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डोभाल के बीजिंग पहुंचते ही कांग्रेस ने चीन वार्ता पर सवाल उठाए

Shah Times • 2026-08-24 15:05:37
डोभाल के बीजिंग पहुंचते ही कांग्रेस ने चीन वार्ता पर सवाल उठाए

डोभाल बीजिंग पहुंचे, चीन वार्ता पर कांग्रेस के सवाल

भारत-चीन सीमा वार्ता से पहले पवन खेड़ा ने सरकार को घेरा

25वीं SR वार्ता के लिए चीन पहुंचे डोभाल, कांग्रेस ने पूछा सवाल


राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भारत-चीन सीमा विवाद पर 25वें दौर की Special Representatives वार्ता के लिए बीजिंग पहुंचे हैं। उनकी चीनी समकक्ष वांग यी से मंगलवार को बैठक होगी। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सरकार की चीन नीति और सीमा वार्ता की दिशा पर सवाल उठाए हैं। वार्ता का एजेंडा सीमा प्रबंधन और विवाद समाधान है।


बीजिंग, चीन | 24 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स 

By Mohd Haris


डोभाल के बीजिंग पहुंचते ही चीन पर सियासी बहस

भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत एक बार फिर केंद्र में है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 24 अगस्त को बीजिंग पहुंच गए हैं, जहां वह भारत-चीन सीमा मुद्दे पर Special Representatives यानी विशेष प्रतिनिधियों की 25वीं वार्ता में हिस्सा लेंगे।

डोभाल की यात्रा के बीच कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने वार्ता के समय, सरकार के रुख और सीमा विवाद को लेकर अब तक हुई प्रगति पर सवाल उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

वांग यी के साथ होगी 25वीं वार्ता

डोभाल भारत के Special Representative हैं, जबकि चीन की तरफ से विदेश मंत्री वांग यी इस तंत्र के Special Representative हैं। दोनों की 25वीं बैठक 25 अगस्त को होने वाली है। आकाशवाणी ने भी विदेश मंत्रालय के हवाले से इसकी पुष्टि की है। Special Representatives तंत्र की शुरुआत 2003 में भारत-चीन सीमा विवाद के राजनीतिक समाधान के लिए हुई थी। दोनों देशों के बीच लगभग 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा को लेकर विवाद है, हालांकि दोनों देशों के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग स्वरूप रखती है। इस तंत्र का उद्देश्य केवल तत्काल सीमा तनाव को संभालना नहीं, बल्कि सीमा विवाद के व्यापक समाधान के लिए राजनीतिक स्तर पर बातचीत करना भी है।

कांग्रेस ने क्या सवाल उठाए?

डोभाल के बीजिंग पहुंचने के साथ कांग्रेस ने सरकार से पूछा है कि सीमा विवाद को लेकर बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ रही है। पवन खेड़ा ने सरकार के चीन संबंधी दृष्टिकोण और वार्ता के परिणामों पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की आलोचना का राजनीतिक केंद्र यह है कि सरकार को देश को यह बताना चाहिए कि सीमा पर स्थिति और चीन के साथ बातचीत में वास्तविक प्रगति क्या हुई है। हालांकि, इन सवालों को कांग्रेस का राजनीतिक पक्ष समझना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वार्ता विफल हो चुकी है या सरकार ने कोई ऐसा समझौता कर लिया है जिसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

सीमा विवाद में बातचीत क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत और चीन के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। 2020 में पूर्वी लद्दाख में सैन्य तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के संबंधों पर गहरा असर पड़ा और सैन्य तथा कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत का सिलसिला चला। इसके बाद दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में तनाव कम करने के लिए कई चरणों में सैन्य और कूटनीतिक बातचीत की। Special Representatives तंत्र इसी व्यापक डिप्लोमैटिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अगस्त 2025 में हुई 24वीं SR वार्ता में दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा 2005 के Political Parameters and Guiding Principles को सीमा समाधान के संदर्भ में महत्वपूर्ण आधार मानने की बात दोहराई थी। चीन के विदेश मंत्रालय ने उस वार्ता के बाद 10 बिंदुओं वाले सहमति दस्तावेज को प्रकाशित किया था।

24वीं वार्ता में क्या तय हुआ था?

2025 की 24वीं वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने पर जोर दिया था। साथ ही सीमा निर्धारण के कुछ क्षेत्रों में Early Harvest की संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए Expert Group बनाने और सीमा प्रबंधन को आगे बढ़ाने के लिए Working Group बनाने पर सहमति हुई थी। इसके अलावा पश्चिमी सेक्टर में मौजूद General-Level Mechanism के साथ पूर्वी और मध्य सेक्टर में भी ऐसे तंत्र बनाने की बात सामने आई थी। दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन और संभावित De-escalation के सिद्धांतों तथा तौर-तरीकों पर चर्चा जारी रखने पर भी सहमति जताई थी।

24वीं बैठक में ही 25वीं SR वार्ता को 2026 में चीन में आयोजित करने पर सहमति बनी थी। इसलिए डोभाल की मौजूदा बीजिंग यात्रा अचानक शुरू हुई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि पहले से तय डिप्लोमैटिक मैकेनिज्म का अगला चरण है।

क्या इस वार्ता से सीमा विवाद खत्म हो जाएगा?

ऐसा निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगा। SR तंत्र लंबे समय से चल रहा है और अब 25वें दौर तक पहुंच चुका है, लेकिन भारत-चीन सीमा विवाद का अंतिम समाधान अभी नहीं हुआ है। मंगलवार की बैठक में किन मुद्दों पर कितनी प्रगति होती है, यह वार्ता के बाद जारी होने वाले आधिकारिक बयान से अधिक स्पष्ट होगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में दोनों पक्षों के बीच किसी अंतिम सीमा समझौते की घोषणा नहीं हुई है।

इसलिए “सीमा विवाद खत्म होने वाला है” या “बातचीत पूरी तरह विफल है”, दोनों तरह के दावे मौजूदा जानकारी से साबित नहीं होते।

सीमा प्रबंधन भी एजेंडे में महत्वपूर्ण

सीमा विवाद के साथ-साथ सीमा प्रबंधन भी भारत-चीन बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2025 की 24वीं बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा सैन्य और डिप्लोमैटिक मैकेनिज्म के जरिए बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई थी। इसका अर्थ यह है कि बातचीत का मकसद केवल अंतिम सीमा रेखा तय करना नहीं है। तत्काल प्राथमिकता सीमा पर किसी नए तनाव को रोकना और मौजूदा मैकेनिज्म के जरिए संवाद बनाए रखना भी है। भारत के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सीमा पर स्थिरता का सीधा असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।

डोभाल की यात्रा का समय क्यों महत्वपूर्ण है?

डोभाल की बीजिंग यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ाने की कोशिशें जारी हैं। यह यात्रा सितंबर में नई दिल्ली में प्रस्तावित BRICS शिखर सम्मेलन से कुछ सप्ताह पहले हो रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना भी रिपोर्टों में सामने आई है, हालांकि इस यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अलग विषय है। इस संदर्भ में सीमा वार्ता का महत्व केवल सीमा विवाद तक सीमित नहीं है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक संपर्क, आर्थिक रिश्ते, क्षेत्रीय सुरक्षा और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग भी व्यापक भारत-चीन संबंधों का हिस्सा हैं।

फिर भी यह मान लेना कि डोभाल की यात्रा सीधे शी जिनपिंग की भारत यात्रा की तैयारी के लिए ही हो रही है, अभी एक विश्लेषण होगा। आधिकारिक रूप से घोषित एजेंडा सीमा मुद्दे पर 25वीं Special Representatives वार्ता है।

भारत के लिए असली चुनौती क्या है?

भारत के सामने दो समानांतर लक्ष्य हैं। पहला, सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना। दूसरा, सीमा विवाद के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में राजनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना। इन दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन आसान नहीं है। सीमा पर किसी भी नए सैन्य तनाव की स्थिति पूरी द्विपक्षीय बातचीत को प्रभावित कर सकती है। इसीलिए डोभाल और वांग यी के बीच बातचीत में सीमा प्रबंधन, संवाद के मौजूदा तंत्र और भविष्य की वार्ता प्रक्रिया महत्वपूर्ण मुद्दे रहेंगे।

चीन के साथ रिश्तों में सुधार की सीमा

भारत और चीन के संबंधों में पिछले कुछ वर्षों में तनाव का बड़ा कारण सीमा विवाद रहा है। इसके बावजूद दोनों देशों ने कुछ क्षेत्रों में संवाद फिर से सक्रिय किया है। 2025 की SR वार्ता में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व को दोहराया था। इसके अलावा सीमा व्यापार और ट्रांस-बॉर्डर नदियों जैसे मुद्दों पर भी बातचीत जारी रखने की बात सामने आई थी। इससे संकेत मिलता है कि दोनों देश एक साथ कई ट्रैक पर संबंध संभालने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सीमा विवाद का अंतिम समाधान अब भी सबसे कठिन मुद्दों में बना हुआ है।

कांग्रेस की आलोचना और सरकार की जवाबदेही

विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में विपक्ष की भूमिका सरकार से जवाब मांगने की भी है। कांग्रेस का ताजा सवाल इसी राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है। लेकिन ऐसी आलोचना का मूल्यांकन तथ्यात्मक परिणामों के आधार पर होना चाहिए। अगर सरकार वार्ता के बाद स्पष्ट प्रगति, सीमा प्रबंधन से जुड़े फैसले या नए समझौते सामने रखती है, तो उससे मौजूदा आलोचना का राजनीतिक मूल्यांकन अलग होगा।

इसी तरह अगर कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तो विपक्ष को सरकार की रणनीति पर सवाल उठाने के लिए और आधार मिल सकता है।

वार्ता के बाद क्या देखना होगा?

25वीं SR वार्ता के बाद सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज दोनों देशों की आधिकारिक ब्रीफिंग और संयुक्त या अलग-अलग बयान होंगे। इनसे पता चलेगा कि किन मुद्दों पर सहमति बनी और किन विषयों पर मतभेद कायम रहे। इसके साथ यह भी देखना होगा कि 2025 की 24वीं वार्ता में तय Expert Group, Working Group और दूसरे सीमा प्रबंधन मैकेनिज्म पर कितनी प्रगति हुई है। अगर वार्ता में किसी नए Early Harvest, सीमा प्रबंधन या De-escalation मैकेनिज्म पर सहमति बनती है, तो उसे महत्वपूर्ण प्रगति माना जाएगा। इसके विपरीत केवल बातचीत जारी रहने को सीमा विवाद के समाधान के बराबर नहीं माना जा सकता।

निष्कर्ष

अजीत डोभाल का बीजिंग पहुंचना भारत-चीन सीमा विवाद पर उच्चस्तरीय डिप्लोमैटिक संवाद के अगले चरण की शुरुआत है। 25वीं Special Representatives वार्ता में डोभाल और वांग यी सीमा मुद्दे पर बातचीत करेंगे। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इसी मौके पर सरकार की चीन नीति और सीमा वार्ता की दिशा पर सवाल उठाए हैं। लेकिन फैक्ट-चेक के लिहाज से कांग्रेस के आरोपों और स्थापित तथ्यों को अलग रखना जरूरी है। डोभाल की यात्रा आधिकारिक रूप से सीमा वार्ता के लिए है और किसी अंतिम सीमा समझौते की घोषणा अभी नहीं हुई है। अब असली नजर 25 अगस्त की बातचीत और उसके बाद आने वाले आधिकारिक बयान पर रहेगी। अगर दोनों पक्ष सीमा प्रबंधन और तनाव कम करने के ठोस कदमों पर सहमत होते हैं, तो यह भारत-चीन रिश्तों में महत्वपूर्ण पेशरफ़्त होगी। लेकिन अंतिम सीमा समाधान के लिए अभी लंबी और जटिल डिप्लोमैटिक प्रक्रिया बाकी है।

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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