बीएसएनएल और वीआई के बीच नेटवर्क शेयरिंग का दायरा देशभर के टेलीकॉम सर्किलों तक बढ़ाने की तैयारी है। रोमिंग, टावर और ऑप्टिकल फाइबर साझेदारी से कवरेज बेहतर हो सकती है।
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नई दिल्ली
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27अगस्त 2026
बायलाइन
Mohd Naved
बीएसएनएल और वीआई के ग्राहकों के लिए टेलीकॉम सेक्टर से अहम खबर सामने आई है। दोनों कंपनियां अपने नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर की साझेदारी का दायरा बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था को देश के सभी टेलीकॉम सर्किलों तक विस्तारित करने पर सहमति बनी है। इसका सीधा असर नेटवर्क कवरेज, रोमिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल पर पड़ सकता है।
क्या है बीएसएनएल और वीआई की नई साझेदारी
बीएसएनएल यानी भारत संचार निगम लिमिटेड और वीआई यानी वोडाफोन आइडिया के बीच नेटवर्क साझेदारी का विचार नया नहीं है। दोनों कंपनियां पहले से दिल्ली और मुंबई में सीमित स्तर पर इंट्रा-सर्किल रोमिंग व्यवस्था के तहत काम कर रही हैं। इस व्यवस्था में बीएसएनएल के ग्राहक कुछ इलाकों में वीआई के नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए दोनों कंपनियों के बीच राजस्व साझेदारी की व्यवस्था है।
अब इस व्यवस्था को ज्यादा व्यापक बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों कंपनियां इंट्रा-सर्किल और इंटर-सर्किल रोमिंग के साथ टेलीकॉम टावर और ऑप्टिकल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने की दिशा में आगे बढ़ेंगी। हालांकि, अंतिम तकनीकी और कारोबारी शर्तों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए ग्राहकों के लिए इसे तत्काल पूरे देश में लागू हो चुकी सेवा मानना सही नहीं होगा।
ग्राहकों को सबसे बड़ा फायदा क्या मिलेगा
इस समझौते का सबसे अहम पहलू नेटवर्क कवरेज है। बीएसएनएल का नेटवर्क कई ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जाना जाता है, जबकि वीआई के पास कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में नेटवर्क संसाधन मौजूद हैं।
अगर दोनों नेटवर्क का इस्तेमाल ज्यादा व्यापक स्तर पर शुरू होता है, तो ऐसे इलाकों में कनेक्टिविटी सुधारने की गुंजाइश बनेगी जहां किसी एक ऑपरेटर का नेटवर्क कमजोर है। इससे ग्राहकों को यात्रा के दौरान नेटवर्क उपलब्धता में सुधार मिल सकता है।
मसलन, किसी इलाके में बीएसएनएल का अपना रेडियो नेटवर्क सीमित है लेकिन वहां वीआई का नेटवर्क उपलब्ध है, तो तय तकनीकी और कारोबारी व्यवस्था लागू होने के बाद बीएसएनएल ग्राहक को अतिरिक्त नेटवर्क कवरेज मिल सकता है। इसी तरह वीआई को भी बीएसएनएल के मौजूदा टावर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर से फायदा मिल सकता है।
फिर भी एक अहम बात समझना जरूरी है। नेटवर्क शेयरिंग का अर्थ यह नहीं है कि हर बीएसएनएल ग्राहक को हर जगह अपने फोन में वीआई का नेटवर्क तुरंत दिखने लगेगा। इसके लिए तकनीकी एकीकरण, सर्किल, रोमिंग व्यवस्था, नेटवर्क तकनीक और ग्राहक प्रोफाइल से जुड़े नियम लागू होंगे।
टावर और ऑप्टिकल फाइबर साझा होंगे
साझेदारी का दायरा केवल मोबाइल रोमिंग तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। टेलीकॉम टावर और ऑप्टिकल फाइबर इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने की योजना भी इसका हिस्सा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करने से दोनों कंपनियों को हर स्थान पर अलग-अलग नेटवर्क संसाधन तैयार करने की जरूरत कम हो सकती है। इससे पूंजीगत खर्च और संचालन लागत को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
दूरसंचार विभाग ने पहले भी बीएसएनएल और वीआई के बीच ज्यादा गहरी इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी पर बातचीत की जानकारी दी थी। इसमें चार-जी और पांच-जी सेवाओं के लिए टावर उपयोग बढ़ाने की चर्चा शामिल थी। अप्रैल २०२६ तक बीएसएनएल ने वीआई को करीब १,४४१ टावर लीज पर दिए थे।
वीआई को क्या फायदा होगा
वीआई के लिए यह साझेदारी नेटवर्क विस्तार की रणनीति में अहम हो सकती है। कंपनी को अपने नेटवर्क विस्तार के लिए बड़ी पूंजी की जरूरत है। ऐसे में मौजूदा सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर का साझा इस्तेमाल कुछ क्षेत्रों में नई साइट तैयार करने की जरूरत कम कर सकता है।
रिपोर्टों के मुताबिक, बीएसएनएल के ग्राहक ऐसे क्षेत्रों में वीआई के नेटवर्क का इस्तेमाल कर सकते हैं जहां बीएसएनएल की कवरेज सीमित है। इससे वीआई को अतिरिक्त राजस्व हासिल करने का अवसर मिल सकता है।
वीआई पहले से नेटवर्क विस्तार पर निवेश बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिजीत किशोर ने अगस्त २०२६ में कंपनी की नेटवर्क और पूंजीगत निवेश योजनाओं पर जानकारी दी थी। कंपनी ने वित्तीय वर्ष २०२७ के दौरान नेटवर्क विस्तार की गति बढ़ाने की बात कही है।
बीएसएनएल को क्या मिलेगा
बीएसएनएल के लिए इस साझेदारी का महत्व अलग तरह का है। सरकारी टेलीकॉम कंपनी देशभर में चार-जी नेटवर्क विस्तार कर रही है और पांच-जी सेवाओं की दिशा में भी तैयारी चल रही है।
वीआई के नेटवर्क तक अतिरिक्त पहुंच मिलने से बीएसएनएल को उन क्षेत्रों में कवरेज सुधारने का विकल्प मिल सकता है जहां अपना नेटवर्क विस्तार करने में समय और ज्यादा पूंजी लगती।
इसके अलावा, बीएसएनएल अपने टावर और फाइबर जैसे मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर से अतिरिक्त राजस्व हासिल कर सकता है। दूरसंचार विभाग के मुताबिक, अप्रैल २०२६ तक बीएसएनएल ने वीआई को करीब १,४४१ टावर लीज पर दिए थे।
क्या इससे बीएसएनएल का पांच-जी शुरू हो जाएगा
नेटवर्क शेयरिंग को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बीएसएनएल की पांच-जी सेवा को लेकर हो रही है। लेकिन अभी इस समझौते को बीएसएनएल की पांच-जी सेवा के तत्काल राष्ट्रव्यापी लॉन्च के तौर पर देखना सही नहीं होगा।
दूरसंचार विभाग ने अगस्त में बताया था कि बीएसएनएल और वीआई चार-जी तथा पांच-जी सेवाओं के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी पर चर्चा कर रहे हैं। साथ ही डेटा सेंटर, एज इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इंटरनेट ऑफ थिंग्स जैसे क्षेत्रों में संभावित सहयोग की पहचान भी की गई है। इन सभी क्षेत्रों में अंतिम समझौते हो चुके हैं, ऐसा विभाग ने नहीं कहा था।
इसलिए पांच-जी को लेकर फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि नेटवर्क और इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी भविष्य की पांच-जी रणनीति को समर्थन दे सकती है। सेवा कब और किस सर्किल में उपलब्ध होगी, यह अलग तकनीकी और नियामकीय फैसलों पर निर्भर करेगा।
सरकार की हिस्सेदारी भी अहम
इस साझेदारी का एक अहम पहलू सरकार की भूमिका है। भारत सरकार बीएसएनएल की मालिक है और वीआई में भी उसकी करीब ४९ प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए दोनों कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर का बेहतर इस्तेमाल सरकार के लिए भी रणनीतिक महत्व रखता है।
दूरसंचार क्षेत्र में टावर, फाइबर और नेटवर्क साइट तैयार करने की लागत काफी महत्वपूर्ण होती है। यदि दो ऑपरेटर मौजूदा संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हैं, तो पूंजी का दोहराव कम किया जा सकता है।
संसदीय समिति के समक्ष भी नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी को लेकर चर्चा हुई है। समिति ने टावर, फाइबर, स्पेक्ट्रम और अन्य नेटवर्क परिसंपत्तियों के साझा इस्तेमाल के लिए व्यवस्थित ढांचा तैयार करने की जरूरत बताई थी।
क्या ग्राहकों को तुरंत सस्ता रिचार्ज मिलेगा
इस समझौते से तत्काल रिचार्ज प्लान सस्ते होने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। नेटवर्क साझेदारी का प्राथमिक असर कवरेज, इंफ्रास्ट्रक्चर के इस्तेमाल और संचालन लागत पर पड़ने की उम्मीद है।
भविष्य में यदि लागत बचत और अतिरिक्त राजस्व का फायदा ग्राहकों तक पहुंचता है, तो इसका असर सेवाओं और प्लान्स पर पड़ सकता है। लेकिन अभी किसी नई कीमत या विशेष ग्राहक योजना की घोषणा सामने नहीं आई है।
जियो और एयरटेल के मुकाबले क्या बदलेगा
भारतीय टेलीकॉम बाजार में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल का नेटवर्क विस्तार काफी बड़ा है। ऐसे माहौल में बीएसएनएल और वीआई के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर साझा करना प्रतिस्पर्धी दबाव से निपटने का एक तरीका बन सकता है।
उद्योग विश्लेषण के मुताबिक, दोनों कंपनियों की ताकत अलग-अलग क्षेत्रों में है। बीएसएनएल के पास लंबे समय से बना हुआ टावर, फाइबर, राइट ऑफ वे और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर है। वीआई के पास निजी टेलीकॉम नेटवर्क और ग्राहक आधार है। दोनों की क्षमताओं को जोड़ने से संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकता है।
आगे क्या होगा
अब सबसे महत्वपूर्ण चरण इस समझौते की तकनीकी और कारोबारी शर्तों को लागू करना होगा। इसमें यह तय होना है कि कौन से टेलीकॉम सर्किल में किस तरह की रोमिंग उपलब्ध होगी, कौन से टावर और फाइबर साझा किए जाएंगे और नेटवर्क ट्रैफिक का हिसाब किस व्यवस्था के तहत होगा।
ग्राहकों के लिए असली फायदा तभी स्पष्ट होगा जब साझेदारी जमीन पर लागू होगी और नेटवर्क कवरेज में मापने योग्य सुधार दिखाई देगा।
फिलहाल इतना साफ है कि बीएसएनएल और वीआई के बीच नेटवर्क साझेदारी भारतीय टेलीकॉम बाजार में एक महत्वपूर्ण कदम है। अगर इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो कमजोर कवरेज वाले इलाकों में नेटवर्क उपलब्धता बेहतर हो सकती है, दोनों कंपनियों के इंफ्रास्ट्रक्चर का ज्यादा कुशल इस्तेमाल हो सकता है और भविष्य की चार-जी तथा पांच-जी विस्तार योजनाओं को समर्थन मिल सकता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।