वैभव सूर्यवंशी अंडर-19 टीम से बाहर हैं। वजह खराब फॉर्म नहीं, बल्कि बीसीसीआई की नीति है। वह 2026 अंडर-19 विश्व कप खेल चुके हैं, इसलिए अगले विश्व कप चक्र में उनका रास्ता अलग है।
📍 भारत
🗓️ 28 अगस्त 2026
✍️Mohd Naved
वैभव सूर्यवंशी को अंडर-19 टीम में जगह क्यों नहीं मिली?
भारतीय क्रिकेट में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी का नाम पिछले कुछ महीनों में तेजी से उभरा है। 2026 अंडर-19 विश्व कप में उनकी विस्फोटक बल्लेबाज़ी से लेकर सीनियर भारतीय क्रिकेट तक पहुंचने की उनकी रफ्तार ने उन्हें देश के सबसे चर्चित युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। इसके बावजूद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी अंडर-19 सीरीज़ के लिए घोषित भारतीय टीम में उनका नाम नहीं है।
पहली नज़र में यह फैसला चौंकाने वाला लगता है। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इसका सीधा संबंध वैभव की फॉर्म या प्रतिभा से नहीं है। इसके पीछे बीसीसीआई की वह नीति है जिसके तहत किसी खिलाड़ी को अंडर-19 विश्व कप में एक से अधिक बार खेलने की अनुमति नहीं दी जाती, भले ही वह उम्र के लिहाज़ से आगे भी पात्र क्यों न हो।
2026 विश्व कप में वैभव का शानदार प्रदर्शन
वैभव ने 2026 अंडर-19 विश्व कप में भारत की खिताबी मुहिम में अहम भूमिका निभाई। इंग्लैंड के खिलाफ फाइनल में उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रन की तेजतर्रार पारी खेली। इस पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे। उनकी इस पारी ने फाइनल के नतीजे पर बड़ा असर डाला और भारत ने खिताब अपने नाम किया।
इस प्रदर्शन के बाद वैभव की पहचान केवल एक होनहार जूनियर बल्लेबाज़ तक सीमित नहीं रही। उनका प्रदर्शन सीनियर स्तर पर भी चर्चा का विषय बना। इसी दौरान भारतीय क्रिकेट में उनके अगले करियर चरण को लेकर सवाल उठने लगे।
बीसीसीआई की 2016 वाली नीति क्या है?
वैभव के मौजूदा चयन को समझने के लिए बीसीसीआई की अंडर-19 नीति को समझना जरूरी है।
रिपोर्टों के मुताबिक, 2016 में बीसीसीआई ने ऐसी नीति अपनाई जिसके तहत कोई खिलाड़ी अपने करियर में एक से अधिक अंडर-19 विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सकता। इसका मतलब यह है कि केवल उम्र पात्रता ही निर्णायक नहीं रहती। अगर कोई खिलाड़ी एक अंडर-19 विश्व कप खेल चुका है, तो अगली प्रतियोगिता के लिए उसे दोबारा उसी रास्ते से आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिलता।
यही नियम वैभव के मौजूदा मामले में सबसे अहम माना जा रहा है। वह 2026 का अंडर-19 विश्व कप खेल चुके हैं। इसलिए अगले विश्व कप चक्र में उनकी अंडर-19 विश्व कप पात्रता समाप्त हो जाती है।
क्या इसका मतलब वैभव अंडर-19 क्रिकेट नहीं खेल सकते?
यहां एक अहम फर्क समझना जरूरी है।
एक विश्व कप दोबारा नहीं खेलने की नीति और हर अंडर-19 मैच से बाहर होना एक ही बात नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस बात पर जोर दिया गया है कि बीसीसीआई की नीति मुख्य रूप से अंडर-19 विश्व कप में दोबारा भाग लेने से संबंधित है। इसलिए इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि वैभव उम्र के लिहाज़ से हर अंडर-19 मैच के लिए स्वतः अयोग्य हो गए हैं।
मौजूदा ऑस्ट्रेलिया सीरीज़ को एक नए विश्व कप चक्र की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में चयनकर्ताओं के सामने उन खिलाड़ियों को तैयार करने की प्राथमिकता है जो आगामी अंडर-19 विश्व कप के लिए उपलब्ध रहेंगे।
नए चक्र में नए खिलाड़ियों पर फोकस
भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी अंडर-19 मुकाबलों के लिए अलग-अलग प्रारूपों की टीम घोषित की है। एकदिवसीय मुकाबलों के लिए घोषित टीम में आर्यवीर सहवाग और अन्वय द्रविड़ जैसे युवा खिलाड़ियों को भी जगह मिली है।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 एकदिवसीय मुकाबले 18, 21 और 23 सितंबर को राजकोट में खेले जाने हैं। इसके बाद 2 बहुदिवसीय मुकाबले प्रस्तावित हैं। पहला मुकाबला 27 से 30 सितंबर तक राजकोट में और दूसरा 5 से 8 अक्टूबर तक अहमदाबाद में खेला जाना है।
ऐसे में चयन नीति का फोकस केवल मौजूदा प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि अगले विश्व कप चक्र के लिए टीम निर्माण पर भी है।
वैभव के करियर पर इसका क्या असर पड़ेगा?
वैभव के मामले में मौजूदा घटनाक्रम को किसी चयनात्मक नाकामी के तौर पर देखना सही नहीं होगा। उनका क्रिकेट करियर पहले ही जूनियर स्तर से आगे बढ़ चुका है।
2026 में उन्हें भारतीय सीनियर टीम के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टी20 योजनाओं में भी शामिल किया गया था। इसके अलावा वह घरेलू प्रथम श्रेणी क्रिकेट में ईस्ट ज़ोन के लिए दलीप ट्रॉफी में भी नजर आए हैं।
इससे संकेत मिलता है कि वैभव के लिए आगे का रास्ता अब केवल अंडर-19 क्रिकेट तक सीमित नहीं है। उनकी चुनौती सीनियर क्रिकेट की मांगों के अनुरूप खुद को ढालने की है।
एक पुराने उदाहरण से समझिए नियम का असर
इस नीति का प्रभाव पहले भी देखने को मिला है। वॉशिंगटन सुंदर 2016 अंडर-19 विश्व कप में भारत के लिए खेल चुके थे। इसके बाद उम्र पात्र होने के बावजूद वह 2018 अंडर-19 विश्व कप में हिस्सा नहीं ले सके।
नीति लागू होने से पहले कुछ खिलाड़ी एक से अधिक अंडर-19 विश्व कप में खेल चुके थे। रिपोर्टों में सरफराज खान, संदीप शर्मा और विजय ज़ोल जैसे नामों का उल्लेख मिलता है। नई व्यवस्था ने इस रास्ते को सीमित कर दिया।
फॉर्म या फिटनेस वजह नहीं?
मौजूदा जानकारी में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि वैभव को खराब फॉर्म या फिटनेस समस्या के कारण टीम से बाहर रखा गया है। इसके उलट, उनका हालिया प्रदर्शन और सीनियर क्रिकेट में प्रवेश उनकी मौजूदा स्थिति को अलग तरीके से पेश करता है।
कुछ रिपोर्टों में उनके कार्यभार प्रबंधन को भी संदर्भ के रूप में रखा गया है। वैभव अब जूनियर और सीनियर दोनों स्तरों की क्रिकेट में सक्रिय रहे हैं। ऐसे में लगातार मुकाबलों के बीच उनके कार्यभार और दीर्घकालीन विकास पर भी चयनकर्ताओं की नजर रहना स्वाभाविक है। हालांकि, इसे उनके चयन नहीं होने की आधिकारिक वजह के रूप में पेश करने के लिए अलग से स्पष्ट बीसीसीआई बयान उपलब्ध नहीं है।
वैभव के लिए अब क्या रास्ता है?
वैभव के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य सीनियर क्रिकेट में अपनी जगह मजबूत करना होगा। उन्होंने कम उम्र में अंडर-19 विश्व कप, इंडियन प्रीमियर लीग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जैसे अलग-अलग स्तरों का अनुभव हासिल किया है।
अंडर-19 विश्व कप में दोबारा खेलने का रास्ता बंद होने के बाद उनके विकास का केंद्र सीनियर घरेलू क्रिकेट और भारतीय सीनियर टीम की योजनाएं बन सकती हैं। हालांकि अंतिम चयन पूरी तरह प्रदर्शन, फिटनेस, टीम संयोजन और चयनकर्ताओं की रणनीति पर निर्भर करेगा।
उनकी उम्र अभी कम है। इसलिए आने वाले वर्षों में तकनीकी विकास, फिटनेस, मानसिक दबाव से निपटने की क्षमता और लंबे प्रारूप की क्रिकेट में निरंतरता उनके करियर के लिए अहम कारक होंगे।
फैसले को कैसे देखा जाना चाहिए?
वैभव का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंडर-19 टीम में नहीं होना उनके प्रदर्शन पर फैसला नहीं है। यह मौजूदा जूनियर क्रिकेट संरचना और विश्व कप चक्र से जुड़ा चयन निर्णय है।
2026 विश्व कप में उनका प्रदर्शन पहले ही दर्ज हो चुका है। अब बीसीसीआई के सामने नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अगले विश्व कप के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी है। वैभव के लिए इसका मतलब यह है कि उनका क्रिकेट सफर अब एक अलग मोड़ पर है।
एक युवा खिलाड़ी के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है। अंडर-19 स्तर पर दोबारा लौटने के बजाय उन्हें सीनियर क्रिकेट की अधिक कठिन प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान मजबूत करनी होगी। आने वाला दौर यह तय करेगा कि 2026 की उनकी असाधारण शुरुआत आगे चलकर स्थायी अंतरराष्ट्रीय करियर में बदलती है या नहीं।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।