आईपीएल के इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर बीसीसीआई ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों से राय मांगी है। 31 अगस्त की समयसीमा के बाद नियम को बरकरार रखने, बदलने या खत्म करने पर समीक्षा होगी।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 31 अगस्त 2026
✍️ Mohd Naved
आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड ने इस व्यवस्था के भविष्य को लेकर सभी 10 फ्रेंचाइजी टीमों से आधिकारिक फीडबैक मांगा है। टीमों को 31 अगस्त तक अपनी राय भेजनी है। हालांकि, अभी बोर्ड ने नियम को खत्म करने या बदलने का कोई अंतिम फैसला नहीं किया है।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब इम्पैक्ट प्लेयर व्यवस्था को लेकर क्रिकेट जगत में लंबे समय से बहस जारी है। नियम के समर्थक इसे कप्तानों के लिए अतिरिक्त रणनीतिक विकल्प मानते हैं, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे बल्लेबाजी में गहराई बढ़ती है और गेंद तथा बल्ले के बीच संतुलन प्रभावित होता है।
बीसीसीआई ने क्यों मांगा फीडबैक
बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने मई 2026 में कहा था कि आईपीएल 2026 के बाद इम्पैक्ट प्लेयर नियम की समीक्षा की जाएगी। अब बोर्ड ने फ्रेंचाइजियों से लिखित राय मांगकर इस समीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है।
उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने केवल इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर ही सुझाव नहीं मांगे हैं। फ्रेंचाइजियों से खिलाड़ियों और मैच अधिकारियों के क्षेत्र, अंपायरिंग, अभ्यास सत्र और प्लेइंग कंडीशन्स जैसे क्रिकेट संचालन से जुड़े मुद्दों पर भी राय मांगी गई है। टीमों से अपनी क्रिकेट संचालन इकाइयों के साथ चर्चा करके संयुक्त प्रतिक्रिया देने को कहा गया है।
इम्पैक्ट प्लेयर नियम क्या है
इम्पैक्ट प्लेयर व्यवस्था आईपीएल में 2023 से लागू हुई। इसके तहत टीमों को मैच के दौरान एक अतिरिक्त खिलाड़ी को इस्तेमाल करने की अनुमति मिलती है। यह खिलाड़ी शुरुआती एकादश में शामिल खिलाड़ी की जगह लेता है।
इस व्यवस्था का मकसद टीमों को मैच की परिस्थितियों के हिसाब से ज्यादा रणनीतिक विकल्प देना था। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और मैच की स्थिति के अनुसार टीम अपने विकल्प का इस्तेमाल कर सकती है।
बीसीसीआई ने इससे पहले घरेलू टी20 प्रतियोगिता सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में इम्पैक्ट प्लेयर की अवधारणा लागू की थी। बोर्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, घरेलू प्रतियोगिता में इस अवधारणा के अनुभव के बाद इसे आईपीएल में भी लागू किया गया।
रोहित शर्मा ने उठाए थे ऑलराउंडरों को लेकर सवाल
इम्पैक्ट प्लेयर नियम के सबसे प्रमुख आलोचकों में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज रोहित शर्मा रहे हैं। 2024 में उन्होंने कहा था कि वह इस नियम के बड़े समर्थक नहीं हैं।
रोहित का तर्क था कि क्रिकेट मूल रूप से 11 खिलाड़ियों का खेल है और अतिरिक्त खिलाड़ी की व्यवस्था भारतीय क्रिकेट में ऑलराउंडरों के विकास को प्रभावित कर सकती है। उनके मुताबिक, ऐसे खिलाड़ी जो बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में योगदान दे सकते हैं, उन्हें गेंदबाजी का पर्याप्त मौका नहीं मिलने का जोखिम रहता है।
रोहित ने विशेष रूप से ऐसे भारतीय खिलाड़ियों का संदर्भ दिया था जो बल्लेबाजी के साथ गेंदबाजी भी करते हैं। उनके मुताबिक, अगर टीमों को अलग बल्लेबाज या गेंदबाज को बीच मैच में शामिल करने का विकल्प मिलता रहे, तो ऑलराउंडर की भूमिका सीमित हो सकती है।
विराट कोहली ने भी नियम पर जताई थी असहमति
विराट कोहली ने भी 2024 में इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर पुनर्विचार की जरूरत बताई थी। उन्होंने रोहित शर्मा के नजरिए से सहमति जताते हुए कहा था कि इस व्यवस्था से बल्ले और गेंद के बीच संतुलन प्रभावित हुआ है।
कोहली का तर्क था कि बल्लेबाजों को अतिरिक्त सुरक्षा मिलने से खेल की रणनीतिक प्रकृति बदलती है। उन्होंने गेंदबाजों के दबाव और बड़े स्कोर की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर भी चिंता जाहिर की थी।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि रोहित और कोहली की ये टिप्पणियां 2024 की हैं। मौजूदा फीडबैक प्रक्रिया को इन पुराने बयानों के आधार पर तय फैसला मानना सही नहीं होगा। अभी बीसीसीआई फ्रेंचाइजियों की मौजूदा राय जुटा रहा है।
आईपीएल में नियम को लेकर बहस क्यों बढ़ी
इम्पैक्ट प्लेयर ने कप्तानों को मैच के दौरान अतिरिक्त विकल्प दिया है। इससे टीम संयोजन तैयार करने का तरीका बदला है।
आलोचकों के मुताबिक, टीमों को एक अतिरिक्त विशेषज्ञ बल्लेबाज या गेंदबाज का इस्तेमाल करने का मौका मिलने से पारंपरिक टीम संतुलन बदलता है। इसका असर खास तौर पर ऑलराउंडरों की भूमिका पर पड़ सकता है।
दूसरी ओर, इस व्यवस्था के समर्थकों का तर्क है कि टी20 क्रिकेट में रणनीतिक विकल्प बढ़ने से मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी और अप्रत्याशित होते हैं। कप्तान परिस्थितियों के मुताबिक टीम में बदलाव कर सकते हैं।
इसलिए बहस केवल इस सवाल पर नहीं है कि नियम अच्छा है या खराब। असली सवाल यह है कि इससे आईपीएल की प्रतिस्पर्धात्मक संरचना, खिलाड़ी विकास और बल्ले तथा गेंद के बीच संतुलन पर कितना असर पड़ता है।
बीसीसीआई के सामने क्या विकल्प हैं
31 अगस्त तक फ्रेंचाइजियों से फीडबैक मिलने के बाद बीसीसीआई के सामने व्यापक तौर पर 3 रास्ते होंगे।
पहला विकल्प मौजूदा इम्पैक्ट प्लेयर व्यवस्था को जारी रखना है। दूसरा विकल्प नियम में बदलाव करना हो सकता है। तीसरा विकल्प इसे पूरी तरह समाप्त करने का है।
इनमें से किसी विकल्प को लेकर बीसीसीआई ने अभी अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है। इसलिए इसे आईपीएल से नियम हटने की पुष्टि के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
फ्रेंचाइजियों की राय क्यों अहम है
आईपीएल की सभी 10 फ्रेंचाइजियां इस नियम को मैदान पर सीधे इस्तेमाल करती हैं। इसलिए उनके क्रिकेट संचालन विभागों का अनुभव बीसीसीआई की समीक्षा में महत्वपूर्ण रहेगा।
फीडबैक से यह समझने में मदद मिलेगी कि टीमों ने रणनीतिक स्तर पर इस नियम का किस तरह इस्तेमाल किया, खिलाड़ियों की भूमिका में क्या बदलाव आया और क्या टीमों को मौजूदा व्यवस्था में कोई व्यावहारिक समस्या दिखाई देती है।
सिर्फ कप्तानों या खिलाड़ियों की राय के बजाय फ्रेंचाइजियों के क्रिकेट संचालन विभागों से समेकित प्रतिक्रिया मांगना समीक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में कदम है।
क्या आईपीएल 2027 में बदलेगा नियम
अभी इसका जवाब तय नहीं है।
बीसीसीआई की मौजूदा कार्रवाई से इतना स्पष्ट है कि इम्पैक्ट प्लेयर नियम की समीक्षा सक्रिय रूप से हो रही है। बोर्ड ने सभी 10 फ्रेंचाइजियों से राय मांगी है और उनकी प्रतिक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
अगर टीमों की राय में बड़े बदलाव की मांग सामने आती है, तो अगले सत्र से नियम में संशोधन की गुंजाइश बनेगी। अगर ज्यादातर फ्रेंचाइजियां मौजूदा व्यवस्था के पक्ष में रहती हैं, तो इसे जारी रखने का रास्ता भी खुला रहेगा।
अगला फैसला किस दिशा में जाएगा
इम्पैक्ट प्लेयर नियम पर मौजूदा बहस आईपीएल के भविष्य के लिए अहम है। एक तरफ टी20 क्रिकेट में रणनीतिक लचीलापन और मनोरंजन का पहलू है। दूसरी तरफ खिलाड़ी विकास, ऑलराउंडरों की भूमिका और बल्ले तथा गेंद के बीच संतुलन का सवाल है।
बीसीसीआई के लिए चुनौती ऐसी व्यवस्था तैयार करने की होगी जिसमें मैच का रणनीतिक रोमांच बना रहे और टीम संयोजन का पारंपरिक संतुलन भी कमजोर न हो।
फिलहाल 31 अगस्त की समयसीमा के बाद फ्रेंचाइजियों की राय सामने आना महत्वपूर्ण होगा। उसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आईपीएल में इम्पैक्ट प्लेयर नियम अपने मौजूदा रूप में जारी रहता है, उसमें बदलाव होता है या बोर्ड इसे समाप्त करने पर विचार करता है।
अभी सबसे अहम तथ्य यही है कि बीसीसीआई ने समीक्षा की प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन नियम हटाने का फैसला अभी नहीं हुआ है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।