अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अमेरिका की प्रस्तावित नई आर्थिक पाबंदियों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि Secondary Sanctions का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और अमेरिका स्वतंत्र देशों की संप्रभुता पर अपना अधिकार थोपने की कोशिश कर रहा है।
Location: Tehran, Iran
Date: 22 अगस्त 20
By:Atif khan
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान पर नई और कड़ी आर्थिक पाबंदियां लगाने की तैयारी के बीच ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार, 22 अगस्त को इन प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिकी कदम केवल ईरान पर आर्थिक दबाव तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनका असर दूसरे संप्रभु देशों के फैसलों पर भी पड़ रहा है।
बघाई ने खास तौर पर अमेरिका की Secondary Sanctions नीति पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि अमेरिका दूसरे देशों के बैंकों, कंपनियों और कारोबारी संस्थानों को ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर दबाव में डाल रहा है। ईरान का दावा है कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून और देशों की संप्रभुता के खिलाफ है।
ईरान ने अमेरिका पर लगाया बड़ा आरोप
ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अमेरिका अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल दूसरे देशों के स्वतंत्र फैसलों को प्रभावित करने के लिए कर रहा है। तेहरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को केवल द्विपक्षीय विवाद नहीं, बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय दबाव की नीति बताया है।
अमेरिका की ओर से क्या कहा गया?
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने की बात कही है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान पर अधिकतम आर्थिक दबाव डालना है। नई पाबंदियों का असर उन देशों और कंपनियों पर भी पड़ सकता है जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं।
ईरान ने दी जवाबी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी दबाव को लेकर कहा है कि पहले लगाए गए बड़े प्रतिबंध अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सके और नया अभियान भी सफल नहीं होगा। इसी बीच ईरानी सैन्य नेतृत्व ने अमेरिका की नई धमकियों के जवाब में कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।
तनाव का असर वैश्विक स्तर पर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों, खासकर चीन, पर भी अमेरिकी Secondary Sanctions का दबाव बढ़ सकता है। इसी वजह से यह मामला वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निष्कर्ष:
22 अगस्त की यह खबर ईरान के विदेश मंत्रालय की अमेरिकी नई आर्थिक पाबंदियों पर प्रतिक्रिया को सामने रखती है। ईरान ने Secondary Sanctions को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए अमेरिकी नीति का विरोध किया है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।