वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीयों की मेहनत और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों की मजबूती अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रही है। पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.8% रही।
एशविल | 1 सितंबर 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारतीयों की मेहनत देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में दर्ज 7.8 प्रतिशत वास्तविक जीडीपी वृद्धि को व्यापक आर्थिक मजबूती का संकेत बताया।
सीतारमण ने 1 सितंबर को एशविल में जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान आईएएनएस को दिए विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में वृद्धि दिखाई दे रही है और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र इसकी रफ्तार में अहम योगदान दे रहे हैं।
सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से जून 2026 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी। इसी अवधि में नाममात्र जीडीपी वृद्धि
10.3 प्रतिशत दर्ज की गई। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने 31 अगस्त को ये आंकड़े जारी किए।
यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था की मौजूदा विकास गति का महत्वपूर्ण संकेतक है। वैश्विक स्तर पर व्यापार, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है।
सीतारमण ने बताया कि पहली तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा। वित्त मंत्री ने इसे अर्थव्यवस्था में व्यापक विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती का असर औद्योगिक गतिविधियों, निवेश और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ता है। हालांकि किसी एक तिमाही के आंकड़े से पूरे साल की आर्थिक दिशा तय करना उचित नहीं होगा।
वित्त मंत्री के अनुसार, वित्तीय और पेशेवर सेवाओं में पहली तिमाही के दौरान 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह सेवा क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों की ओर संकेत करता है।
भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी पहले से महत्वपूर्ण रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, कुल सकल मूल्य वर्धन में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2013-14 के 50.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 55.3 प्रतिशत हो गई थी।
सीतारमण ने साक्षात्कार में बताया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक है। यह बाहरी आर्थिक दबावों से निपटने के लिए देश की वित्तीय स्थिति का एक अहम संकेतक है।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति को वैश्विक झटकों के मुकाबले लचीला बताया गया था। सरकार के मुताबिक, जनवरी 2026 में विदेशी मुद्रा भंडार 701.4 अरब डॉलर तक पहुंच गया था।
सीतारमण ने आर्थिक वृद्धि का श्रेय केवल सरकारी नीतियों को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि देश के लोग मेहनत कर रहे हैं और यही प्रयास अर्थव्यवस्था को आगे ले जा रहा है।
उनके अनुसार, 7.8 प्रतिशत की वृद्धि पूरे आर्थिक ढांचे में गतिविधि का संकेत देती है। विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की वृद्धि के साथ घरेलू आर्थिक गतिविधियां भी विकास को सहारा दे रही हैं।
यह दृष्टिकोण ऐसे समय में सामने आया है जब भारत वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच अपनी विकास गति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत के आर्थिक विकास में घरेलू मांग की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में निजी अंतिम उपभोग व्यय की हिस्सेदारी जीडीपी के 61.5 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
सरकार के आर्थिक आकलन में कम मुद्रास्फीति, स्थिर रोजगार परिस्थितियों और वास्तविक क्रय शक्ति में सुधार को घरेलू मांग के लिए सहायक कारक बताया गया था।
इससे संकेत मिलता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि में घरेलू उपभोग और निवेश दोनों की भूमिका बनी हुई है।
मजबूत जीडीपी आंकड़ों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने बाहरी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं।
वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा आयात पर निर्भरता और निर्यात से जुड़े जोखिम आगे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। सीतारमण ने अलग बातचीत में स्वीकार किया है कि भारत को कच्चे तेल और उर्वरकों के आयात पर निर्भरता के कारण बाहरी आर्थिक बदलावों का सामना करना पड़ता है।
इसलिए 7.8 प्रतिशत की एक तिमाही वृद्धि को सकारात्मक संकेत के तौर पर देखना उचित है, लेकिन इसे दीर्घकालिक विकास की अंतिम गारंटी मानना जल्दबाजी होगी।
भारत के सामने अब विकास की इस रफ्तार को टिकाऊ बनाए रखने की चुनौती है। इसके लिए विनिर्माण, सेवा, निवेश, घरेलू मांग और निर्यात में संतुलित वृद्धि जरूरी होगी।
आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रखा गया था। पहली तिमाही का 7.8 प्रतिशत आंकड़ा इस दायरे से ऊपर है, लेकिन पूरे वित्त वर्ष का परिणाम आगे आने वाली तिमाहियों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।