ग्लासगो में भारत की रिकॉर्डतोड़ बॉक्सिंग टीम के सम्मान में आयोजित डिनर के दौरान बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन ने रेस्टोरेंट में प्रदर्शित भारत के नक्शे में नॉर्थ-ईस्ट के गायब होने पर आपत्ति दर्ज कराई। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी जम्मू-कश्मीर के गलत चित्रण पर चिंता जताते हुए आयोजकों से नक्शा सुधारने की अपील की। यह घटना खेलों के बीच सांस्कृतिक संवेदनशीलता और सही भौगोलिक प्रस्तुति के महत्व को रेखांकित करती है।
📍 Location: ग्लासगो, स्कॉटलैंड
📰 Date: 2 अगस्त 2026
✍️ Byline: Apurva Choudhary
ग्लासगो में सम्मान समारोह के दौरान सामने आया मामला
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की ऐतिहासिक बॉक्सिंग सफलता के बाद ग्लासगो में भारतीय टीम के सम्मान में एक सेलिब्रेशन डिनर आयोजित किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान ओलंपिक पदक विजेता और राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन की नजर रेस्टोरेंट के नैपकिन और डिस्प्ले पर बने भारत के नक्शे पर पड़ी। उन्होंने देखा कि नक्शे में पूर्वोत्तर भारत (North-East) को प्रदर्शित नहीं किया गया था।
लवलीना ने बेहद शांत और सम्मानजनक तरीके से आयोजकों के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि नॉर्थ-ईस्ट से होने के कारण उन्हें यह देखकर दुख हुआ और भविष्य में भारत के नक्शे को सही रूप में प्रदर्शित करने का अनुरोध किया।
बॉक्सिंग फेडरेशन ने भी उठाया मुद्दा
लवलीना की बात का समर्थन बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अजय सिंह ने भी किया। उन्होंने कहा कि केवल नॉर्थ-ईस्ट ही नहीं, बल्कि नक्शे में जम्मू-कश्मीर का चित्रण भी सही नहीं था। उन्होंने रेस्टोरेंट प्रबंधन से अनुरोध किया कि गलत आर्टवर्क हटाकर भारत की आधिकारिक भौगोलिक सीमाओं वाला सही नक्शा लगाया जाए।
हालांकि समाचार लिखे जाने तक रेस्टोरेंट की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई थी।
खेल से आगे बढ़कर संवेदनशीलता का संदेश
यह घटना केवल एक खेल आयोजन तक सीमित नहीं रही। अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी देश के नक्शे का सही और आधिकारिक स्वरूप दिखाना कूटनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। खिलाड़ियों ने भी इसी संवेदनशीलता की ओर ध्यान आकर्षित किया।
भारत की रिकॉर्डतोड़ बॉक्सिंग उपलब्धि के बीच उठा यह मुद्दा इस बात की याद दिलाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किसी भी देश की भौगोलिक पहचान और संप्रभुता का सम्मान बनाए रखना उतना ही आवश्यक है जितना खेल भावना का सम्मान।