ईशान किशन का दलीप ट्रॉफी फाइनल में ऐतिहासिक दोहरा शतक, 250 रन पर रिटायर्ड हर्ट
Wasi Siddiqui
•
2026-09-07 15:52:35
ईशान किशन ने दलीप ट्रॉफी फाइनल में 250 रन बनाकर इतिहास रचा। ईस्ट जोन के कप्तान ने फाइनल में सबसे बड़े व्यक्तिगत स्कोर वाले कप्तान का रिकॉर्ड बनाया।
Location
Chennai, Tamil Nadu
Date
07 September 2026
By
Wasi Siddiqui
ऐतिहासिक पारी के साथ ईशान का जवाब
दलीप ट्रॉफी के फाइनल में ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने बल्ले से ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने मुकाबले की तस्वीर बदल दी। साउथ जोन के खिलाफ चेन्नई में खेले जा रहे फाइनल के दूसरे दिन ईशान ने दोहरा शतक पूरा किया और इसके बाद 250 रन बनाकर रिटायर्ड हर्ट हुए। उनकी पारी में आक्रामकता और लंबी पारी खेलने की क्षमता दोनों नजर आईं।
ईशान ने 301 गेंदों का सामना करते हुए 250 रन बनाए। उनकी पारी में 27 चौके और सात छक्के शामिल रहे। इस पारी के साथ उन्होंने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बनाने वाले कप्तान का रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया। इससे पहले यह रिकॉर्ड अंशुमान गायकवाड़ के नाम था।
270 गेंदों पर पूरा किया दोहरा शतक
ईशान किशन ने अपना दोहरा शतक 270 गेंदों पर पूरा किया। ईस्ट जोन की पहली पारी के 122वें ओवर में देवदत्त पडिक्कल की गेंद पर चौका लगाकर उन्होंने यह उपलब्धि हासिल की।
यह उनके फर्स्ट क्लास करियर का दूसरा दोहरा शतक है। दलीप ट्रॉफी में उन्होंने पहली बार दोहरे शतक का आंकड़ा पार किया।
ईशान की पारी की खासियत इसका निरंतर दबदबा रहा। उन्होंने लंबे समय तक क्रीज पर टिककर रन बनाने के साथ तेज गति से स्कोर भी आगे बढ़ाया। दोहरे शतक तक पहुंचने के बाद भी उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता बनी रही।
फाइनल में सबसे बड़ा स्कोर बनाने वाले कप्तान
ईशान की 250 रन की पारी ने दलीप ट्रॉफी फाइनल के रिकॉर्ड बुक में भी जगह बनाई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वह इस मुकाबले के इतिहास में दोहरा शतक लगाने वाले छठे बल्लेबाज हैं।
इस सूची में रमन लांबा, अंशुमान गायकवाड़, यूसुफ पठान, चेतेश्वर पुजारा और यशस्वी जायसवाल पहले शामिल थे। ईशान ने 250 रन के साथ इस सूची में अपनी जगह बनाई।
फाइनल में दर्ज दोहरे शतकों के आंकड़ों में रमन लांबा का 320 रन का स्कोर अब भी सबसे बड़ा है। इसके बाद चेतेश्वर पुजारा के नाबाद 256 रन और ईशान किशन के 250 रन दर्ज हैं।
यहां ईशान की उपलब्धि का अलग महत्व है। वह दलीप ट्रॉफी फाइनल में कप्तान के तौर पर सबसे बड़ी व्यक्तिगत पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए हैं।
ईस्ट जोन को मिला मजबूत आधार
ईशान की पारी अकेले नहीं आई। उनके साथ कुमार कुशाग्र ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। दोनों बल्लेबाजों के बीच पांचवें विकेट के लिए 230 रनों की साझेदारी हुई। कुमार कुशाग्र ने भी शतक लगाया।
फाइनल के पहले दिन ईस्ट जोन ने चार विकेट खोकर 385 रन बनाए थे। इसके बाद दूसरे दिन ईशान और कुशाग्र की बल्लेबाजी ने टीम की स्थिति और मजबूत की।
इस साझेदारी ने साउथ जोन के गेंदबाजों पर दबाव बढ़ाया। ईस्ट जोन के मध्यक्रम ने लंबी साझेदारी के जरिए पारी को स्थिरता दी और बड़े स्कोर की बुनियाद तैयार की।
ईशान के फर्स्ट क्लास करियर का संदर्भ
ईशान किशन लंबे समय से भारतीय घरेलू क्रिकेट के प्रमुख विकेटकीपर बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उन्होंने 67 फर्स्ट क्लास मुकाबले खेले हैं और चार हजार से ज्यादा रन बनाए हैं।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनके नाम 10 शतक और 19 अर्धशतक दर्ज हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 273 रन रहा है।
दलीप ट्रॉफी फाइनल की यह पारी उनके घरेलू क्रिकेट करियर के महत्वपूर्ण प्रदर्शनों में शामिल हो गई है। खासकर इसलिए क्योंकि यह पारी ऐसे मुकाबले में आई, जहां टीम की कमान भी उनके हाथ में है।
टेस्ट टीम में वापसी के संदर्भ में अहम पारी
ईशान के प्रदर्शन पर इसलिए भी निगाहें हैं क्योंकि घरेलू क्रिकेट में बड़ी पारियां भारतीय चयन व्यवस्था के लिए अहम संकेत देती हैं। फाइनल से एक दिन पहले भी उनके शतक को भारतीय टेस्ट टीम में दावे के संदर्भ में देखा गया था।
हालांकि किसी खिलाड़ी की राष्ट्रीय टीम में वापसी या चयन को केवल एक पारी के आधार पर तय नहीं किया जाता। चयन में मौजूदा प्रदर्शन, टीम की जरूरत, विकेटकीपिंग विकल्प और चयनकर्ताओं की रणनीति जैसे कई पहलू शामिल होते हैं।
इसलिए ईशान की 250 रन की पारी उनके पक्ष में मजबूत क्रिकेटिंग प्रदर्शन जरूर है, लेकिन इसे राष्ट्रीय टीम में वापसी की पुष्टि के तौर पर पेश करना जल्दबाजी होगी।
दलीप ट्रॉफी में ईशान की नई पहचान
ईशान ने इस पारी के जरिए दलीप ट्रॉफी में अपनी बल्लेबाजी की एक नई पहचान दर्ज की है। इससे पहले वह सीमित ओवरों के क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के लिए पहचाने जाते रहे हैं। अब फर्स्ट क्लास क्रिकेट में इतनी लंबी और बड़ी पारी उनके बल्लेबाजी प्रोफाइल का अहम हिस्सा बन गई है।
दलीप ट्रॉफी जैसे घरेलू प्रथम श्रेणी टूर्नामेंट में लंबे समय तक बल्लेबाजी करना तकनीकी अनुशासन, धैर्य और परिस्थितियों के मुताबिक बल्लेबाजी की परीक्षा लेता है। ईशान ने फाइनल में इन पहलुओं पर मजबूत प्रदर्शन किया।
रिकॉर्ड से आगे टीम का लक्ष्य
व्यक्तिगत रिकॉर्ड के बावजूद ईशान की पारी का वास्तविक असर मैच के नतीजे से तय होगा। फाइनल में बड़ी पहली पारी विपक्षी टीम पर दबाव जरूर बनाती है, लेकिन क्रिकेट में मुकाबले का फैसला पूरे मैच के प्रदर्शन से होता है।
ईस्ट जोन के लिए अब प्राथमिकता इस मजबूत बल्लेबाजी प्रदर्शन को मैच में निर्णायक बढ़त में बदलना है। साउथ जोन के सामने चुनौती ईस्ट जोन के बड़े स्कोर का जवाब देने और मुकाबले में अपनी स्थिति कायम रखने की होगी।
आगे क्या
ईशान किशन की 250 रन की पारी ने दलीप ट्रॉफी फाइनल को व्यक्तिगत रिकॉर्ड के लिहाज से खास बना दिया है। वह फाइनल में दोहरा शतक लगाने वाले ईस्ट जोन के पहले बल्लेबाज और इस टूर्नामेंट में दोहरा शतक लगाने वाले ईस्ट जोन के तीसरे बल्लेबाज बने। उनसे पहले अरुण लाल और सबा करीम यह उपलब्धि हासिल कर चुके थे।
अब निगाहें मैच के अगले चरण पर हैं। ईशान की पारी ने ईस्ट जोन को मजबूत स्थिति दी है, लेकिन खिताब का फैसला अभी बाकी है। इस प्रदर्शन का सबसे बड़ा असर घरेलू क्रिकेट में ईशान की मौजूदा फॉर्म और भारतीय टीम के चयन पर होने वाली बहस में दिखाई देगा।
ईशान ने फाइनल में रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अब इस पारी की असली अहमियत इस बात से तय होगी कि ईस्ट जोन इस बल्लेबाजी प्रदर्शन को खिताबी जीत में कितना बदल पाता है।
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Wasi Siddiqui
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक,
अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।