तार कुछ वेरिएंट में 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक बताई गई है। इससे एयर डिफेंस को लक्ष्य पहचानने, उसकी दिशा निर्धारित करने और इंटरसेप्टर लॉन्च करने के लिए मिलने वाला समय कम हो जाता है।
600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार क्यों अहम है
पुराने शाहेद-प्रकार के ड्रोन आम तौर पर पिस्टन इंजन और प्रोपेलर पर आधारित थे। उनकी गति 200 किलोमीटर प्रति घंटे से कम रहती थी। नए जेट-चालित गेरान वेरिएंट इस तस्वीर को बदल रहे हैं।
सीएसआईएस के विश्लेषण के मुताबिक रूस ने गेरान प्लेटफॉर्म को लगातार विकसित किया है। नेविगेशन, संचार, पेलोड, प्रोपल्शन और टैक्टिक्स में बदलाव युद्ध के अनुभव के आधार पर किए जा रहे हैं। सफल बदलावों को बड़े पैमाने पर उत्पादन में शामिल किया जाता है।
यही प्रक्रिया रूस की ड्रोन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रही है। किसी एक डिजाइन को वर्षों तक स्थिर रखने के बजाय युद्धक्षेत्र से मिले फीडबैक के आधार पर बदलाव तेज किए जा रहे हैं।
गेरान-3, गेरान-4 और गेरान-5 क्या बदल रहे हैं
रूस की गेरान श्रृंखला मूल रूप से ईरानी शाहेद डिजाइन से जुड़ी है। समय के साथ इसमें अलग-अलग इंजन, नेविगेशन सिस्टम और दूसरे तकनीकी बदलाव किए गए हैं।
सीएसआईएस के अनुसार जेट-चालित वेरिएंट पुराने प्रोपेलर वाले ड्रोन की तुलना में अधिक तेज और कुछ परिस्थितियों में अधिक ऊंचाई पर उड़ने में सक्षम हैं। इससे मशीनगन और दूसरे कम दूरी वाले एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए चुनौती बढ़ती है।
यूक्रेनी सैन्य आंकड़ों पर आधारित रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार जून में 240 से 500 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाले लगभग 450 ड्रोन लॉन्च किए गए थे। अगस्त में यह संख्या लगभग 2,850 तक पहुंच गई।
रिपोर्ट के मुताबिक रूस हर महीने लगभग 3,000 जेट-चालित ड्रोन तैयार करने की क्षमता तक पहुंच चुका है। यह आंकड़ा यूक्रेन की सैन्य खुफिया आकलन पर आधारित है।
सिर्फ रफ्तार नहीं, बड़े पैमाने पर हमला भी
रूस की रणनीति में बदलाव का दूसरा पहलू संख्या है। हमले अक्सर एक या दो ड्रोन तक सीमित नहीं रहते। कई चरणों में बड़ी संख्या में ड्रोन भेजे जाते हैं।
इससे यूक्रेनी एयर डिफेंस के सामने दोहरी चुनौती आती है। उसे एक साथ बड़ी संख्या में लक्ष्यों को पहचानना होता है और फिर उन्हें रोकने के लिए पर्याप्त इंटरसेप्टर उपलब्ध रखने पड़ते हैं।
अप्रैल 2026 के एक विश्लेषण में इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी ने रूस के लगातार बहु-लहर वाले ड्रोन हमलों का उल्लेख किया था। कुछ हमले 24 से 32 घंटे तक चलने वाले चक्रों में देखे गए।
इस तरह की रणनीति एयर डिफेंस को लगातार सक्रिय रखती है और उसके संसाधनों पर दबाव डालती है।
सस्ता ड्रोन, महंगा इंटरसेप्टर
ड्रोन युद्ध का सबसे अहम पहलू लागत भी है। अगर कम लागत वाले हमलावर ड्रोन को रोकने के लिए महंगी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इस्तेमाल करनी पड़े, तो रक्षक पक्ष के सामने आर्थिक दबाव बढ़ता है।
यूक्रेन ने इस समस्या का मुकाबला कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन और मोबाइल एयर डिफेंस यूनिट के जरिए करने की कोशिश की है। लेकिन तेज जेट-चालित ड्रोन इस मॉडल के लिए अलग चुनौती पेश करते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन ने जेट-चालित रूसी ड्रोन को रोकने के लिए नए इंटरसेप्टर ड्रोन के परीक्षण शुरू किए हैं। जुलाई में हुए एक परीक्षण में कुछ इंटरसेप्टर 400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति पर नियंत्रण की समस्या से जूझते दिखे।
इससे स्पष्ट होता है कि अब मुकाबला केवल ड्रोन बनाम एयर डिफेंस का नहीं है। यह गति, सेंसर, संचार, सॉफ्टवेयर और प्रतिक्रिया समय की प्रतियोगिता भी बन चुका है।
ड्रोन और क्रूज मिसाइल के बीच की रेखा धुंधली
नए जेट-चालित ड्रोन की एक अहम विशेषता यह है कि उनकी भूमिका पारंपरिक ड्रोन से आगे जाती दिख रही है।
यूक्रेनी सैन्य अधिकारियों के अनुसार कुछ गेरान ड्रोन उड़ान के दौरान मार्ग और ऊंचाई बदल सकते हैं। इससे उन्हें पहले से अनुमानित रास्ते पर उड़ने वाले लक्ष्य की तुलना में रोकना कठिन हो सकता है।
सीएसआईएस ने गेरान कार्यक्रम को ऐसे हथियार प्लेटफॉर्म के रूप में वर्णित किया है जिसे लगातार बदला और बेहतर किया जा रहा है। इसका असर केवल एक ड्रोन मॉडल तक सीमित नहीं है। यह युद्ध में हथियार विकास की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित कर रहा है।
यही वजह है कि कुछ विश्लेषक तेज जेट-चालित ड्रोन को पारंपरिक एकतरफा हमलावर यूएवी और क्रूज मिसाइल के बीच की श्रेणी में देखते हैं।
रूस ने उत्पादन मॉडल भी बदला
रूस की रणनीति में तकनीकी बदलाव के साथ औद्योगिक क्षमता भी महत्वपूर्ण है।
यूक्रेन की सैन्य खुफिया के हवाले से मई 2026 में रिपोर्ट किया गया था कि रूस जेट-चालित गेरान ड्रोन की हिस्सेदारी बढ़ाने की योजना बना रहा है। उस आकलन में गेरान-4 और गेरान-5 के सीरियल उत्पादन का उल्लेख किया गया था।
यहां युद्ध की एक अहम तस्वीर सामने आती है। आधुनिक युद्ध में किसी हथियार की ताकत केवल उसकी तकनीकी क्षमता से तय नहीं होती। लगातार उत्पादन, मरम्मत, अपग्रेड और बड़े पैमाने पर तैनाती भी उतनी ही अहम हो जाती है।
सीएसआईएस के मुताबिक रूस ने गेरान प्लेटफॉर्म में लगातार बदलाव करके उत्पादन और युद्धक्षेत्र के बीच तेज फीडबैक चक्र तैयार किया है।
यूक्रेन का जवाब क्या है
यूक्रेन भी इस बदलाव के जवाब में अपनी रणनीति बदल रहा है। नए इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए जा रहे हैं। कुछ कंपनियां ऐसे सिस्टम पर काम कर रही हैं जो तेज रूसी ड्रोन को हवा में रोक सकें।
लेकिन समस्या केवल गति की नहीं है।
यूक्रेनी एयर डिफेंस को बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल, सामान्य ड्रोन, डिकॉय और जेट-चालित ड्रोन जैसे अलग-अलग लक्ष्यों से एक साथ निपटना पड़ता है।
रूस इन प्रणालियों को एक ही हमले में मिलाकर इस्तेमाल करता है। इससे एयर डिफेंस को यह तय करना पड़ता है कि सीमित मिसाइलों और दूसरे इंटरसेप्टर किस लक्ष्य के खिलाफ इस्तेमाल किए जाएं।
एयर डिफेंस पर बढ़ता दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन की सेना को तेज जेट-चालित ड्रोन के खिलाफ पर्याप्त विकल्प तैयार करने में मुश्किल हो रही है। कुछ यूक्रेनी अधिकारियों ने इंटरसेप्टर ड्रोन की गति और तकनीकी क्षमता को लेकर चिंता जाहिर की है।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार गेरान-5 की 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक की बताई गई गति के कारण पीछे से उसका पीछा करने वाले इंटरसेप्टर को उससे भी तेज होना पड़ सकता है। इससे सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और अन्य महंगे इंटरसेप्टर पर निर्भरता बढ़ सकती है।
इसका सीधा असर एयर डिफेंस के भंडार पर पड़ता है।
क्या रूस सचमुच युद्ध के नियम बदल रहा है
रूस की रणनीति को युद्ध के नियमों में बदलाव कहना एक विश्लेषणात्मक निष्कर्ष है, कोई औपचारिक सैन्य सिद्धांत नहीं। लेकिन यूक्रेन युद्ध में जिस तरह ड्रोन की गति, संख्या, स्वायत्तता और उत्पादन को एक साथ जोड़ा गया है, उससे आधुनिक हवाई युद्ध की पुरानी धारणाओं को चुनौती जरूर मिल रही है।
पहले महंगे लड़ाकू विमान, क्रूज मिसाइल और सतह से हवा में मार करने वाली प्रणालियां हवाई शक्ति के केंद्र में थीं। अब कम लागत वाले मानव रहित सिस्टम भी बड़े रणनीतिक असर पैदा कर रहे हैं।
इस बदलाव का दूसरा पहलू यह है कि हमला करने वाले पक्ष को हर बार महंगी मिसाइल का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं पड़ती। बड़ी संख्या में अपेक्षाकृत सस्ते ड्रोन भेजकर वह एयर डिफेंस की क्षमता और गोला-बारूद दोनों पर दबाव डाल सकता है।
यह बदलाव सिर्फ रूस तक सीमित नहीं
यूक्रेन भी इसी युद्ध से सीख रहा है। उसने कम लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन, एफपीवी ड्रोन और लंबी दूरी वाले मानव रहित सिस्टम के उत्पादन में तेज विस्तार किया है।
यानी यह एकतरफा तकनीकी बदलाव नहीं है।
रूस तेज और अधिक संख्या वाले स्ट्राइक ड्रोन विकसित कर रहा है। यूक्रेन कम लागत वाले इंटरसेप्टर और अपने लंबी दूरी के ड्रोन विकसित कर रहा है। दोनों पक्ष युद्धक्षेत्र से मिलने वाले डेटा के आधार पर अपने सिस्टम में बदलाव कर रहे हैं।
आगे की चुनौती
आने वाले समय में एयर डिफेंस के लिए चुनौती केवल अधिक मिसाइल रखने की नहीं होगी। सेंसर नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर, रडार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित पहचान, तेज इंटरसेप्टर और कम लागत वाले हथियारों का संतुलन भी अहम होगा।
रूस के नए ड्रोन यह दिखा रहे हैं कि गति और संख्या को एक साथ जोड़ना एयर डिफेंस के लिए कितना कठिन हो सकता है। वहीं यूक्रेन का जवाब यह संकेत देता है कि भविष्य के युद्ध में सस्ते ड्रोन और इंटरसेप्टर भी रणनीतिक भूमिका निभाएंगे।
यूक्रेन युद्ध का मौजूदा अनुभव यह बताता है कि आधुनिक युद्ध में तकनीकी बढ़त स्थायी नहीं रहती। एक पक्ष नया हथियार विकसित करता है, दूसरा उसके खिलाफ इंटरसेप्टर बनाता है और फिर पहला पक्ष अपनी अगली पीढ़ी की प्रणाली मैदान में उतार देता है। रूस के गेरान ड्रोन इसी तेज तकनीकी चक्र का एक प्रमुख उदाहरण बन चुके हैं।
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Harish Qureshi
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।