अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर में राम मंदिर आंदोलन से जुड़े एक महत्वपूर्ण दौर की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए स्मारक मंदिर तैयार हो गया है। यह वही स्थान है, जहां मुख्य राम मंदिर के निर्माण से पहले रामलला की मूर्ति अस्थायी व्यवस्था में विराजमान थी।
स्मारक का मकसद उस दौर को संरक्षित करना है, जब रामलला अस्थायी तंबू से जुड़े परिसर में रहे और बाद में भव्य राम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान हुए। स्मारक मंदिर के साथ एक अलग स्मारक स्तंभ भी बनाया गया है।
25 मार्च 2020 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला की मूर्ति को अस्थायी मंदिर में स्थापित किया था। इसके बाद मुख्य मंदिर के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब उसी दौर से जुड़े स्थान को स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र के मुताबिक, अस्थायी मंदिर और उसके पास बनाया गया स्मारक दोनों तैयार हो चुके हैं। उन्होंने इसे इतिहास और स्मृति से जोड़कर देखा है।
इस स्मारक की खास बात पुराना अस्थायी तंबू है। रिपोर्टों के मुताबिक, जिस तंबू में रामलला की मूर्ति रखी गई थी, उसे संरक्षित करके स्मारक मंदिर के भीतर प्रदर्शित किया जाएगा।
तंबू को मोड़कर रखे जा सकने वाले स्वरूप में प्रदर्शित करने की व्यवस्था की गई है। इससे उस दौर की भौतिक स्मृति को भी संरक्षित रखा जाएगा।
स्मारक मंदिर का निर्माण सागौन की लकड़ी से किया गया है। इसमें बारीक नक्काशी की गई है। इसके बाहरी स्वरूप को मुख्य राम मंदिर के लाल बलुआ पत्थर वाले स्थापत्य से सामंजस्य देने की कोशिश की गई है।
मंदिर के भीतर अखंड ज्योति का प्रतीक भी रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, लकड़ी की संरचना को देखते हुए इलेक्ट्रिक ज्योति का इस्तेमाल किया गया है, ताकि खुली लौ से गर्मी या आग का जोखिम न रहे।
स्मारक मंदिर में भगवान हनुमान की एक पुरानी मूर्ति भी रखे जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह मूर्ति पहले रामलला की मूर्ति के साथ उसी अस्थायी व्यवस्था में रखी गई थी।
मुख्य राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति स्थापित होने के बाद हनुमान जी की यह मूर्ति स्मारक मंदिर में रखे जाने की योजना है।
स्मारक मंदिर के साथ राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवकों की स्मृति में एक अलग स्तंभ भी तैयार किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, यह स्तंभ लगभग 11 मीटर ऊंचा है और इसका निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका था।
स्तंभ के शीर्ष पर सूर्याकार आकृति बनाई गई है। इसमें भगवान राम से संबंधित चित्रात्मक प्रस्तुति और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का ध्येय वाक्य अंकित किया गया है।
यह स्मारक स्तंभ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वाले कारसेवकों की स्मृति को समर्पित बताया गया है। इस हिस्से को आंदोलन के लंबे इतिहास से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्मारक मंदिर को राम मंदिर आंदोलन के करीब 27 साल के सफर और रामलला की अस्थायी व्यवस्था से भव्य मंदिर तक की यात्रा की स्मृति से जोड़ा गया है। इस परिसर में आने वाले लोगों के सामने आंदोलन से जुड़े उस दौर की भौतिक और स्थापत्य स्मृतियां रखने की योजना है।
यहां इतिहास को केवल लिखित सामग्री के जरिए नहीं, बल्कि पुराने तंबू, स्मारक संरचना और अन्य संरक्षित वस्तुओं के माध्यम से प्रस्तुत करने की तैयारी है।
स्मारक मंदिर का निर्माण पूरा हो चुका है, लेकिन इसे आम श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खोलने की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
नृपेंद्र मिश्र ने कहा है कि दोनों संरचनाएं तैयार हैं और इन्हें जनता के लिए कब खोला जाए, इसका फैसला ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के स्तर पर होगा।
रिपोर्टों के मुताबिक, स्मारक को खोलने से पहले मुख्य मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखा जा रहा है। अयोध्या में पहले से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही होती है, इसलिए नए स्थल पर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
राम मंदिर परिसर में पुराने अस्थायी मंदिर और आंदोलन से जुड़ी स्मृतियों का संरक्षण अयोध्या में चल रहे व्यापक विरासत संरक्षण प्रयासों का हिस्सा है। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट भी राम जन्मभूमि मंदिर को अयोध्या की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के रूप में दर्ज करती है।
इसी क्रम में रामकथा म्यूजियम की योजना पर भी काम आगे बढ़ रहा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित म्यूजियम की 20 गैलरियों की स्क्रिप्ट तैयार की जा चुकी है और अक्टूबर 2026 में टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की योजना है।
अब सबसे अहम कदम स्मारक मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोलने की तारीख और वहां की आवाजाही की व्यवस्था तय करना है। ट्रस्ट को सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और मुख्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के मौजूदा फुटफॉल के साथ नए स्थल का संचालन संतुलित करना होगा।
स्मारक के सार्वजनिक उद्घाटन के बाद अयोध्या आने वाले लोगों को रामलला की उस यात्रा से जुड़े स्थान और वस्तुएं देखने का अवसर मिलेगा, जो अस्थायी व्यवस्था से शुरू होकर वर्तमान राम मंदिर तक पहुंची। इसके साथ स्मारक स्तंभ आंदोलन के दौरान जान गंवाने वालों की स्मृति को भी दर्ज करेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।