रिषभ पंत की CM धामी से खास अपील, 3 साल से जमीन की तलाश
उत्तराखंड लौटना चाहते हैं रिषभ पंत, धामी ने दिया भरोसा
जमीन के लिए पंत ने CM धामी को किया टैग, सरकार का जवाब
भारतीय क्रिकेटर रिषभ पंत ने उत्तराखंड में जमीन खरीदने और दिल्ली से अपना बेस राज्य में शिफ्ट करने के लिए CM पुष्कर सिंह धामी से मदद मांगी। पंत के मुताबिक तीन साल से उन्हें उपयुक्त जमीन नहीं मिली। धामी ने नियमों के मुताबिक सहयोग का भरोसा दिया।
📍 Location: उत्तराखंड
📰 Date: 8 अगस्त 2026
✍️ By Mohd Haris
भारतीय क्रिकेटर रिषभ पंत ने अपने गृह राज्य उत्तराखंड लौटने की इच्छा सार्वजनिक तौर पर जाहिर की है। पंत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से जमीन खरीदने की प्रक्रिया में मदद मांगी है, ताकि वह राज्य में अपना पहला घर बना सकें और दिल्ली से अपना बेस उत्तराखंड शिफ्ट कर सकें।
पंत ने शनिवार तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मुख्यमंत्री को टैग करते हुए अपनी परेशानी बताई। उनका कहना है कि वह करीब तीन साल से ऐसी जमीन की तलाश कर रहे हैं जो उनके घर और भविष्य की जरूरतों के लिहाज से मुनासिब हो।
पंत के मुताबिक, उत्तराखंड में जमीन खरीदने की कोशिश आसान नहीं रही। उन्होंने अपने पोस्ट में जमीन के आकार, प्रक्रिया में स्पष्टता और उपयुक्त विकल्प नहीं मिलने का जिक्र किया।
उनकी अपील का एक अहम पहलू यह था कि वह सरकारी जमीन मुफ्त में लेने की मांग नहीं कर रहे हैं। पंत ने बाद की पोस्ट में साफ किया कि अगर सरकार प्रक्रिया आसान करती है, तो वह निर्धारित सरकारी दरों पर जमीन खरीदना चाहते हैं।
पंत ने कहा कि वह अपने गृह राज्य में वापस आना चाहते हैं। उन्होंने उत्तराखंड से अपने लगाव और स्थानीय लोगों के साथ जुड़ने की इच्छा भी जाहिर की।
पंत उत्तराखंड से ताल्लुक रखते हैं, जबकि घरेलू क्रिकेट में वह दिल्ली का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका यह फैसला निजी आवास से आगे राज्य से जुड़ाव और भविष्य में वहां योगदान देने की उनकी इच्छा को भी सामने लाता है।
पंत की अपील पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पंत को उत्तराखंड का गौरव बताते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों को मामले पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
धामी ने भरोसा दिया कि अधिकारी पंत से संपर्क करेंगे और नियमों के मुताबिक हर संभव सहयोग करेंगे। इसका मतलब यह है कि सरकार प्रक्रिया में सहायता देने की बात कर रही है, न कि किसी विशेष नियम से बाहर जाकर जमीन आवंटित करने की घोषणा।
यहां एक महत्वपूर्ण फर्क समझना जरूरी है। पंत ने जमीन खरीदने में प्रशासनिक मदद मांगी है, जबकि मुख्यमंत्री ने भी अपने जवाब में सहयोग को मौजूदा नियमों के दायरे से जोड़ा है।
इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि पंत को सरकार ने जमीन दे दी है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक फिलहाल अधिकारियों को मामले की जांच और आगे की प्रक्रिया के लिए निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड में जमीन खरीदने के नियम सामान्य निजी संपत्ति लेनदेन से अलग प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं से जुड़े हो सकते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में land use, स्थानीय नियम और जमीन की प्रकृति जैसे मुद्दे भी अहम हो जाते हैं।
पंत ने अपने पोस्ट में इसी प्रक्रिया में clarity नहीं होने और उपयुक्त जमीन नहीं मिलने की शिकायत की। हालांकि उनके मामले में कौन-सी जमीन देखी गई, कौन-सा कानूनी प्रावधान बाधा बना और किस विभाग के स्तर पर समस्या आई, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।
इसलिए पंत की व्यक्तिगत शिकायत को पूरे राज्य की land policy पर निष्कर्ष के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर पंत की अपील को कुछ लोगों ने सरकारी जमीन मांगने के तौर पर देखा। लेकिन पंत की दूसरी पोस्ट में स्थिति काफी स्पष्ट हुई।
उन्होंने कहा कि उन्हें राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ी के तौर पर कोई उपहार मिलना अच्छा लगेगा, लेकिन उनकी प्राथमिक मांग जमीन खरीदने की है। वह सरकार से निर्धारित दरों पर जमीन खरीदकर अपना पहला घर बनाना चाहते हैं।
इस स्पष्टीकरण से उनकी अपील का मूल स्वरूप साफ होता है। वह मुफ्त जमीन की मांग के बजाय सरकारी स्तर पर प्रक्रिया में मदद चाहते हैं।
रिषभ पंत का उत्तराखंड से पुराना संबंध है। वह राज्य से निकलकर भारतीय क्रिकेट के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल हुए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।
उनकी वापसी की इच्छा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि उत्तराखंड लंबे समय से अपने प्रवासी और सफल लोगों को राज्य से जोड़ने की कोशिश करता रहा है। पंत का घर बनाना और भविष्य में राज्य में समय बिताना इस जुड़ाव का व्यक्तिगत उदाहरण बन सकता है।
पंत जैसे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर का उत्तराखंड में स्थायी घर बनाना निजी फैसला है, लेकिन इसका सार्वजनिक असर भी हो सकता है। इससे राज्य में रहने, निवेश करने और स्थानीय स्तर पर योगदान देने को लेकर एक सकारात्मक narrative बन सकता है।
हालांकि किसी सेलिब्रिटी या क्रिकेटर के मामले को आम नागरिकों की जमीन संबंधी समस्याओं से अलग संदर्भ में देखना जरूरी है। सरकार को पंत को सहायता देते समय वही कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया स्पष्ट रखनी होगी जो दूसरे पात्र खरीदारों पर लागू होती है।
इस पूरे मामले की एक और अहम बात है। पंत ने अपनी समस्या सीधे मुख्यमंत्री को सोशल मीडिया पर टैग करके रखी और कुछ ही समय में मुख्यमंत्री की तरफ से जवाब सामने आ गया।
यह डिजिटल governance और public communication के बदलते तरीके का उदाहरण है। लेकिन ऐसी व्यवस्था में transparency भी उतनी ही जरूरी है। किसी सार्वजनिक व्यक्ति की अपील पर कार्रवाई होती है तो प्रक्रिया और नियमों की स्थिति भी स्पष्ट रहनी चाहिए।
अब निगाहें उत्तराखंड सरकार के संबंधित अधिकारियों पर रहेंगी। अगर पंत के लिए जमीन का कोई उपयुक्त विकल्प मिलता है, तो आगे land ownership, land use, खरीद की अनुमति और दूसरे कानूनी पहलुओं की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री ने मामले को अधिकारियों तक पहुंचा दिया है। जमीन की पहचान, खरीद और निर्माण को लेकर अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।
रिषभ पंत की अपील क्रिकेट से बाहर उनकी निजी प्राथमिकताओं की झलक देती है। दिल्ली में अपना बेस रखने के बावजूद वह अपने मूल राज्य में घर बनाकर वापस लौटना चाहते हैं।
इस मामले में सबसे अहम बात यही है कि पंत ने जमीन खरीदने के लिए प्रशासनिक सहायता मांगी है और मुख्यमंत्री ने नियमों के दायरे में सहयोग का आश्वासन दिया है। अब वास्तविक कसौटी सरकारी प्रक्रिया की पारदर्शिता और उसके नतीजे होंगे।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।