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काले धान की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ब्लैक राइस की मांग ने बदली तस्वीर

Shahana • 2026-07-04 09:17:23
काले धान की खेती से किसानों की बढ़ी कमाई, ब्लैक राइस की मांग ने बदली तस्वीर

देश में ब्लैक राइस की बढ़ती मांग ने काले धान की खेती को नई पहचान दी है। इसकी ऊंची बाजार कीमत, पोषक गुण और निर्यात की संभावनाओं ने किसानों के लिए इसे लाभकारी विकल्प बना दिया है। वैज्ञानिक खेती और बेहतर विपणन से यह फसल ग्रामीण आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती
है।


Location:-  India

Date:- 04 July 2026

Byline:- Kp saini


काले धान की खेती से बदल रही किसानों की आय

भारत में खेती अब केवल पारंपरिक उत्पादन तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती उपभोक्ता पसंद, स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और वैल्यू एडेड कृषि उत्पादों की मांग ने कई नई फसलों को अवसर दिया है। इन्हीं में से एक है ब्लैक राइस, जिसे आम भाषा में काला धान कहा जाता है। यह फसल अपने गहरे बैंगनी या काले रंग, पोषण मूल्य और बेहतर बाजार कीमत के कारण किसानों का ध्यान आकर्षित कर रही है।

ब्लैक राइस क्यों बना चर्चा का विषय

ब्लैक राइस में एंथोसाइनिन नामक प्राकृतिक पिगमेंट पाया जाता है, जो इसे विशिष्ट रंग देता है। इसके अलावा इसमें आयरन, फाइबर, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में मौजूद रहते हैं। स्वास्थ्य के प्रति सजग उपभोक्ता इसे सामान्य सफेद चावल के विकल्प के रूप में देख रहे हैं। इसी वजह से घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी इसकी मांग बढ़ रही है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा उत्पादन

देश के कई राज्यों में अब किसान ब्लैक राइस की खेती अपना रहे हैं। असम, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु में इसकी खेती का दायरा लगातार बढ़ा है। स्थानीय जलवायु और उपयुक्त मिट्टी वाले क्षेत्रों में किसानों को अच्छी पैदावार मिलने लगी है। कृषि विशेषज्ञ भी किसानों को उन्नत बीज और वैज्ञानिक तकनीक अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

बेहतर दाम बना सबसे बड़ा आकर्षण

सामान्य धान की तुलना में ब्लैक राइस की बाजार कीमत कई गुना अधिक हो सकती है। गुणवत्ता, ब्रांड और पैकेजिंग के आधार पर इसकी खुदरा कीमत लगभग 220 से 350 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। हालांकि किसानों को मिलने वाला वास्तविक मूल्य बाजार, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन पर निर्भर करता है। यही कारण है कि कई किसान इसे आय बढ़ाने वाले विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

खेती के लिए कैसी जमीन और मौसम चाहिए

ब्लैक राइस की खेती गर्म और आर्द्र जलवायु में बेहतर मानी जाती है। उपजाऊ दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी, जिसमें पानी रोकने की क्षमता अच्छी हो, सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी का पीएच स्तर लगभग 5.5 से 7.0 के बीच रहने पर बेहतर परिणाम मिलते हैं। खेत की अच्छी तैयारी, जैविक खाद और संतुलित पोषक तत्व फसल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नर्सरी और रोपाई का महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार जून में तैयार की गई नर्सरी के 20 से 25 दिन पुराने पौधों की रोपाई उपयुक्त रहती है। पौधों और कतारों के बीच पर्याप्त दूरी रखने से फसल का विकास बेहतर होता है। समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और संतुलित उर्वरक प्रबंधन उत्पादन बढ़ाने में मदद करते हैं।

उत्पादन और संभावित कमाई

सामान्य परिस्थितियों में ब्लैक राइस की फसल 120 से 150 दिनों में तैयार हो जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर में लगभग 25 से 40 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। वास्तविक उत्पादन मौसम, किस्म, मिट्टी और प्रबंधन पर निर्भर करता है। यदि किसानों को बेहतर बाजार और प्रोसेसिंग सुविधा मिले तो उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।

क्या केवल ऊंची कीमत ही सफलता की गारंटी है

ब्लैक राइस की बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। गुणवत्तापूर्ण बीज की उपलब्धता, बाजार तक पहुंच, ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग और निर्यात मानकों को पूरा करना छोटे किसानों के लिए आसान नहीं है। यदि मांग के अनुमान से अधिक उत्पादन हो जाए तो कीमतों पर दबाव भी आ सकता है। इसलिए केवल ऊंची कीमत देखकर खेती शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा।

सरकार और संस्थानों की भूमिका

कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसानों को प्रशिक्षण, प्रमाणित बीज, प्रोसेसिंग यूनिट, एफपीओ नेटवर्क और निर्यात सहायता उपलब्ध कराई जाए तो ब्लैक राइस भारत के कृषि निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।

भविष्य की दिशा

स्वास्थ्य आधारित खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ब्लैक राइस भारत के किसानों के लिए दीर्घकालिक अवसर बन सकता है। हालांकि सफलता वैज्ञानिक खेती, बाजार की समझ और गुणवत्ता बनाए रखने पर निर्भर करेगी। यदि किसान आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ संगठित विपणन अपनाते हैं तो काले धान की खेती कम क्षेत्र में भी अधिक आय देने वाली फसल बन सकती है।

 

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Shahana

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Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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