ध्रुव जुरेल का ‘जय जवान, जय किसान’ सलाम क्यों खास है?
115 रन के बाद ध्रुव जुरेल ने पिता-दादा को किया याद
ध्रुव जुरेल के टैटू में छिपी परिवार की भावुक कहानी
ध्रुव जुरेल ने कोलंबो में श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में नाबाद 115 रन बनाए। शतक पूरा करने के बाद उन्होंने सलामी दी और बाइसेप्स पर लिखा ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाया। जुरेल ने बताया कि उनके दादा किसान और पिता सैनिक रहे हैं, इसलिए यह जश्न उनकी जड़ों को समर्पित था।
कोलंबो, श्रीलंका | 25 अगस्त 2026 | शाह टाइम्स
By Mohd Haris
कोलंबो टेस्ट में ध्रुव जुरेल ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उनके शतक का जश्न इससे भी ज्यादा चर्चा में रहा। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट के दूसरे दिन जुरेल ने 171 गेंदों पर अपना दूसरा टेस्ट शतक पूरा किया और नाबाद 115 रन की पारी खेली। इसके बाद उन्होंने हेलमेट उतारा, बल्ला उठाया और अपने बाइसेप्स पर लिखा ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाया। यह महज मैदान पर किया गया सेलिब्रेशन नहीं था। जुरेल ने मैच के बाद खुद बताया कि इस टैटू का सीधा रिश्ता उनके परिवार की दो पीढ़ियों से है। उनके मुताबिक उनके दादा किसान थे और पिता सैनिक रहे हैं।
जुरेल ने अपने सेलिब्रेशन की वजह बताते हुए कहा कि उनके दादा किसान थे और पिता सैनिक। उन्होंने इसे अपनी जड़ें बताते हुए कहा कि वह इन्हें भूलना नहीं चाहते। शतक के बाद किया गया सलाम भी उन्होंने अपने पिता और दादा को समर्पित किया। यही वजह है कि उनके बाइसेप्स पर मौजूद टैटू उनके लिए निजी पहचान का हिस्सा है। मैदान पर शतक के बाद जब उन्होंने इसे कैमरे के सामने दिखाया, तो सेलिब्रेशन का अर्थ उनके क्रिकेट प्रदर्शन से आगे बढ़कर पारिवारिक विरासत से जुड़ गया। ‘जय जवान, जय किसान’ भारत में लंबे समय से सैनिकों और किसानों के योगदान को सम्मान देने वाला लोकप्रिय राष्ट्रीय नारा रहा है। जुरेल ने इसे अपनी पारिवारिक कहानी के साथ जोड़कर एक व्यक्तिगत संदेश का रूप दिया।
जुरेल ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में धैर्य और संयम के साथ बल्लेबाजी की। उन्होंने 171 गेंदों में नौ चौकों की मदद से शतक पूरा किया और अंत तक नाबाद रहे। शतक तक पहुंचने के दौरान वह 99 रन पर 13 गेंदों तक रुके रहे, जिसके बाद एक जोखिम भरे रन से तीन अंकों के आंकड़े तक पहुंचे। शतक के बाद जुरेल ने तेजी दिखाई और पारी में छक्के भी लगाए। भारत ने 503/9 के स्कोर पर पारी घोषित की और जुरेल 115 रन बनाकर नाबाद रहे। इस पारी ने भारत को टेस्ट में मजबूत स्थिति दी। दिन का खेल खत्म होने तक श्रीलंका ने अपनी पहली पारी में दो विकेट खो दिए थे और भारत से 495 रन पीछे था।
जुरेल की पारी में ऋषभ पंत के साथ उनकी साझेदारी भी महत्वपूर्ण रही। दोनों ने 112 रन जोड़े। पंत ने अपने आक्रामक अंदाज में 63 रन बनाए, जबकि जुरेल ने अपेक्षाकृत नियंत्रित बल्लेबाजी करते हुए पारी को आगे बढ़ाया। जुरेल ने पंत के साथ बल्लेबाजी के अनुभव को उपयोगी बताया। उनका कहना था कि पंत के साथ खेलते हुए वह उनकी सलाह लेते हैं और परिस्थितियों के मुताबिक अपना खेल तय करते हैं। यह साझेदारी भारतीय पारी के उस हिस्से में आई जब टीम को निचले क्रम से स्थिरता और रन दोनों की जरूरत थी। जुरेल ने अपनी पारी को उसी हिसाब से आगे बढ़ाया।
जुरेल ने बताया कि श्रीलंका में भारत ए के साथ पहले खेल चुके मैचों का अनुभव इस पारी में उनके लिए उपयोगी रहा। उन्होंने कहा कि उन्हें परिस्थितियों का अंदाजा था और उन्होंने बल्लेबाजी के दौरान साझेदारी बनाने तथा हालात को पढ़ने पर ध्यान दिया। यह पहलू उनके प्रदर्शन को समझने में महत्वपूर्ण है। विदेशी परिस्थितियों में बल्लेबाज के लिए पिच, गेंद की गति और स्पिन के असर को समझना जरूरी होता है। जुरेल को श्रीलंका में पहले खेलने का अनुभव होने से उन्हें परिस्थितियों के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी योजना बनाने में मदद मिली।
जुरेल के शतक का सबसे तनावपूर्ण हिस्सा 99 रन के बाद आया। वह 99 पर पहुंचने के बाद 13 गेंदों तक तीन अंकों के आंकड़े से दूर रहे। एक रन लेने की कोशिश में रन-आउट का जोखिम भी पैदा हुआ, लेकिन वह क्रीज में पहुंच गए और शतक पूरा कर लिया। शतक पूरा होते ही उनका जश्न सामने आया। उन्होंने हेलमेट उतारा, बल्ला उठाया और फिर बाइसेप्स का टैटू कैमरों के सामने किया। इस दौरान मोहम्मद सिराज भी उनके पास पहुंचे और जश्न में शामिल हुए। सिराज की प्रतिक्रिया भी जुरेल की बातचीत में सामने आई। जुरेल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि सिराज अक्सर शतक बनाने वाले बल्लेबाज से ज्यादा उत्साह के साथ जश्न मनाते हैं।
जुरेल का सेलिब्रेशन इसलिए अलग रहा क्योंकि उन्होंने अपनी निजी कहानी को सार्वजनिक मंच से जोड़ा। आम तौर पर क्रिकेटर शतक के बाद बल्ला उठाते हैं, हेलमेट हटाते हैं या दर्शकों की तरफ इशारा करते हैं। जुरेल ने इसके साथ अपने परिवार की विरासत को भी सामने रखा। उनके लिए ‘जय जवान, जय किसान’ दो अलग पेशों का उल्लेख नहीं, बल्कि परिवार की पहचान है। एक तरफ दादा की खेती से जुड़ी पृष्ठभूमि और दूसरी तरफ पिता की सैन्य सेवा, दोनों को उन्होंने एक ही संदेश में समेट दिया। यही वजह है कि उनके शतक का वीडियो और टैटू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना। इस प्रतिक्रिया को केवल क्रिकेट उपलब्धि से जोड़ना अधूरा होगा। इसमें पारिवारिक सम्मान और व्यक्तिगत पहचान का पहलू भी शामिल है।
भारत के लिए विकेटकीपर-बल्लेबाज की भूमिका में प्रतिस्पर्धा लगातार मजबूत रही है। जुरेल ने इस पारी के जरिए विदेशी परिस्थितियों में लंबी पारी खेलने की अपनी क्षमता दिखाई। उनका नाबाद 115 रन केवल शतक का आंकड़ा नहीं था। उन्होंने भारत की पारी को 500 के पार पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और निचले क्रम के बल्लेबाज के रूप में टीम को अतिरिक्त गहराई दी। यह उनका दूसरा टेस्ट शतक था। श्रीलंका की परिस्थितियों में यह प्रदर्शन उनके टेस्ट करियर के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत है।
जुरेल ने मैच के बाद कहा कि भारत के लिए खेलने के साथ दबाव पूरी तरह खत्म नहीं होता। उनके मुताबिक शतक बनाने के बाद भी अगले दिन बल्लेबाज को शून्य से शुरुआत करनी होती है। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की प्रतिस्पर्धा को दिखाता है। एक बड़ी पारी अगले मैच में जगह की गारंटी नहीं देती। खिलाड़ी को लगातार प्रदर्शन करना होता है और हर नई पारी में परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है। जुरेल के सामने आगे भी विदेशी टेस्ट और बड़े घरेलू मुकाबले हैं। इसलिए कोलंबो की यह पारी उनके लिए उपलब्धि के साथ-साथ निरंतरता की चुनौती की शुरुआत भी है।
‘जय जवान, जय किसान’ नारा भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री से जुड़ा है। इसका मूल संदेश देश की सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा में सैनिकों तथा किसानों की भूमिका को सम्मान देना था। जुरेल ने इस राष्ट्रीय संदेश को किसी राजनीतिक संदर्भ में नहीं, बल्कि अपने परिवार की कहानी के तौर पर इस्तेमाल किया। उनके बयान में मुख्य जोर उनके पिता और दादा पर था। इसलिए उनके सेलिब्रेशन का सबसे सटीक अर्थ पारिवारिक सम्मान है। इसे किसी अलग राजनीतिक या सियासी संदेश के रूप में पेश करने के लिए उपलब्ध सामग्री में आधार नहीं है।
खेल में व्यक्तिगत पहचान अक्सर खिलाड़ी की सार्वजनिक छवि का हिस्सा बन जाती है। जुरेल के मामले में परिवार की पृष्ठभूमि पहले से उनके जीवन की कहानी का हिस्सा रही है, लेकिन कोलंबो में शतक के बाद उन्होंने इसे खुद मैदान पर सामने रखा। इस घटना ने एक और पहलू सामने रखा। खिलाड़ी के लिए अंतरराष्ट्रीय शतक केवल आंकड़े का मुकाम नहीं होता, बल्कि उसके पीछे मौजूद परिवार, प्रशिक्षण और संघर्ष की कहानी भी जुड़ी होती है। जुरेल का सेलिब्रेशन इसी व्यक्तिगत संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपने दादा और पिता को याद करते हुए उस उपलब्धि को अपनी जड़ों से जोड़ा।
कोलंबो की पारी ने जुरेल की बल्लेबाजी क्षमता पर फिर ध्यान खींचा है। अब उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती इस प्रदर्शन को निरंतरता में बदलना होगी।
टेस्ट क्रिकेट में एक बड़ी पारी के बाद अगली चुनौती अलग होती है। गेंदबाजी परिस्थितियां बदलती हैं, विपक्षी टीम रणनीति बदलती है और बल्लेबाज से नई परिस्थितियों में फिर प्रदर्शन की उम्मीद होती है। जुरेल ने खुद भी यही संकेत दिया कि भारत के लिए खेलना लगातार दबाव और जिम्मेदारी का मामला है। उनके लिए कोलंबो का 115 नाबाद रन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन आगे का करियर लगातार प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
ध्रुव जुरेल का कोलंबो टेस्ट शतक क्रिकेट रिकॉर्ड से आगे की कहानी बन गया। नाबाद 115 रन की पारी के बाद उनका ‘जय जवान, जय किसान’ टैटू दिखाना उनके लिए अपने पिता और दादा को सलाम करने का तरीका था। जुरेल ने खुद स्पष्ट किया कि उनके दादा किसान थे और पिता सैनिक। उन्होंने इसे अपनी जड़ें बताया और कहा कि वह उन्हें भूलना नहीं चाहते। इसलिए इस सेलिब्रेशन की असली कहानी शतक से ज्यादा उस विरासत की है, जिसे जुरेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर याद किया। कोलंबो में उन्होंने भारत के स्कोर को मजबूती दी और साथ ही अपने परिवार को भी सम्मान दिया।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।