सिंधु जल संधि: भारत की रणनीति से पाकिस्तान क्यों परेशान?
Asif Khan
•
2026-07-07 13:03:42
भारत का बड़ा जल दांव, सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
भारत ने दिखाई सख्ती, सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बढ़ी चिंता
भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। भारत अपनी जल परियोजनाओं और सुरक्षा हितों पर कायम है, जबकि पाकिस्तान ने जल हिस्सेदारी को लेकर चिंता जताई है। इस घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया की कूटनीति, क्षेत्रीय सुरक्षा और जल प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
📍 New Delhi / Islamabad
📰 July 7, 2026
✍️ Asif Khana
भारत का सख्त संदेश, सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी
नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच जल कूटनीति एक बार फिर केंद्र में है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने सिंधु जल संधि के तहत अपने देश के जल हिस्से की रक्षा के लिए "हर आवश्यक कदम" उठाने की बात कही है। यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि सीमा पार आतंकवाद पर विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय कार्रवाई होने तक सिंधु जल संधि को "स्थगित" रखने का उसका रुख कायम है।
भारत का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर सामान्य द्विपक्षीय व्यवस्था जारी नहीं रखी जा सकती। विदेश मंत्रालय ने हाल के दिनों में दोहराया कि पाकिस्तान जब तक आतंकवाद के समर्थन को विश्वसनीय रूप से समाप्त नहीं करता, तब तक संधि को पूर्ववत करने का प्रश्न नहीं उठता।
सिंधु जल संधि क्यों है अहम?
1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे लंबे समय तक लागू रहने वाले समझौतों में से एक रही है। इसके तहत पूर्वी नदियों का उपयोग मुख्य रूप से भारत और पश्चिमी नदियों का बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को मिला, जबकि भारत को पश्चिमी नदियों पर सीमित सिंचाई, जलविद्युत और अन्य गैर-उपभोग उपयोगों का अधिकार भी प्राप्त है।
दशकों तक युद्ध और राजनीतिक तनाव के बावजूद यह संधि लागू रही। लेकिन हाल के वर्षों में आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी घटनाओं के बाद इस पर नई बहस शुरू हुई।
भारत का रुख क्या है?
भारत का कहना है कि वह अपने वैध जल अधिकारों का पूरा उपयोग करेगा। केंद्र सरकार पहले भी संकेत दे चुकी है कि भारतीय हिस्से के पानी का अधिकतम उपयोग करने के लिए नहरों, जलाशयों और अन्य अवसंरचना परियोजनाओं को गति दी जाएगी। हाल के सरकारी बयानों में यह भी दोहराया गया कि भारत का निर्णय उसकी सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी जल अवसंरचना को तेज़ी से विकसित करता है तो इससे जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में सिंचाई और जल प्रबंधन को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। हालांकि किसी भी परियोजना का वास्तविक प्रभाव उसके तकनीकी स्वरूप और कानूनी दायरे पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान की चिंता क्या है?
पाकिस्तान का दावा है कि सिंधु जल संधि अब भी कानूनी रूप से प्रभावी है और भारत को जल प्रवाह बाधित नहीं करना चाहिए। सेना प्रमुख आसिम मुनीर और अन्य पाक नेताओं ने जल को राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बताया है। पाकिस्तान ने इसे अपनी कृषि, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया है।
हालांकि भारत इन दावों से सहमत नहीं है और अपनी सुरक्षा चिंताओं को प्राथमिकता देता है। दोनों देशों के बीच यही मतभेद मौजूदा विवाद का केंद्र बने हुए हैं।
रणनीतिक असर
जल अब केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। भारत के लिए यह राष्ट्रीय सुरक्षा, जल प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग का विषय है। वहीं पाकिस्तान इसे अपनी अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए जीवनरेखा मानता है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच संवाद नहीं बढ़ा तो यह मुद्दा भविष्य में कूटनीतिक तनाव का बड़ा कारण बना रह सकता है।
आगे की तस्वीर
फिलहाल भारत ने अपना रुख नहीं बदला है और पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिंता दर्ज करा रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के आधिकारिक फैसले, तकनीकी परियोजनाएं और कूटनीतिक बातचीत इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
सम्पादकीय दृष्टिकोण
सिंधु जल संधि पर मौजूदा विवाद केवल पानी का नहीं, बल्कि सुरक्षा, कूटनीति और क्षेत्रीय रणनीति का भी प्रश्न बन चुका है। भारत अपने सुरक्षा हितों और जल अधिकारों पर ज़ोर दे रहा है, जबकि पाकिस्तान इसे अपने जल हिस्से की रक्षा का मामला बता रहा है। इस विषय पर आगे होने वाले आधिकारिक निर्णय और संवाद ही तय करेंगे कि दक्षिण एशिया की जल कूटनीति किस दिशा में बढ़ती है।
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Asif Khan
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।