जर्मनी में AfD की ऐतिहासिक जीत, यूरोप में बढ़ी सियासी बेचैनी
जर्मनी के सैक्सोनी-आनहॉल्ट राज्य में दक्षिणपंथी AfD ने क्षेत्रीय चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की है। अंतिम नतीजों में पार्टी को 43.8 प्रतिशत वोट मिले और 83 सदस्यीय राज्य विधानसभा में 39 सीटें हासिल हुईं। हालांकि बहुमत के लिए 42 सीटें जरूरी थीं, इसलिए AfD तीन सीटों से पूर्ण बहुमत से पीछे रह गई।
बर्लिन, 7 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
यह नतीजा जर्मनी की सियासत में अहम मोड़ माना जा रहा है। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार कोई दक्षिणपंथी अतिवादी पार्टी किसी जर्मन राज्य में सरकार बनाने की दहलीज तक पहुंची है। AfD सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे राजनीतिक समीकरणों का सामना करना होगा।
सैक्सोनी-आनहॉल्ट में AfD की बड़ी छलांग
AfD ने पांच साल पहले के मुकाबले अपने वोट शेयर को दोगुने से अधिक कर लिया। दूसरी तरफ चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ की CDU को बड़ा झटका लगा और पार्टी करीब 17.2 प्रतिशत वोट के
साथ दूसरे स्थान पर रही।
चुनावी भागीदारी भी ऊंची रही। करीब 77.8 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। इससे संकेत मिलता है कि चुनाव में राजनीतिक ध्रुवीकरण और मतदाता सक्रियता दोनों मजबूत रहे।
AfD के लिए सरकार बनाना आसान नहीं
चुनावी जीत के बावजूद AfD के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार गठन की है। पार्टी को 83 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 42 सीटों की जरूरत थी, जबकि उसे 39 सीटें मिलीं।
जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियों ने लंबे समय से AfD के साथ गठबंधन से दूरी बनाए रखी है। इस राजनीतिक व्यवस्था को जर्मन राजनीति में “फायरवॉल” के तौर पर जाना जाता है। इसलिए
सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद AfD के सामने सत्ता तक पहुंचने का रास्ता सीधा नहीं है।
उलरिख ज़ीगमुंड की रणनीति
सैक्सोनी-आनहॉल्ट में AfD के प्रमुख उम्मीदवार उलरिख ज़ीगमुंड ने नतीजे को ऐतिहासिक जनादेश बताया। उनका अभियान प्रवासन विरोधी नीतियों, क्षेत्रीय असंतोष और जर्मनी की मौजूदा
राजनीतिक दिशा की आलोचना पर केंद्रित रहा।
AfD प्रवासन पर सख्त नीति, निर्वासन बढ़ाने और राज्य की शिक्षा तथा सार्वजनिक प्रसारण व्यवस्था में बदलाव की वकालत करती है। पार्टी रूस के साथ संबंध सुधारने और यूक्रेन को जर्मन
सहायता कम करने की भी पैरवी करती है, हालांकि विदेश नीति राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती।
जर्मनी की मुख्यधारा की राजनीति के लिए बड़ा झटका
सैक्सोनी-आनहॉल्ट में CDU का कमजोर प्रदर्शन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ के लिए भी सियासी झटका है। राज्य में CDU लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है, लेकिन इस बार AfD ने उसे
बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया।
इस नतीजे को केवल क्षेत्रीय चुनाव तक सीमित रखना भी मुश्किल है। AfD 2029 के संघीय चुनावों को ध्यान में रखकर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के
लिए यह नतीजा राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के अभियान का अहम पड़ाव बन सकता है।
आर्थिक असंतोष और प्रवासन बना बड़ा मुद्दा
सैक्सोनी-आनहॉल्ट पूर्वी जर्मनी का अपेक्षाकृत कमजोर अर्थव्यवस्था वाला राज्य है। क्षेत्र में रोजगार, आबादी में गिरावट और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक असमानता जैसे मुद्दे राजनीतिक
असंतोष को प्रभावित करते रहे हैं।
AfD ने इन आर्थिक चिंताओं को प्रवासन और राष्ट्रीय पहचान के मुद्दों के साथ जोड़ा। पार्टी को समर्थन देने वाले मतदाताओं के बीच मुख्यधारा की पार्टियों के प्रति अविश्वास भी एक अहम
राजनीतिक कारक रहा है।
यूरोप में क्यों बढ़ी चिंता
जर्मनी यूरोपीय संघ की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और यूरोपीय राजनीति की केंद्रीय ताकत है। इसलिए यहां किसी दक्षिणपंथी पार्टी की इतनी बड़ी क्षेत्रीय जीत का असर देश की सीमाओं से बाहर भी देखा जा रहा है।
यूरोप के कई देशों में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दल पहले से राजनीतिक प्रभाव बढ़ा रहे हैं। जर्मनी में AfD की यह सफलता इस व्यापक यूरोपीय रुझान को नई गति देने वाली घटना के तौर पर देखी जा रही है।
फ्रांस और पोलैंड से तीखी प्रतिक्रिया
AfD की जीत पर यूरोपीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। फ्रांस के यूरोप मामलों के मंत्री ने इसे यूरोप के लिए गंभीर क्षण बताया।
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने AfD की जीत पर खुशी जताने वालों की आलोचना की। पोलैंड की प्रतिक्रिया का एक बड़ा कारण AfD का रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख और यूक्रेन
नीति पर उसका अलग दृष्टिकोण है।
रूस और यूक्रेन का सवाल
AfD की राजनीति का एक संवेदनशील पहलू रूस के साथ जर्मनी के रिश्ते हैं। पार्टी के कई नेता रूस के साथ संबंध सुधारने और यूक्रेन को जर्मन सैन्य सहायता पर पुनर्विचार की वकालत करते
रहे हैं।
अगर AfD को भविष्य में जर्मनी के अन्य राज्यों और संघीय स्तर पर भी मजबूत जनसमर्थन मिलता है, तो इसका असर यूरोप की रूस नीति और यूक्रेन के समर्थन पर बहस में दिखाई दे सकता
है। फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक असर के रूप में देखना चाहिए, स्थापित नीति परिवर्तन के रूप में नहीं।
क्या यह जर्मनी की राजनीति का नया दौर है?
सैक्सोनी-आनहॉल्ट के नतीजे एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत जरूर देते हैं, लेकिन इसे पूरे जर्मनी के भविष्य का अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी।
AfD ने ऐतिहासिक स्तर पर प्रदर्शन किया है, लेकिन वह अभी भी राज्य विधानसभा में पूर्ण बहुमत से दूर है। मुख्यधारा की पार्टियों का गठबंधन विरोधी रुख भी कायम है। इसलिए अगला सवाल
केवल यह नहीं है कि AfD कितने वोट हासिल कर रही है, बल्कि यह है कि उसके बढ़ते जनसमर्थन के सामने बाकी पार्टियां अपनी राजनीतिक रणनीति कैसे बदलती हैं।
आने वाले चुनावों पर नजर
सैक्सोनी-आनहॉल्ट का नतीजा जर्मनी के अगले चुनावी दौर के लिए अहम संकेत बन सकता है। AfD अब इस प्रदर्शन को राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान में इस्तेमाल करेगी।
दूसरी ओर CDU और दूसरी मुख्यधारा की पार्टियों के सामने चुनौती है कि वे आर्थिक असंतोष, प्रवासन, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े सवालों पर मतदाताओं का भरोसा कैसे वापस हासिल करती हैं।
यूरोप के लिए इसका असल महत्व यही है। जर्मनी में AfD का उभार केवल एक राज्य की चुनावी कहानी नहीं है। यह यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीति, प्रवासन नीति, रूस-यूक्रेन संबंध और
मुख्यधारा की पार्टियों के भविष्य को लेकर चल रही व्यापक बहस का नया अध्याय है।
सैक्सोनी-आनहॉल्ट के नतीजे ने यह जरूर साफ कर दिया है कि AfD अब जर्मनी की राजनीति में हाशिये की ताकत नहीं रही। लेकिन क्या वह चुनावी ताकत को वास्तविक सत्ता में बदल पाएगी,
इसका जवाब अभी बाकी है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।