गिल की सबसे बड़ी टेस्ट कमजोरी फिर आई सामने
लेफ्ट-आर्म स्पिन के सामने क्यों फंस रहे हैं गिल?
जयसूर्या ने खोली गिल की पुरानी कमजोरी
शुभमन गिल की लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ कमजोरी फिर चर्चा में है। गॉल टेस्ट में प्रभात जयसूर्या ने उन्हें दोनों पारियों में आउट किया। आंकड़ों के मुताबिक गिल टेस्ट करियर में इस शैली के गेंदबाजों से 11 बार आउट हुए हैं। दूसरे टेस्ट से पहले उनकी तैयारी का केंद्र यही चुनौती बनी हुई है।
शुभमन गिल के लिए श्रीलंका दौरे का पहला टेस्ट बल्लेबाजी के लिहाज से उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। भारतीय कप्तान दोनों पारियों में बड़ी पारी नहीं खेल सके और दोनों बार श्रीलंका के बाएं हाथ के स्पिनर प्रभात जयसूर्या ने उन्हें अपना शिकार बनाया। अब दूसरे टेस्ट से पहले गिल की नजर उस तकनीकी चुनौती पर है, जो टेस्ट क्रिकेट में उनके लिए बार-बार परेशानी खड़ी करती रही है।
गिल की लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ कमजोरी नई नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों में उनके टेस्ट करियर में इस तरह के गेंदबाजों के खिलाफ 11 डिसमिसल दर्ज हैं। यही वजह है कि कोलंबो टेस्ट से पहले उनकी बल्लेबाजी की तैयारी में स्पिन के खिलाफ फुटवर्क, शॉट चयन और डिफेंस पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
गॉल में भारत और श्रीलंका के बीच पहले टेस्ट में गिल के सामने प्रभात जयसूर्या सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे। भारतीय कप्तान पहली पारी में 16 रन बनाकर आउट हुए, जबकि दूसरी पारी में उनका स्कोर 8 रन रहा। दोनों मौकों पर जयसूर्या ने उनकी पारी खत्म की।
यह महज एक मैच का मामला नहीं है। गिल के करियर के आंकड़े बताते हैं कि बाएं हाथ के पारंपरिक स्पिनरों के खिलाफ उनका प्रदर्शन उतना मजबूत नहीं रहा, जितना दूसरे स्पिन विकल्पों के खिलाफ रहा है। एक उपलब्ध आंकड़ा उन्हें लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ 407 रन और 11 डिसमिसल के साथ दर्ज करता है, जबकि ऑफ-स्पिन के खिलाफ उनका औसत काफी बेहतर बताया गया है।
गिल दाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। लेफ्ट-आर्म ऑर्थोडॉक्स स्पिनर उनके लिए गेंद के एंगल और टर्न के कारण अलग तरह की चुनौती पैदा करते हैं।
लेफ्ट-आर्म स्पिनर आम तौर पर दाएं हाथ के बल्लेबाज के लिए गेंद को ऑफ स्टंप की तरफ से अंदर लाते हैं। अगर बल्लेबाज फ्रंट फुट और बैक फुट के बीच सही समय पर फैसला नहीं कर पाता, तो गेंद बल्ले के किनारे, पैड या स्टंप तक पहुंच सकती है।
क्रिकेट विश्लेषण में गिल की समस्या को केवल स्पिन खेलने की कमजोरी कहना पर्याप्त नहीं होगा। उनकी चुनौती शॉट चयन और गेंद की लाइन को जल्दी पढ़ने से भी जुड़ी दिखाई देती है।
क्रिकबज़ की एक तकनीकी समीक्षा में गिल के खिलाफ लेफ्ट-आर्म स्पिन के इस पैटर्न को रेखांकित किया गया था। इसमें उनके डिफेंस और बल्ले के कोण से जुड़ी तकनीकी बारीकियों पर भी चर्चा की गई थी।
भारतीय क्रिकेट में लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ बल्लेबाजों की परेशानी लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। इंडियन एक्सप्रेस के एक विस्तृत विश्लेषण में विराट कोहली, रोहित शर्मा और शुभमन गिल के आंकड़ों का जायजा लिया गया था।
इस विश्लेषण के मुताबिक 2020 के बाद गिल भी उन भारतीय बल्लेबाजों में शामिल रहे जिन्हें लेफ्ट-आर्म स्पिन ने बार-बार परेशान किया। इसी दौर में रोहित शर्मा और विराट कोहली भी इस शैली के गेंदबाजों के खिलाफ कई बार आउट हुए।
इसका मतलब यह नहीं है कि भारतीय बल्लेबाज लेफ्ट-आर्म स्पिन नहीं खेल सकते। समस्या तब सामने आती है जब पिच में टर्न और बाउंस मौजूद हो और गेंदबाज लगातार एक ही क्षेत्र में दबाव बनाए रखे।
गॉल की परिस्थितियां इस लिहाज से अहम थीं। वहां स्पिनरों को पिच से पर्याप्त मदद मिली और भारत ने भी तीन स्पिनरों के साथ मैदान में उतरने का फैसला किया था। रवींद्र जडेजा, मानव सुथार और कुलदीप यादव भारत के स्पिन आक्रमण का हिस्सा थे।
प्रभात जयसूर्या ने गिल के खिलाफ अपनी लाइन और लेंथ से लगातार दबाव बनाया। दोनों पारियों में गिल को बड़ी पारी खेलने का मौका नहीं मिला।
यहां एक दिलचस्प पहलू सामने आता है। भारत के बल्लेबाज स्पिन के खिलाफ रन बनाने की क्षमता रखते हैं, लेकिन जब गेंदबाज स्टंप की लाइन पर अनुशासन बनाए रखते हैं और बल्लेबाज को आगे बढ़कर खेलने या पीछे हटने का फैसला जल्दी करना पड़ता है, तब जोखिम बढ़ जाता है।
गॉल टेस्ट में श्रीलंकाई स्पिनरों ने भारतीय बल्लेबाजों को कई मौकों पर परेशान किया। इसके बावजूद भारत ने पहली पारी में बड़ा स्कोर खड़ा किया, जिसमें देवदत्त पडिक्कल की 167 रन की पारी अहम रही।
गिल के मामले में सबसे महत्वपूर्ण आंकड़ा उनके लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ डिसमिसल का है।
एक प्रकाशित आंकड़े के अनुसार, गिल ने लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ 407 रन बनाए और 11 बार आउट हुए हैं। इसके मुकाबले ऑफ-स्पिन के खिलाफ उनका प्रदर्शन बेहतर रहा है।
एक अन्य विस्तृत विश्लेषण में 2020 के बाद गिल के लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर भी चिंता जताई गई थी। इसमें फ्रंट फुट और बैक फुट से खेलने के आंकड़ों में अंतर दिखाया गया था।
हालांकि आंकड़ों को पढ़ते समय एक सावधानी जरूरी है। अलग-अलग डेटाबेस में गेंदबाजों की श्रेणी और कटऑफ अलग हो सकते हैं। इसलिए 11 डिसमिसल के आंकड़े को उसी सांख्यिकीय परिभाषा के संदर्भ में देखना चाहिए।
भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो के सिंहलीज स्पोर्ट्स क्लब में निर्धारित है।
गिल के लिए यह मुकाबला निजी स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। कप्तान के तौर पर टीम की बल्लेबाजी में उनसे बड़ी जिम्मेदारी की उम्मीद रहती है।
श्रीलंका के पास स्पिन विकल्प मौजूद हैं और गॉल टेस्ट में स्पिनरों के प्रभाव ने यह साफ कर दिया कि भारतीय बल्लेबाजों को इस चुनौती के लिए तैयार रहना होगा।
गिल ने नेट्स में अपने फुटवर्क और स्पिन के खिलाफ इंटेंट पर काम किया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो में अभ्यास के दौरान उनका फोकस फुटवर्क, आक्रामक शॉट और स्पिन के खिलाफ सही इंटेंट पर रहा।
गिल की फॉर्म केवल व्यक्तिगत मसला नहीं है। वह कप्तान और शीर्ष क्रम के प्रमुख बल्लेबाज हैं। इसलिए उनकी बड़ी पारी भारत की मैच रणनीति को सीधे प्रभावित करती है।
गॉल में भारत को देवदत्त पडिक्कल, केएल राहुल और दूसरे बल्लेबाजों से महत्वपूर्ण योगदान मिला। लेकिन लंबी टेस्ट सीरीज में कप्तान से लगातार रन की उम्मीद बनी रहेगी।
दूसरे टेस्ट में अगर श्रीलंका फिर से लेफ्ट-आर्म स्पिन को गिल के खिलाफ मुख्य हथियार बनाता है, तो मुकाबला तकनीक और धैर्य का होगा।
गिल के आंकड़े श्रीलंका के गेंदबाजों के लिए एक रणनीतिक संकेत देते हैं। अगर किसी बल्लेबाज के खिलाफ एक खास शैली लगातार सफल रही है, तो विपक्षी टीम उसी क्षेत्र में दबाव बनाने की कोशिश करेगी।
प्रभात जयसूर्या का गॉल में दो बार गिल को आउट करना इस रणनीति को और मजबूत करता है। हालांकि एक मैच के आधार पर पूरे करियर की बल्लेबाजी तकनीक पर अंतिम फैसला देना उचित नहीं होगा।
श्रीलंका को गिल के खिलाफ सफलता के लिए केवल टर्न पर निर्भर रहने के बजाय लाइन, लेंथ और फील्ड प्लेसमेंट में निरंतरता रखनी होगी।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि गिल अपनी तकनीकी कमजोरी को कितनी जल्दी सुधारते हैं।
क्या वह स्पिन के खिलाफ ज्यादा देर तक फ्रंट फुट पर टिकेंगे? क्या वह बैक फुट से गेंद को नियंत्रित तरीके से खेलेंगे? या फिर वह आक्रामक शॉट के जरिए गेंदबाज की लेंथ बिगाड़ने की कोशिश करेंगे?
इन सवालों का जवाब कोलंबो की पिच और मैच की परिस्थितियां देंगी।
एक और सवाल कप्तानी से जुड़ा है। गिल को अपनी बल्लेबाजी के साथ भारतीय टीम के पूरे स्पिन आक्रमण और बल्लेबाजी संयोजन को भी संभालना है।
दूसरे टेस्ट में गिल के सामने वही चुनौती फिर लौट सकती है। श्रीलंका के स्पिनर उन्हें लगातार स्टंप की लाइन में गेंदबाजी कर सकते हैं और गलत शॉट के लिए मजबूर करने की कोशिश करेंगे।
गिल की तैयारी में फुटवर्क और शॉट चयन इसलिए अहम होंगे। अगर वह शुरुआती स्पिन आक्रमण को पार कर जाते हैं, तो उनके पास बड़ी पारी खेलने का पर्याप्त समय और क्षमता है।
भारत के लिए भी यह मुकाबला सीरीज पर पकड़ मजबूत करने का मौका है। गॉल में भारत ने मैच अपने पक्ष में किया था और अब कोलंबो में वही दबदबा बनाए रखना टीम की प्राथमिकता होगी।
शुभमन गिल की लेफ्ट-आर्म स्पिन के खिलाफ कमजोरी के आंकड़े चर्चा के लिए पर्याप्त आधार देते हैं, लेकिन इसे उनकी बल्लेबाजी की स्थायी सीमा मानना जल्दबाजी होगी।
गॉल में प्रभात जयसूर्या द्वारा दोनों पारियों में आउट किया जाना इस कमजोरी को फिर सामने लाया है। अब असली परीक्षा कोलंबो में होगी।
अगर गिल फुटवर्क, डिफेंस और शॉट चयन में बेहतर नियंत्रण दिखाते हैं, तो यह सीरीज उनके लिए केवल कप्तानी की परीक्षा नहीं रहेगी, बल्कि एक पुरानी तकनीकी चुनौती के जवाब का मंच भी बनेगी।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।