अरहर की दाल क्यों है खास?
भारतीय रसोई में दाल को सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हीं दालों में अरहर की दाल, जिसे तूर दाल भी कहा जाता है, रोजमर्रा के भोजन का लोकप्रिय हिस्सा है। इसमें पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, आहार फाइबर और विभिन्न विटामिन तथा खनिज पाए जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दालों और अन्य फलियों को संतुलित और विविध आहार का हिस्सा बनाना स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है। फलियां प्रोटीन और आहार फाइबर जैसे पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करती हैं।
१. शरीर को मिलता है पौधों से प्रोटीन
अरहर की दाल शाकाहारी भोजन में प्रोटीन का अच्छा स्रोत हो सकती है। शरीर में प्रोटीन मांसपेशियों समेत कई संरचनात्मक और कार्यात्मक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी होता है।दाल को अनाज जैसे चावल या रोटी के साथ खाने से भोजन में प्रोटीन के अलग-अलग स्रोत शामिल होते हैं। हालांकि, केवल दाल को ही संपूर्ण प्रोटीन स्रोत मानना उचित नहीं होगा। संतुलित आहार में अलग-अलग खाद्य पदार्थों को शामिल करना जरूरी है।
२. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकती है
अरहर की दाल में आहार फाइबर पाया जाता है। फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज और मल त्याग को बनाए रखने में मदद करता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए भोजन से मिलने वाले प्राकृतिक आहार फाइबर की पर्याप्त मात्रा लेने पर जोर देता है। फलियां फाइबर के महत्वपूर्ण स्रोतों में शामिल हैं। हालांकि, जिन लोगों को दाल खाने के बाद गैस या पेट फूलने की समस्या होती है, उन्हें अपनी सहनशीलता के अनुसार मात्रा तय करनी चाहिए।
३. हृदय स्वास्थ्य के लिए उपयोगी आहार का हिस्सा
दालों में फाइबर होता है और सामान्य तौर पर इनमें संतृप्त वसा कम होती है। शोध में अधिक मात्रा में फलियों के सेवन और हृदय संबंधी जोखिमों में कमी के बीच संबंध देखा गया है।विश्व स्वास्थ्य संगठन के साक्ष्यों में अधिक दालों के सेवन को हृदय रोग और कोरोनरी हृदय रोग के कम जोखिम से जोड़ा गया है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अरहर की दाल अकेले किसी हृदय रोग से बचाव या उसका इलाज करती है। इसलिए दाल का फायदा तभी बेहतर तरीके से मिल सकता है, जब पूरी डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और सीमित मात्रा में अस्वास्थ्यकर वसा शामिल हो।
४. ब्लड शुगर को संतुलित रखने वाली डाइट में जगह
फलियों में फाइबर और जटिल कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। इनकी वजह से भोजन का पाचन अपेक्षाकृत धीरे हो सकता है।वैज्ञानिक साक्ष्यों में फलियों के अधिक सेवन और टाइप-२ मधुमेह के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, मधुमेह से पीड़ित व्यक्ति के लिए दाल की मात्रा और पूरे भोजन की संरचना व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार तय की जानी चाहिए। सिर्फ अरहर की दाल को मधुमेह का उपचार मानना सही नहीं है।
५. जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व भी मिलते हैं
अरहर की दाल समेत फलियां विभिन्न विटामिन और खनिजों का स्रोत होती हैं। इनमें फोलेट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।फोलेट शरीर में कोशिकाओं के निर्माण और सामान्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। आयरन भी शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है। हालांकि, दाल से मिलने वाले आयरन का अवशोषण उसकी मात्रा के साथ-साथ भोजन की पूरी संरचना पर भी निर्भर करता है।
६. वजन नियंत्रित रखने वाली डाइट में मददगार
फाइबर युक्त भोजन लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। यही वजह है कि फलियों को संतुलित वजन-प्रबंधन वाली डाइट में शामिल किया जाता है। लेकिन दाल को वजन घटाने वाला कोई विशेष खाद्य पदार्थ मानना सही नहीं होगा। दाल को अधिक घी, मक्खन या तड़के के साथ खाने पर भोजन की कुल कैलोरी काफी बढ़ सकती है। इसलिए मात्रा और पकाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है।
७. शाकाहारी भोजन को बनाती है अधिक पौष्टिक
जो लोग मांस, मछली या अंडे नहीं खाते, उनके लिए दालें रोजमर्रा के भोजन में पौधों से मिलने वाला प्रोटीन उपलब्ध कराने का व्यावहारिक माध्यम हैं। एफएओ के अनुसार फलियां किफायती प्रोटीन और पोषक तत्वों का स्रोत हो सकती हैं तथा विविध आहार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
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अरहर की दाल खाते समय किन बातों का रखें ध्यान?
अरहर की दाल सामान्य तौर पर संतुलित भोजन का हिस्सा हो सकती है, लेकिन हर व्यक्ति की पाचन क्षमता अलग होती है। कुछ लोगों को दाल खाने के बाद गैस, पेट फूलना या भारीपन महसूस हो सकता है। दाल को अच्छी तरह पकाकर खाना बेहतर रहता है। साथ ही बहुत ज्यादा नमक, घी या तेल डालने से इसके साथ मिलने वाले अतिरिक्त वसा और सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है। किसी व्यक्ति को गुर्दे की बीमारी, विशेष चिकित्सकीय डाइट या दाल से जुड़ी असहिष्णुता जैसी समस्या है तो उसे अपने चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार भोजन तय करना चाहिए।
निष्कर्ष
अरहर की दाल भारतीय भोजन में शामिल एक पौष्टिक और किफायती खाद्य पदार्थ है। इसमें प्रोटीन, आहार फाइबर, फोलेट और विभिन्न खनिज पाए जाते हैं, इसलिए इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि फलियों से भरपूर आहार हृदय स्वास्थ्य, पाचन और चयापचय संबंधी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को सभी बीमारियों का इलाज या बचाव मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। संतुलित मात्रा, विविध आहार और स्वस्थ जीवनशैली ही बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद है।