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पान का पत्ता सेहत के लिए कितना फायदेमंद? जानिए क्या है वैज्ञानिक सच्चाई

Neelam Saini 2026-08-29 17:57:33
पान का पत्ता सेहत के लिए कितना फायदेमंद? जानिए क्या है वैज्ञानिक सच्चाई

पान के पत्ते में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं और शोध में इसके एंटीऑक्सीडेंट व रोगाणुरोधी गुणों की संभावना सामने आई है। हालांकि, इसके चिकित्सकीय लाभों पर और शोध जरूरी है।

पान का पत्ता और पान—दोनों को एक न समझें

भारत में पान का पत्ता सिर्फ खान-पान का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी रहा है। कई जगह भोजन के बाद पान खाने की परंपरा आज भी दिखाई देती है। लेकिन स्वास्थ्य के लिहाज से सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पान का पत्ता और पान में इस्तेमाल होने वाली दूसरी सामग्री एक ही चीज नहीं हैं। पान का पत्ता पाइपर बेटल नामक बेल से प्राप्त होता है। वैज्ञानिक साहित्य में इसके पत्तों में विभिन्न जैव सक्रिय वनस्पति यौगिकों की मौजूदगी और इनके संभावित एंटीऑक्सीडेंट तथा रोगाणुरोधी प्रभावों का अध्ययन किया गया है। हालांकि, इनमें से कई निष्कर्ष प्रयोगशाला या पशु-अध्ययनों से आए हैं और इन्हें सीधे मनुष्यों में बीमारी के इलाज का प्रमाण नहीं माना जा सकता। 

 पान के पत्ते में पाए जाते हैं जैव सक्रिय यौगिक

पान के पत्ते में विभिन्न फाइटोकेमिकल यानी पौधों से मिलने वाले जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। वैज्ञानिक समीक्षाओं में हाइड्रॉक्सीचैविकॉल समेत कई यौगिकों का उल्लेख मिलता है। इन यौगिकों की वजह से पान के पत्ते पर एंटीऑक्सीडेंट, रोगाणुरोधी और अन्य जैविक प्रभावों को लेकर शोध किया गया है। लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि पान का पत्ता खाने से निश्चित रूप से किसी बीमारी से बचाव हो जाता है। 

 एंटीऑक्सीडेंट गुणों की संभावना

शरीर में ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़ी प्रक्रियाओं पर एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों का प्रभाव पड़ सकता है। पान के पत्ते के अर्क और उसमें मौजूद कुछ यौगिकों में प्रयोगशाला अध्ययनों में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि देखी गई है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। प्रयोगशाला में किसी पौधे के अर्क में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि मिलना और इंसान में उस पौधे को खाने से बीमारी का इलाज होना दो अलग बातें हैं। इसलिए पान के पत्ते को कैंसर, मधुमेह या किसी अन्य बीमारी का उपचार बताना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। 

 कुछ रोगाणुओं के खिलाफ गतिविधि पर शोध

पान के पत्ते पर किए गए शोध में इसके अर्क और आवश्यक तेल में विभिन्न बैक्टीरिया और फफूंद के खिलाफ प्रयोगशाला स्तर पर गतिविधि देखी गई है। एक वैज्ञानिक समीक्षा में पान के पत्ते के अर्क और आवश्यक तेल से कई ग्राम-पॉजिटिव और ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया तथा कुछ फफूंदों की वृद्धि पर प्रभाव का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पान का पत्ता संक्रमण होने पर चिकित्सकीय दवा की जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। संक्रमण की स्थिति में उचित चिकित्सकीय जांच और उपचार जरूरी है।

पाचन से जुड़े पारंपरिक इस्तेमाल का भी उल्लेख

पान के पत्ते का इस्तेमाल एशिया की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। वैज्ञानिक समीक्षाओं में इसे पारंपरिक रूप से पाचन संबंधी उपयोगों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है। लेकिन पारंपरिक इस्तेमाल और चिकित्सकीय रूप से सिद्ध प्रभाव में अंतर होता है। इसलिए भोजन के बाद पान खाने से हर व्यक्ति का पाचन बेहतर होगा, ऐसा निश्चित रूप से कहना वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित नहीं है।

क्या पान का पत्ता मुंह की सेहत के लिए अच्छा है?

पान के पत्ते के कुछ पारंपरिक इस्तेमाल में मुंह की सफाई और सांस की दुर्गंध से जुड़े दावे भी किए जाते हैं। वैज्ञानिक साहित्य में इसके रोगाणुरोधी गुणों पर शोध जरूर हुआ है, लेकिन इसे नियमित मौखिक स्वच्छता का विकल्प नहीं माना जा सकता। दांतों और मसूड़ों की देखभाल के लिए ब्रश करना, दांतों की नियमित जांच और उचित मौखिक स्वच्छता अधिक महत्वपूर्ण हैं।

असली सवाल: क्या पान का पत्ता खाना सुरक्षित है?

यहां सबसे महत्वपूर्ण बात पान के पत्ते और पान के मिश्रण के बीच अंतर की है।पान में अक्सर सुपारी, चूना, कत्था और कई मामलों में तंबाकू मिलाया जाता है। इन चीजों की मौजूदगी से स्वास्थ्य जोखिम काफी बदल जाता है।विश्व स्वास्थ्य संगठन और अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी के अनुसार सुपारी और सुपारी वाले पान का सेवन मुंह के कैंसर के जोखिम से जुड़ा है। यह जोखिम तंबाकू के साथ और भी गंभीर हो सकता है। इसलिए पान के पत्ते में संभावित लाभकारी वनस्पति यौगिक पाए जाने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सुपारी या तंबाकू वाला पान भी सेहतमंद है।

तंबाकू वाला पान क्यों है ज्यादा चिंताजनक?

तंबाकू किसी भी रूप में स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सभी प्रकार के तंबाकू का इस्तेमाल हानिकारक है और तंबाकू कई तरह के कैंसर समेत हृदय और फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। तंबाकू के साथ पान खाने की आदत को इसलिए सामान्य खान-पान की आदत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या बिना तंबाकू वाला सुपारी पान सुरक्षित है?

नहीं, इसे पूरी तरह सुरक्षित मानना भी सही नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी ने सुपारी को मनुष्यों के लिए कैंसरकारी पदार्थ के रूप में वर्गीकृत किया है। सुपारी के सेवन को मुंह के कैंसर और मुंह की एक पूर्व-कैंसर अवस्था, जिसे ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस कहा जाता है, से जोड़ा गया है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति तंबाकू छोड़कर सिर्फ सुपारी वाला पान खाना शुरू करता है, तो इसे स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

पान के पत्ते को कैसे देखें?

अगर बात सिर्फ पान के पत्ते की हो तो उपलब्ध शोध में इसमें कुछ संभावित जैव सक्रिय गुण जरूर सामने आए हैं। विशेष रूप से प्रयोगशाला अध्ययनों में इसके एंटीऑक्सीडेंट और रोगाणुरोधी प्रभावों पर शोध हुआ है। लेकिन मनुष्यों में इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर अभी इतने मजबूत प्रमाण नहीं हैं कि इसे किसी बीमारी की रोकथाम या इलाज के लिए चिकित्सकीय रूप से अनुशंसित किया जाए। यानी पान के पत्ते को पौष्टिक या औषधीय चमत्कार बताना भी सही नहीं होगा और उसे सुपारी-तंबाकू वाले पान के बराबर मानना भी सही नहीं है।

किन लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए?

जो लोग नियमित रूप से सुपारी या तंबाकू वाला पान खाते हैं, उन्हें इस आदत को छोड़ने की कोशिश करनी चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर रोकथाम संबंधी जानकारी में तंबाकू और सुपारी से दूरी को मुंह के कैंसर के जोखिम को कम करने की महत्वपूर्ण रणनीति माना गया है। यदि किसी व्यक्ति के मुंह में लंबे समय से घाव है, सफेद या लाल धब्बा दिखाई देता है, मुंह खोलने में परेशानी होती है या कोई असामान्य गांठ महसूस होती है, तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

निष्कर्ष

पान का पत्ता अपने आप में और सुपारी-तंबाकू वाला पान एक जैसी चीजें नहीं हैं। पान के पत्ते में कई जैव सक्रिय वनस्पति यौगिक पाए जाते हैं और प्रयोगशाला आधारित शोध में इसके एंटीऑक्सीडेंट तथा रोगाणुरोधी गुणों की संभावना सामने आई है। लेकिन अभी उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पान के पत्ते को किसी बीमारी का इलाज या निश्चित रूप से रोगों से बचाने वाला खाद्य पदार्थ कहना उचित नहीं है।
सबसे अहम बात यह है कि पान के पत्ते को सुपारी और तंबाकू से अलग समझें। सुपारी और तंबाकू वाला पान मुंह के कैंसर समेत गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है। 

शाह टाइम्स की सलाह

स्वास्थ्य संबंधी किसी भी पारंपरिक खाद्य या घरेलू नुस्खे को दवा का विकल्प न मानें और लगातार बनी रहने वाली स्वास्थ्य समस्या में चिकित्सकीय सलाह लें।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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