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बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को नसीहत, दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाना बताया परेशान करने वाला

Mohammad Naved • 2026-11-03 13:05:20
बॉम्बे हाईकोर्ट की BMC को नसीहत, दीया मिर्जा का दिवाली वीडियो हटाना बताया परेशान करने वाला

दीया मिर्जा का वीडियो बीएमसी के प्रदूषण-मुक्त दिवाली अभियान से हटाए जाने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चिंता जताई। अदालत ने वीडियो बहाल करने का सुझाव दिया।


📍 मुंबई, महाराष्ट्र

🗓️ 3 नवंबर 2026

✍️ Mohd Naved


क्या है पूरा मामला?

बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी ने मुंबई में प्रदूषण कम करने के मकसद से दिवाली अभियान शुरू किया था। इस मुहिम में फिल्म अभिनेत्री दीया मिर्जा समेत कई जानी-मानी हस्तियों को शामिल किया गया था।

अभियान के तहत नागरिकों से पटाखों के इस्तेमाल में संयम बरतने, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण को कम करने तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाने की अपील की गई थी।

दीया मिर्जा का वीडियो 1 नवंबर को बीएमसी के सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट किया गया था। लेकिन मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम की आपत्ति के बाद इसे हटा दिया गया। इस घटनाक्रम ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया।


अमित साटम की आपत्ति के बाद क्यों हटा वीडियो?

मुंबई बीजेपी अध्यक्ष अमित साटम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बीएमसी को टैग करते हुए दीया मिर्जा की भागीदारी पर सवाल उठाया था।

उन्होंने लिखा कि दिवाली कैसे मनाई जाए, इस बारे में दीया मिर्जा से सीख लेने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों का हवाला दिया।

इस पोस्ट के कुछ घंटों बाद बीएमसी ने दीया मिर्जा का वीडियो अपने सोशल मीडिया पेज से हटा दिया। हालांकि, अभियान में शामिल माधुरी दीक्षित, निशिगंधा वाड और क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे जैसे लोगों के वीडियो उपलब्ध रहे।


दीया मिर्जा ने क्या जवाब दिया?

वीडियो हटाए जाने पर दीया मिर्जा ने अपनी नाराजगी और पक्ष सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संदेश किसी धार्मिक परंपरा के खिलाफ नहीं था।

दीया के मुताबिक, दिवाली अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और निराशा पर उम्मीद की जीत का त्योहार है। उन्होंने कहा कि उनका वीडियो जनहित और सार्वजनिक जागरूकता के उद्देश्य से रिकॉर्ड किया गया था।

अभिनेत्री ने वायु प्रदूषण को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मसला बताया। उनके मुताबिक, प्रदूषण कम करने की दिशा में उठाया गया हर कदम बेहतर पर्यावरण के लिए अहम है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बॉम्बे हाईकोर्ट और बीएमसी के आग्रह पर जनहित में बनाए गए वीडियो की आलोचना क्यों हो रही है।


बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्या कहा?

3 नवंबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस विवाद पर चिंता जाहिर की। अदालत ने बीएमसी की कार्रवाई को परेशान करने वाला बताया और दिवाली के मौके पर दीया मिर्जा का वीडियो बहाल करने का सुझाव दिया।

अदालत की टिप्पणी ने इस बहस को नया कानूनी और प्रशासनिक आयाम दिया है। सवाल यह है कि जब किसी अभियान का मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण हो, तो उसमें शामिल किसी व्यक्ति के संदेश को राजनीतिक आपत्ति के बाद हटाने का आधार क्या होना चाहिए?

हालांकि, उपलब्ध शुरुआती रिपोर्ट में अदालत के विस्तृत आदेश, संबंधित पीठ और बीएमसी की आगे की कार्रवाई का पूरा विवरण सामने नहीं आया है। इसलिए वीडियो की बहाली को अदालत का सुझाव माना जाना चाहिए, न कि बिना पुष्टि के अंतिम आदेश।


विवाद के बीच पर्यावरण का सवाल

इस पूरे घटनाक्रम में एक अहम पहलू मुंबई का वायु प्रदूषण है। दिवाली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और ध्वनि प्रदूषण पहले से मौजूद पर्यावरणीय चुनौतियों को बढ़ा सकता है।

बीएमसी ने इसी चिंता के मद्देनजर जागरूकता अभियान चलाया था। अभियान में शामिल दूसरे कलाकारों और खिलाड़ियों के संदेश भी इसी दिशा में थे।

दीया मिर्जा का वीडियो हटने के बाद बहस अभियान के मूल उद्देश्य से हटकर राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान पर केंद्रित हो गई।


आगे क्या होगा?

अब निगाहें बीएमसी के अगले कदम पर हैं। हाईकोर्ट के सुझाव के बाद यह देखना अहम होगा कि नगर निकाय वीडियो को दोबारा अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करता है या नहीं।

इस विवाद ने सार्वजनिक अभियानों में प्रशासनिक निष्पक्षता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पर्यावरण जागरूकता के बीच संतुलन को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

शाह टाइम्स का मानना है कि प्रदूषण जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर बहस तथ्यों और नागरिक हितों के आधार पर होनी चाहिए। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाले किसी भी अभियान का मूल्यांकन उसके उद्देश्य और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।

वीडियो देखें

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Mohammad Naved

Mohammad Naved

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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