India
अमित शाह ने PRAHAAR के तहत आतंकवाद-रोधी रणनीति पर दिया जोर
Wasi Siddiqui
•
2026-09-28 16:19:48
अमित शाह ने PRAHAAR के प्रभावी अमल, आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण और खुफिया समन्वय पर जोर दिया। नीति में रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया और कानून के शासन पर फोकस है।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 28 सितंबर 2026
✍️ Wasi Siddiqui
आतंकवाद-रोधी नीति पर फोकस
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति और रणनीति PRAHAAR के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया है। सरकार ने फरवरी 2026 में PRAHAAR को भारत की पहली व्यापक National Counter-Terrorism Policy & Strategy के रूप में पेश किया था। इसका मकसद आतंकवादी गतिविधियों और रेडिकलाइजेशन से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक समन्वित फ्रेमवर्क तैयार करना है।
PRAHAAR का ढांचा आतंकवादी हमलों की रोकथाम, खतरे के मुताबिक तेज और अनुपातिक प्रतिक्रिया, सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, मानवाधिकार और Rule of Law आधारित प्रक्रियाओं, रेडिकलाइजेशन को बढ़ावा देने वाली परिस्थितियों को कम करने, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समाज की भागीदारी के जरिए रिकवरी एवं रेजिलिएंस पर आधारित है।
राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र में समन्वय
PRAHAAR का एक अहम पहलू Whole-of-Government और Whole-of-Society अप्रोच है। इसके तहत आतंकवाद को केवल किसी एक सुरक्षा एजेंसी की चुनौती के तौर पर देखने के बजाय केंद्रीय और राज्य स्तर की संस्थाओं के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है।
गृह मंत्रालय के Counter Terrorism and Counter Radicalization Division की जिम्मेदारियों में आतंकवाद और रेडिकलाइजेशन से संबंधित नीति निर्माण, समन्वय और अमल शामिल है। विभाग टेरर फाइनेंसिंग, ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन और प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े मामलों पर भी काम करता है।
इंटेलिजेंस शेयरिंग पर जोर
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हालिया सरकारी विमर्श में Multi-Agency Centre यानी MAC के जरिए खुफिया सूचनाओं के फ्यूजन और विश्लेषण को अहमियत दी गई है।
अगस्त 2026 में National Security Strategies Conference के दौरान अमित शाह ने MAC प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सूचनाओं के AI आधारित विश्लेषण के जरिए विभिन्न राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए Standard Operating Procedures तैयार करने पर जोर दिया था। उन्होंने एजेंसियों को घुसपैठ के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश भी दिए थे।
आतंकवाद और रेडिकलाइजेशन पर रणनीतिक फोकस
PRAHAAR आतंकवादी हमले होने के बाद प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है। सरकारी दस्तावेज में Prevention को शुरुआती स्तर पर प्रमुखता दी गई है। इसके साथ आतंकवादी नेटवर्क, रेडिकलाइजेशन और उससे जुड़ी परिस्थितियों पर कार्रवाई की बात कही गई है।
नीति में Human Rights और Rule of Law आधारित प्रक्रियाओं को भी एक अलग आधार दिया गया है। इसका मतलब आतंकवाद-रोधी कार्रवाई के साथ कानूनी प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही को नीति के ढांचे में शामिल करना है।
नीति के 7 प्रमुख स्तंभ
PRAHAAR के 7 प्रमुख स्तंभ हैं।
पहला, भारतीय नागरिकों और राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के लिए आतंकवादी हमलों की रोकथाम।
दूसरा, खतरे के अनुरूप तेज और अनुपातिक प्रतिक्रिया।
तीसरा, पूरे सरकारी तंत्र की आंतरिक क्षमताओं को जोड़कर बेहतर तालमेल स्थापित करना।
चौथा, मानवाधिकार और Rule of Law आधारित प्रक्रियाओं के जरिए सुरक्षा चुनौतियों से निपटना।
पांचवां, रेडिकलाइजेशन सहित आतंकवाद के लिए अनुकूल परिस्थितियों को कम करना।
छठा, आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को मजबूत करना और उन्हें दिशा देना।
सातवां, Whole-of-Society अप्रोच के जरिए रिकवरी और रेजिलिएंस को मजबूत करना।
प्रशिक्षण और जांच पर जोर
अगस्त 2026 की National Security Strategies Conference में अमित शाह ने PRAHAAR के अमल के लिए प्रशिक्षण पर जोर दिया था। सरकारी जानकारी के अनुसार उन्होंने आतंकवाद और रेडिकलाइजेशन से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए अधिकारियों और एजेंसियों की तैयारी बढ़ाने की बात कही थी।
इसी संदर्भ में UAPA से जुड़े मामलों की जांच में व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने तथा भगोड़ों को वापस लाने और उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत मामलों की सुनवाई तेज करने पर भी जोर दिया गया था।
बदलते सुरक्षा खतरे का संदर्भ
भारत की सुरक्षा व्यवस्था के सामने आतंकवाद के साथ-साथ ऑनलाइन रेडिकलाइजेशन, साइबर अपराध, ड्रोन आधारित गतिविधियां, टेरर फाइनेंसिंग और सीमा पार नेटवर्क जैसी चुनौतियां भी चर्चा का हिस्सा रही हैं।
PRAHAAR का उद्देश्य इन अलग-अलग आयामों को एक राष्ट्रीय नीति ढांचे में जोड़ना है। सरकार के अनुसार इसका आधार Prevention, Response, Institutional Coordination और Resilience है।
नीति से आगे अमल की चुनौती
PRAHAAR को लागू करने की वास्तविक चुनौती केंद्र और राज्यों की एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय से जुड़ी है। पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था संविधान के तहत राज्य सूची के विषय हैं, जबकि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संस्थागत पहलू केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
ऐसे में किसी भी राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी रणनीति के प्रभावी अमल के लिए केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस, खुफिया तंत्र और अन्य सुरक्षा संस्थाओं के बीच सूचना और ऑपरेशनल समन्वय अहम रहेगा।
आगे क्या होगा
PRAHAAR के अगले चरण में नीति के अलग-अलग प्रावधानों को संस्थागत प्रक्रियाओं, प्रशिक्षण, SOPs और एजेंसियों के बीच समन्वय के जरिए लागू करना महत्वपूर्ण होगा।
राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हालिया सरकारी कार्यक्रमों में AI आधारित इंटेलिजेंस एनालिसिस, घुसपैठ रोकने, आतंकवाद-रोधी प्रशिक्षण और UAPA मामलों की एकीकृत जांच जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया है।
PRAHAAR भारत की आतंकवाद-रोधी नीति को एक सार्वजनिक राष्ट्रीय फ्रेमवर्क में व्यवस्थित करता है। इसका फोकस केवल हमले के बाद प्रतिक्रिया पर नहीं, बल्कि Prevention, Intelligence Coordination, Radicalisation से मुकाबला, Rule of Law, International Cooperation और समाज की Resilience पर है।
अमित शाह की ओर से इसके प्रभावी अमल और प्रशिक्षण पर जोर इस नीति को संस्थागत स्तर पर लागू करने की दिशा में एक अहम प्रशासनिक पहल के रूप में सामने आता है। इसकी वास्तविक प्रभावशीलता आगे होने वाले अमल, एजेंसियों के समन्वय और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन से तय होगी।गी।
Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।