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नेपाल त्रासदी के बीच नस्ली पोस्ट पर कार्रवाई, सिंगापुर पुलिस के रडार पर 5 लोग

Harish Qureshi • 2026-09-09 15:41:04
नेपाल त्रासदी के बीच नस्ली पोस्ट पर कार्रवाई, सिंगापुर पुलिस के रडार पर 5 लोग

नेपाल बाढ़ और एयर इंडिया निवेश से जुड़ी ऑनलाइन नस्ली टिप्पणियों पर सिंगापुर पुलिस ने 5 लोगों की पहचान कर पूछताछ की है। जांच जारी है और व्यक्तिगत मामलों पर पुलिस ने चुप्पी रखी है।


सिंगापुर | 9 सितंबर 2026

By Mohd Haris


नेपाल बाढ़ पर ऑनलाइन टिप्पणियों से सिंगापुर में विवाद


नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन से जुड़ी त्रासदी के बीच सोशल मीडिया पर सामने आई कथित नस्ली और ज़ेनोफोबिक टिप्पणियों ने सिंगापुर में गंभीर बहस छेड़ दी है। सिंगापुर पुलिस ने कहा है कि उसने इस मामले में 5 लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की है।


पुलिस के मुताबिक इन लोगों की उम्र 29 से 66 वर्ष के बीच है। मामला नेपाल में आई बाढ़ और सिंगापुर एयरलाइंस के एयर इंडिया में निवेश से संबंधित ऑनलाइन टिप्पणियों से जुड़ा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और व्यक्तिगत मामलों के बारे में अतिरिक्त जानकारी फिलहाल साझा नहीं की जाएगी।


पुलिस ने क्या कहा


सिंगापुर पुलिस को इन दोनों मामलों से संबंधित ऑनलाइन टिप्पणियों को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद जांच शुरू की गई और 5 लोगों की पहचान कर उनसे पूछताछ की गई।


पुलिस ने कहा है कि वह ऐसे व्यवहार को गंभीरता से लेती है, जिससे नस्ली भावनाएं आहत हों या अलग-अलग नस्ली समुदायों के बीच दुश्मनी और दुर्भावना पैदा हो।


पुलिस ने यह भी कहा कि वह ऑनलाइन टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार अन्य लोगों की पहचान करने की कोशिश जारी रखेगी। जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति की भूमिका या संभावित कानूनी कार्रवाई पर पुलिस ने विस्तृत टिप्पणी नहीं की है।


विवाद की शुरुआत कैसे हुई


यह विवाद नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सामने आया। इस आपदा में नेपाल में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और हजारों लोग लापता हैं।


9 सितंबर को उपलब्ध नेपाल पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक मृतकों की संख्या 1,365 तक पहुंच गई थी और 5,326 लोग लापता बताए गए। इनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में बचाव और शवों की तलाश का अभियान जारी है।


इस मानवीय संकट के बीच सिंगापुर में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद पैदा हुआ। वरिष्ठ मंत्री के. शनमुगम ने 5 सितंबर को कहा था कि पुलिस नेपाल-तिब्बत आपदा और एयर इंडिया में सिंगापुर एयरलाइंस के निवेश से संबंधित नस्ली और ज़ेनोफोबिक टिप्पणियों की जांच कर रही है।


भारतीय समुदाय को निशाना बनाने वाली टिप्पणियां


शनमुगम ने ऑनलाइन सामने आई कुछ टिप्पणियों को सार्वजनिक रूप से शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया था। उन्होंने ऐसी टिप्पणियों का उल्लेख किया, जिनमें भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ नस्ली पूर्वाग्रह दिखाई देता था।


उन्होंने यह भी कहा था कि नेपाल की त्रासदी में सिंगापुर के नागरिकों के लापता होने की खबरों के बीच भी कुछ लोगों ने उनकी राष्ट्रीयता को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं।


शनमुगम के मुताबिक कुछ टिप्पणियों में भारतीयों के लिए अपमानजनक शब्द और नस्ली रूढ़ियों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को ऑनलाइन गुमनामी के पीछे छिपने देने के बजाय उनकी पहचान की जानी चाहिए और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।


एयर इंडिया निवेश भी विवाद का हिस्सा


इस मामले का दूसरा पहलू सिंगापुर एयरलाइंस के एयर इंडिया में निवेश से जुड़ा है।


सिंगापुर एयरलाइंस एयर इंडिया में 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। एयर इंडिया में संभावित नए निवेश को लेकर ऑनलाइन बहस के दौरान भी कुछ टिप्पणियां नस्ली और भारत विरोधी दिशा में चली गईं।


शनमुगम ने कहा था कि एयर इंडिया में निवेश से संबंधित बहस को नस्ली टिप्पणियों में बदलना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कारोबारी निवेश से जुड़े फैसले कंपनी के प्रबंधन और बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में रहने चाहिए।


इसलिए पूरे विवाद को केवल सोशल मीडिया की भाषा तक सीमित करके देखना अधूरा होगा। इसमें एक तरफ नस्ली सद्भाव का सवाल है और दूसरी तरफ सार्वजनिक बहस में कारोबारी फैसलों को जातीय या नस्ली पहचान से जोड़ने की प्रवृत्ति भी सामने आती है।


प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी जताई चिंता


सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने भी ऑनलाइन नफरत और नस्ली टिप्पणियों को लेकर चिंता जताई थी।


उन्होंने कहा कि सिंगापुर को नस्ल, भाषा और धर्म के आधार पर विभाजन की कोशिशों को स्वीकार नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि हर आपत्तिजनक ऑनलाइन टिप्पणी को रोका जाना संभव नहीं है, लेकिन समाज ऐसी टिप्पणियों को वैधता देने से इनकार कर सकता है।


वोंग ने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के पूर्वाग्रह को अनदेखा किया गया तो वह सामान्य व्यवहार का हिस्सा बन सकता है, समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ा सकता है और सामाजिक एकजुटता को नुकसान पहुंचा सकता है।


सिंगापुर की सामाजिक संरचना के लिए क्यों अहम है मामला


सिंगापुर लंबे समय से बहुजातीय और बहुधार्मिक समाज के रूप में अपनी सामाजिक एकता को राष्ट्रीय नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता रहा है।


ऐसे माहौल में प्राकृतिक आपदा जैसी मानवीय त्रासदी के दौरान किसी समुदाय की जातीय या राष्ट्रीय पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का मामला नहीं रह जातीं। वे सामाजिक सौहार्द और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल भी खड़े करती हैं।


इसी वजह से सिंगापुर सरकार और पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।


सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी दबाव


सिंगापुर के डिजिटल विकास और सूचना मंत्रालय ने ऐसे कंटेंट को हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से कार्रवाई करने की बात कही है, जो मौजूदा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करता हो।


शनमुगम ने कहा था कि मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पहले ही हटाई जा चुकी थीं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि हर टिप्पणी करने वाला व्यक्ति सिंगापुर का नागरिक है या नहीं, इस बारे में उस समय पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं थी।


यह बिंदु महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस की मौजूदा जांच केवल ऑनलाइन सामग्री के अस्तित्व तक सीमित नहीं है। जांच का मकसद जिम्मेदार लोगों की पहचान करना और यह तय करना है कि संबंधित टिप्पणियां कानून या निर्धारित दिशानिर्देशों के दायरे में किस तरह आती हैं।


नेपाल में मानवीय संकट जारी


जिस त्रासदी के बीच ये टिप्पणियां सामने आईं, उसका मानवीय असर अभी भी खत्म नहीं हुआ है।


नेपाल में 26 अगस्त को हिमालयी सीमा क्षेत्र के पास बर्फ, चट्टान और मलबे से जुड़ी घटना के बाद अचानक बाढ़ आई। बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।


बचाव एजेंसियां अब भी लापता लोगों की तलाश कर रही हैं। कई इलाकों में बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं, जबकि उनकी पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। नेपाल पुलिस के आंकड़ों के अनुसार 1,365 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,326 लोग अब भी लापता थे।


आपदा का असर नेपाल से बाहर भी हुआ है। तिब्बत में भी मौतों और लापता लोगों की खबरें सामने आई हैं। क्षेत्र में राहत और खोज अभियान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच जारी है।


जांच का अगला चरण


सिंगापुर पुलिस ने अभी यह नहीं बताया है कि पूछताछ किए गए 5 लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी।


पुलिस ने व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी करने से इनकार किया है क्योंकि जांच जारी है। इसलिए इस स्तर पर यह कहना उचित नहीं होगा कि पूछताछ किए गए सभी लोगों पर अपराध साबित हो चुका है या उनके खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं।


फिलहाल स्थापित तथ्य यही है कि 5 लोगों की पहचान हुई है, उनसे पूछताछ की गई है और पुलिस ऑनलाइन टिप्पणियों के मामले में आगे जांच कर रही है।


व्यापक संदेश


इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नस्ली नफरत के बीच सीमा कहां तय होती है।


सिंगापुर सरकार का रुख स्पष्ट है कि नस्ली समुदायों के बीच वैमनस्य पैदा करने वाली सामग्री को सामान्य ऑनलाइन बहस के रूप में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और वरिष्ठ मंत्री के. शनमुगम दोनों ने सार्वजनिक रूप से इसी चिंता को सामने रखा है।


नेपाल की बाढ़ जैसी मानवीय त्रासदी के दौरान यह बहस और भी संवेदनशील हो जाती है। आपदा में पीड़ितों की पहचान या राष्ट्रीयता से पहले उनकी मानवीय स्थिति सामने आती है।


सिंगापुर पुलिस की मौजूदा जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि विवादित टिप्पणियों के पीछे कौन लोग थे और क्या उनकी सामग्री कानून या नस्ली सद्भाव से जुड़े नियमों के उल्लंघन की श्रेणी में आती है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, व्यक्तिगत जिम्मेदारी और संभावित कानूनी कार्रवाई पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा।


वीडियो देखें

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Harish Qureshi

Harish Qureshi

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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