यूपी कांग्रेस का बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर
वाराणसी से कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान, बूथ तक पहुंचेगी रणनीति
कांग्रेस की नई कवायद, बूथ और वार्ड स्तर पर तय होंगी जिम्मेदारियां
वाराणसी में कांग्रेस ने संगठन सृजन अभियान के तहत बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की रणनीति रखी। बी.एम. संदीप ने महानगर, जिला, ब्लॉक, मंडल और वार्ड स्तर पर संवाद और समीक्षा की बात कही। अगस्त में तय कार्यक्रम के अनुसार जिम्मेदारियां बांटने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, जिसका लक्ष्य सक्रिय और जवाबदेह संगठन तैयार करना है।
वाराणसी | 11 अगस्त 2026 | Mohd Naved
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद तेज होती दिख रही है। वाराणसी पहुंचे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय सचिव और संगठन सृजन अभियान के प्रभारी समन्वयक बी.एम. संदीप ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य ऐसा संगठन तैयार करना है जो जमीनी स्तर पर सक्रिय, जवाबदेह और चुनावी गतिविधियों में प्रभावी भूमिका निभा सके।
संदीप ने मंगलवार को मैदागिन स्थित पराड़कर भवन में संगठन सृजन अभियान की रूपरेखा रखी। उनके मुताबिक अभियान को केवल पदों के गठन की कवायद के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि वरिष्ठ नेताओं, जमीनी कार्यकर्ताओं और चुनावी अनुभव रखने वाले नेताओं के सुझावों के आधार पर संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जाएगा।
कांग्रेस की योजना महानगर, जिला, ब्लॉक, मंडल और वार्ड स्तर तक व्यापक संवाद के जरिए संगठन को मजबूत करने की है। इसके साथ ही बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की पहचान और उन्हें जिम्मेदारी देने पर जोर दिया जा रहा है।
स्रोत सामग्री के अनुसार, वाराणसी महानगर कांग्रेस के संगठन सृजन का काम 11 से 14 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। 15 अगस्त तक रिपोर्ट तैयार करने के बाद 16 से 20 अगस्त के बीच जिला स्तर पर संगठन की समीक्षा और जिम्मेदारियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया प्रस्तावित है।
यह समयबद्ध कार्यक्रम इस बात का संकेत देता है कि पार्टी संगठनात्मक पुनर्गठन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, इन प्रक्रियाओं के वास्तविक असर का आकलन तभी होगा जब नई समितियां नियमित रूप से सक्रिय रहें और बूथ स्तर पर उनकी जवाबदेही तय हो।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पहले भी संगठन सृजन अभियान के जरिए जमीनी ढांचे को पुनर्गठित करने की कोशिश करती रही है। मई 2025 में पार्टी ने प्रदेश स्तर पर संगठन सृजन कार्यशाला आयोजित करने की योजना रखी थी, जिसमें जिला और शहर कांग्रेस इकाइयों के साथ फ्रंटल संगठनों और विभागों को शामिल किया गया था।
2025 में पार्टी की बैठकों और कार्यशालाओं में बूथ, ब्लॉक, मंडल और जिला स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की जरूरत पर लगातार जोर दिया गया। लखनऊ में हुई एक समीक्षा बैठक में भी मंडल और वार्ड समितियों के गठन के बाद बूथ स्तर पर संगठन निर्माण को आगे बढ़ाने की बात सामने आई थी।
इससे साफ है कि वाराणसी की मौजूदा कवायद किसी अलग-थलग कार्यक्रम के बजाय कांग्रेस के व्यापक संगठनात्मक पुनर्गठन का हिस्सा है। पार्टी का फोकस नेतृत्व के साथ-साथ नीचे के स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ाने पर है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक तैयारी चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। जून 2026 की एक रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश की प्रमुख पार्टियों के संगठनात्मक पुनर्गठन को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी से जोड़कर देखा गया था।
कांग्रेस के लिए यह कवायद इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी को चुनावी रणनीति के साथ संगठनात्मक मौजूदगी मजबूत करने की चुनौती का सामना करना है। जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने भी संगठन को मजबूत करना अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया था।
इस राजनीतिक संदर्भ में बूथ स्तर पर सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपलब्धता पार्टी के लिए अहम हो जाती है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दों, मतदाताओं से संपर्क, मतदान केंद्रों की निगरानी और संगठनात्मक समन्वय जैसी गतिविधियों में बूथ नेटवर्क की भूमिका रहती है।
बी.एम. संदीप ने संगठन सृजन को केवल पद बांटने की प्रक्रिया मानने से इनकार किया है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं के सुझाव लेकर संगठन तैयार किया जाएगा और समर्पित तथा सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाएगी।
यह मॉडल पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसकी सफलता कई स्तरों पर निर्भर करेगी। केवल नई समितियां गठित करने से संगठन मजबूत नहीं होता। समितियों की नियमित बैठक, कार्यकर्ताओं की सक्रियता, स्थानीय मुद्दों पर मौजूदगी और वरिष्ठ नेतृत्व के साथ संवाद भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
कांग्रेस के सामने एक और चुनौती संगठन और चुनावी रणनीति के बीच बेहतर तालमेल की है। यदि बूथ और वार्ड स्तर की इकाइयां स्थानीय समस्याओं को पार्टी के बड़े राजनीतिक एजेंडे से जोड़ पाती हैं, तो संगठनात्मक ढांचे का असर ज्यादा व्यापक हो सकता है।
यह मान लेना सही नहीं होगा कि संगठनात्मक पुनर्गठन अपने आप चुनावी सफलता सुनिश्चित कर देता है। चुनाव में उम्मीदवार चयन, गठबंधन, स्थानीय समीकरण, मतदाता व्यवहार, संसाधन, प्रचार रणनीति और राजनीतिक माहौल जैसे कई कारक असर डालते हैं।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच 2027 के चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा है। जुलाई 2026 में कांग्रेस नेतृत्व की ओर से गठबंधन में बराबरी और सम्मान की अपेक्षा जताई गई थी, जबकि दोनों दलों के बीच राजनीतिक समन्वय को लेकर चर्चा जारी रही।
ऐसे माहौल में कांग्रेस का संगठन सृजन अभियान दो स्तरों पर देखा जाएगा। पहला, क्या पार्टी अपनी स्वतंत्र संगठनात्मक क्षमता बढ़ा पाती है। दूसरा, क्या मजबूत संगठन भविष्य की गठबंधन राजनीति में पार्टी की बातचीत की स्थिति को बेहतर बनाता है।
वाराणसी उत्तर प्रदेश की सियासत में राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहां संगठन निर्माण को लेकर तय समयसीमा पार्टी के लिए एक परीक्षण भी है।
11 से 14 अगस्त के बीच महानगर स्तर पर प्रक्रिया पूरी करने और 15 अगस्त तक रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 16 से 20 अगस्त तक जिला स्तर की समीक्षा प्रस्तावित है। इस प्रक्रिया में सामने आने वाले सुझाव और जिम्मेदारियां आगे की संगठनात्मक संरचना का आधार बनेंगी।
स्रोत सामग्री में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को जनहित के मुद्दों पर संघर्ष के लिए तैयार करना चाहती है। इसका मतलब है कि संगठन को केवल चुनावी मशीनरी के तौर पर नहीं, बल्कि स्थानीय सार्वजनिक मुद्दों पर राजनीतिक सक्रियता के माध्यम के रूप में भी विकसित करने की कोशिश हो रही है।
किसी भी राजनीतिक संगठन के लिए सबसे बड़ी चुनौती पदों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन पदों को सक्रिय बनाना होती है। बूथ स्तर पर कार्यकर्ता तभी प्रभावी भूमिका निभा पाएंगे जब उन्हें स्पष्ट जिम्मेदारी, नियमित संवाद और निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त भागीदारी मिले।
संगठन सृजन अभियान की एक अहम कसौटी यह भी होगी कि चयन प्रक्रिया कितनी पारदर्शी और स्वीकार्य रहती है। कांग्रेस ने पहले भी जमीनी कार्यकर्ताओं से सुझाव लेने और संगठनात्मक ढांचे को नीचे तक ले जाने की बात कही है। 2025 में पार्टी की गतिविधियों में भी जिला, ब्लॉक और स्थानीय स्तर पर व्यापक परामर्श की प्रक्रिया सामने आई थी।
इसलिए वाराणसी की मौजूदा प्रक्रिया को केवल एक संगठनात्मक बैठक के रूप में देखना अधूरा होगा। असली परीक्षा नई जिम्मेदारियों के बाद शुरू होगी।
तत्काल तौर पर कांग्रेस का फोकस महानगर और जिला स्तर की प्रक्रिया पूरी करने पर है। 15 अगस्त तक महानगर की रिपोर्ट और 20 अगस्त तक जिला स्तर की समीक्षा के बाद संगठनात्मक जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाया जाना है।
इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि गठित इकाइयां कितनी जल्दी सक्रिय होती हैं। पार्टी के लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की उपलब्धता, स्थानीय जनसंपर्क, संगठनात्मक अनुशासन और चुनावी तैयारी के बीच तालमेल बनाना प्रमुख चुनौती रहेगा।
2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी जैसे-जैसे तेज होगी, संगठनात्मक ढांचे के साथ उम्मीदवार चयन और संभावित गठबंधन की रणनीति भी महत्व हासिल करेगी। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की मौजूदा संगठनात्मक पहल इसी व्यापक चुनावी परिदृश्य का हिस्सा है।
कांग्रेस महानगर स्तर पर संगठन सृजन अभियान के तहत संगठनात्मक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन कर रही है। इसके बाद जिला स्तर की समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
पार्टी के मुताबिक मुख्य लक्ष्य बूथ और वार्ड स्तर तक सक्रिय तथा जवाबदेह संगठन तैयार करना है, जिसमें समर्पित और सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाए।
स्रोत सामग्री के अनुसार महानगर स्तर का काम 11 से 14 अगस्त तक पूरा करने और 15 अगस्त तक रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य है। जिला स्तर की समीक्षा 16 से 20 अगस्त तक प्रस्तावित है।
राजनीतिक संदर्भ में संगठनात्मक पुनर्गठन आगामी 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी से जुड़ा है। हालांकि, संगठन मजबूत होना अपने आप चुनावी परिणाम की गारंटी नहीं देता।
नई समितियों और पदाधिकारियों को सक्रिय रखना, स्थानीय मुद्दों पर जनसंपर्क बढ़ाना और बूथ स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय करना कांग्रेस के सामने प्रमुख चुनौती होगी।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन को बूथ स्तर तक ले जाने की मौजूदा कवायद पार्टी की जमीनी राजनीति को पुनर्गठित करने की कोशिश है। बी.एम. संदीप की वाराणसी बैठक में रखी गई समयसीमा बताती है कि पार्टी संगठन निर्माण को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना चाहती है।
फिलहाल स्थापित तथ्य इतना है कि महानगर और जिला स्तर पर समीक्षा तथा जिम्मेदारियां तय करने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। इसका वास्तविक सियासी असर इस बात से तय होगा कि नई संरचना कितनी सक्रिय, जवाबदेह और जनता से जुड़ी रहती है। 2027 के चुनावी माहौल में कांग्रेस संगठन की यह परीक्षा केवल पदों के गठन की नहीं, बल्कि जमीनी राजनीतिक क्षमता की होगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।