अफगानिस्तान के खिलाफ 57 रन की पारी के बाद संजू सैमसन ने बाहरी आलोचना के असर पर खुलकर बात की। वैभव सूर्यवंशी के चयन और टीम प्रबंधन के फैसलों पर भी प्रतिक्रिया दी।
📍 नई दिल्ली
🗓️ 16 सितंबर 2026
✍️ मोहम्मद नावेद
संजू सैमसन ने बल्ले से दिया जवाब
अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में संजू सैमसन ने अपनी बल्लेबाजी से लंबे समय से चल रही चर्चा का जवाब दिया। दिल्ली में खेले गए मुकाबले में उन्होंने केवल 22 गेंदों पर 57 रन की तेजतर्रार पारी खेली और भारत की 7 विकेट की जीत में अहम योगदान दिया। मुकाबले के बाद सैमसन ने अपनी पारी से ज्यादा चर्चा उस दबाव पर की, जिसका सामना भारतीय क्रिकेटरों को लगातार करना पड़ता है।
सैमसन ने माना कि सोशल मीडिया, लगातार होने वाली बहस और आलोचनाओं से खिलाड़ी पूरी तरह अलग नहीं रह सकता। उन्होंने कहा कि अनुभव ने उन्हें इन परिस्थितियों से निपटना सिखाया है, लेकिन वह भी इंसान हैं और बाहरी बातों का असर होता है।
बाहर का शोर पूरी तरह नजरअंदाज करना आसान नहीं
सैमसन ने पत्रकारों से बातचीत में बाहरी चर्चाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि वह अपने आसपास के शोर से बचने के लिए वाई-फाई बंद रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन कभी-कभी वह फिर चालू हो जाता है और कुछ टिप्पणियां सामने आ जाती हैं।
उनका कहना था कि खिलाड़ी को यह तय करना पड़ता है कि वह किन बातों को अपने ऊपर हावी होने देगा। अगर हर टिप्पणी और आलोचना पर ध्यान दिया जाए, तो मैदान पर फैसले लेना मुश्किल हो सकता है।
सैमसन के मुताबिक, बल्लेबाज के सामने गेंद आने से पहले ही अगर दिमाग में बाहर की प्रतिक्रियाएं चलने लगें, तो उसका असर खेल पर पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने अपने ध्यान को तैयारी और प्रदर्शन पर केंद्रित रखने की बात कही।
संजू ने माना, आलोचना कभी-कभी दुख देती है
सैमसन ने यह भी स्वीकार किया कि आलोचना से उन्हें हमेशा कोई फर्क नहीं पड़ता, ऐसा कहना सही नहीं होगा। उन्होंने साफ कहा कि वह मशीन या रोबोट नहीं हैं। किसी टिप्पणी से कभी-कभी उन्हें बुरा लगता है और वह प्रभावित भी होते हैं।
लेकिन उनका कहना था कि अनुभव ने उन्हें ऐसी परिस्थितियों में खुद को संभालना सिखाया है। वह अपने आप से बात करते हैं और याद दिलाते हैं कि उनका काम क्या है और उन्हें किस तरह तैयारी करनी है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब भारतीय टीम में शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों को लेकर चयन की चर्चा लगातार बनी हुई है।
वैभव सूर्यवंशी की दावेदारी पर संजू का जवाब
संजू सैमसन के सामने मौजूदा दौर में एक अहम चुनौती 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी की बढ़ती दावेदारी भी है। वैभव ने घरेलू और टी20 क्रिकेट में अपने आक्रामक बल्लेबाजी प्रदर्शन से ध्यान खींचा है। टीम में उनकी मौजूदगी ने शीर्ष क्रम में विकल्पों की चर्चा को और तेज किया है।
सैमसन ने वैभव के प्रदर्शन की तारीफ की। उन्होंने कहा कि जब 15 साल का खिलाड़ी लगभग 700 से 800 रन बनाकर मजबूत प्रदर्शन करता है, तो टीम प्रबंधन के सामने उसे मौका देने का सवाल स्वाभाविक रूप से आता है।
सैमसन ने यह भी माना कि उन्होंने इससे पहले कुछ मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं किया था। दूसरी ओर वैभव अच्छी फॉर्म में थे। ऐसे हालात में टीम प्रबंधन के लिए चयन का फैसला आसान नहीं होता।
टीम प्रबंधन के फैसले को समझते हैं सैमसन
सैमसन ने वैभव को मौका दिए जाने को लेकर शिकायत का रुख नहीं अपनाया। उन्होंने अपने कप्तानी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि टीम का नेतृत्व करने वाला व्यक्ति कई बार ऐसे फैसलों के सामने आता है, जहां हर खिलाड़ी को एक साथ मौका देना संभव नहीं होता।
उनके मुताबिक, ऐसे समय में संवाद की अहमियत बढ़ जाती है। सैमसन ने बताया कि सीरीज के दौरान टीम के भीतर इस मुद्दे पर बातचीत हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि सीरीज शुरू होने से पहले मुख्य कोच गौतम गंभीर के साथ उनकी काफी बातचीत हुई थी।
इससे संकेत मिलता है कि सैमसन और टीम प्रबंधन के बीच चयन से जुड़े मुद्दे पर संवाद बना हुआ था।
गौतम गंभीर और नेतृत्व समूह पर क्या बोले
सैमसन ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और नेतृत्व समूह के फैसलों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि टीम प्रबंधन के लिए लोकप्रिय फैसला लेना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन टीम के हित में कठिन फैसला लेना ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है।
सैमसन ने कहा कि नेतृत्व समूह को टीम को प्राथमिकता देते हुए कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। उन्होंने ऐसे फैसलों के लिए नेतृत्व समूह को श्रेय देने की बात भी कही।
उनका बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि वैभव सूर्यवंशी और सैमसन को लेकर बाहरी स्तर पर तुलना लगातार चर्चा का हिस्सा बनी हुई है। सैमसन ने इस बहस को व्यक्तिगत प्रतिस्पर्धा के बजाय टीम चयन के संदर्भ में देखने का संकेत दिया।
अफगानिस्तान के खिलाफ पारी क्यों अहम रही
दूसरे टी20 में सैमसन की 57 रन की पारी उनके लिए व्यक्तिगत स्तर पर भी महत्वपूर्ण रही। उन्होंने 22 गेंदों में यह स्कोर बनाया और आक्रामक अंदाज़ में बल्लेबाजी की। भारत ने मुकाबला 7 विकेट से जीता।
इससे पहले सैमसन को लेकर उनकी निरंतरता और टीम में स्थान को लेकर बहस चल रही थी। उनकी इस पारी ने मौजूदा सीरीज में उनके प्रदर्शन को लेकर चर्चा का रुख बदलने का आधार दिया है।
हालांकि, एक पारी के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य के चयन पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। टीम में चयन प्रदर्शन, संयोजन, विपक्षी टीम की परिस्थितियों और नेतृत्व समूह की रणनीति समेत कई पहलुओं पर निर्भर करता है।
भारतीय क्रिकेट में चयन की चुनौती
भारतीय क्रिकेट में शीर्ष क्रम में स्थानों की संख्या सीमित है। ऐसे में एक से अधिक प्रतिभाशाली बल्लेबाजों के उपलब्ध होने पर टीम प्रबंधन के सामने चयन का कठिन सवाल खड़ा होता है।
सैमसन के अनुभव और वैभव की युवा ऊर्जा के बीच तुलना बाहरी चर्चा का विषय बन सकती है, लेकिन टीम के अंदर खिलाड़ियों की भूमिका अलग-अलग परिस्थितियों में तय होती है। सैमसन ने खुद वैभव के प्रदर्शन को स्वीकार करते हुए चयन प्रक्रिया की कठिनाई को रेखांकित किया है।
इस पूरे मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि सैमसन ने वैभव को अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश नहीं किया। उन्होंने टीम के फैसलों को समझने और टीम के हित को प्राथमिकता देने की बात कही।
बाहरी दबाव और खिलाड़ी का प्रदर्शन
सैमसन का बयान भारतीय क्रिकेट में एक बड़े मुद्दे की ओर भी ध्यान खींचता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले खिलाड़ियों पर प्रदर्शन को लेकर लगातार सार्वजनिक निगाह रहती है। सोशल मीडिया के दौर में आलोचना मैच के तुरंत बाद सामने आ जाती है।
खिलाड़ी के लिए चुनौती केवल मैदान पर प्रदर्शन की नहीं होती। उसे चयन, फॉर्म, टीम संयोजन और सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बीच अपनी तैयारी को संतुलित रखना पड़ता है।
सैमसन ने अपने अनुभव के जरिए इसी दबाव की बात की। उनका बयान यह स्थापित नहीं करता कि आलोचना गलत है। बल्कि वह यह बताता है कि लगातार आलोचना का खिलाड़ी की मानसिक स्थिति और तैयारी पर असर पड़ सकता है।
आगे की तस्वीर क्या होगी
अफगानिस्तान सीरीज के बाकी मुकाबलों में भारतीय टीम का संयोजन फिर चर्चा में रहेगा। खासकर शीर्ष क्रम में उपलब्ध विकल्पों को देखते हुए चयन का फैसला अहम रहेगा।
सैमसन के लिए 57 रन की पारी आत्मविश्वास बढ़ाने वाली पारी रही है, लेकिन आगे भी प्रदर्शन को निरंतर बनाए रखना उनके लिए महत्वपूर्ण होगा। वहीं वैभव सूर्यवंशी को लेकर टीम प्रबंधन की रणनीति भी निगाहों में रहेगी।
मौजूदा स्थिति में सैमसन का संदेश स्पष्ट है। बाहरी शोर मौजूद रहेगा, चयन को लेकर बहस भी जारी रहेगी, लेकिन खिलाड़ी का ध्यान अपनी तैयारी और टीम की जरूरत पर होना चाहिए।
संजू सैमसन की 57 रन की पारी ने उन्हें अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 में फिर सुर्खियों में ला दिया। लेकिन मैच के बाद उनका बयान उनकी बल्लेबाजी जितना ही महत्वपूर्ण रहा।
उन्होंने आलोचना के असर को स्वीकार किया, वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की तारीफ की और टीम प्रबंधन के कठिन फैसलों को समझने की बात कही। फिलहाल भारतीय क्रिकेट में सैमसन और वैभव से जुड़ी चर्चा का अगला अध्याय मैदान पर होने वाला प्रदर्शन तय करेगा।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।