📍 नई दिल्ली 🗓️ 18 सितंबर 2026 ✍️Mohd Naved
संजू सैमसन और वैभव सूर्यवंशी के बीच चयन की चर्चा ने भारतीय टी20 क्रिकेट में एक अहम सवाल खड़ा किया है। एक तरफ अनुभवी सैमसन ने अफगानिस्तान के खिलाफ अपनी वापसी को प्रभावशाली बनाया, वहीं दूसरी तरफ युवा वैभव को अंतिम एकादश में मौके के लिए इंतजार करना पड़ा।
मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अब इस पूरे मसले पर अपनी रणनीति स्पष्ट की है। गंभीर के मुताबिक इंग्लैंड दौरे पर सैमसन को बाहर रखने का फैसला उनके कोचिंग कार्यकाल के सबसे मुश्किल फैसलों में रहा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा फॉर्म और टीम के संतुलन के आधार पर चयन में कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।
संजू की वापसी और प्रदर्शन
अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में सैमसन ने प्रभावी वापसी की। उन्होंने सीरीज में 117 रन बनाए और 2 अर्धशतक लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 180 रहा। दूसरे मुकाबले में उन्होंने 22 गेंदों पर 57 रन की तेज पारी खेली, जिससे भारत ने अफगानिस्तान को हराकर सीरीज में निर्णायक बढ़त हासिल की।
इस प्रदर्शन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे पहले सैमसन का प्रदर्शन अपेक्षा के मुताबिक नहीं रहा था। आईसीसी के मुताबिक अफगानिस्तान सीरीज से पहले उनके पिछले 5 टी20 अंतरराष्ट्रीय पारियों के स्कोर 5, 0, 1, 27 और 10 रहे थे। इसके बाद उन्होंने दिल्ली में तेज अर्धशतक के साथ जवाब दिया।
इंग्लैंड दौरे का कठिन फैसला
गंभीर ने कहा कि इंग्लैंड में सैमसन को टीम से बाहर रखना आसान निर्णय नहीं था। उनके मुताबिक विश्व कप जीतने वाली टीम के खिलाड़ियों पर केवल कुछ मैचों की नाकामी के आधार पर भरोसा खत्म करना सही रणनीति नहीं होती।
गंभीर की बातों से यह संकेत मिलता है कि टीम प्रबंधन मौजूदा फॉर्म के साथ पिछले प्रदर्शन और टीम के स्थापित संयोजन को भी चयन प्रक्रिया में महत्व दे रहा है। उन्होंने टी20 क्रिकेट में केवल व्यक्तिगत रन या विकेट के बजाय खिलाड़ी के समग्र प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया।
विश्व कप संयोजन पर भरोसा
गंभीर के अनुसार भारतीय टीम प्रबंधन विश्व कप जीतने वाले संयोजन पर भरोसा बनाए रखने के पक्ष में था। उनका तर्क था कि 2 या 3 मैचों अथवा एक-दो सीरीज की नाकामी से कोई खिलाड़ी अचानक खराब खिलाड़ी नहीं बन जाता।
यह दृष्टिकोण चयन नीति में निरंतरता और मौजूदा फॉर्म के बीच संतुलन की ओर इशारा करता है। सैमसन के मामले में भी टीम प्रबंधन ने वापसी का रास्ता खुला रखा और अफगानिस्तान सीरीज में उन्हें शीर्ष क्रम में इस्तेमाल किया।
वैभव सूर्यवंशी को क्यों करना पड़ा इंतजार?
अफगानिस्तान सीरीज के लिए भारतीय टीम में वैभव सूर्यवंशी भी शामिल थे। बीसीसीआई ने 1 सितंबर को घोषित टीम में उन्हें सैमसन और अभिषेक शर्मा के साथ बल्लेबाजी विकल्प के रूप में रखा था।
लेकिन अंतिम एकादश में सैमसन और अभिषेक को प्राथमिकता मिली। आईसीसी के अनुसार अफगानिस्तान सीरीज में दोनों ने शीर्ष क्रम पर भारत की पारी की शुरुआत की और टीम के प्रमुख रन बनाने वालों में रहे। वैभव को तीनों मुकाबलों में अंतिम एकादश में जगह नहीं मिली।
गंभीर ने वैभव के मामले में उम्र को चयन का स्वतः आधार नहीं माना। उन्होंने संकेत दिया कि टीम में पहले से लगातार प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ियों को प्राथमिकता मिलना स्वाभाविक है। उनके मुताबिक वैभव की प्रतिभा से टीम प्रबंधन परिचित है, लेकिन सही अवसर आने तक उन्हें इंतजार करना होगा।
15 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट
वैभव सूर्यवंशी भारतीय क्रिकेट के सबसे कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण करने वाले खिलाड़ियों में प्रमुख नाम बन चुके हैं। आईसीसी के मुताबिक उन्होंने जुलाई 2026 में इंग्लैंड के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड में टी20 अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया था। उस समय उनकी उम्र 15 साल और 99 दिन थी।
इससे पहले उन्होंने अंडर-19 विश्व कप 2026 में 439 रन बनाए थे। फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 80 गेंदों पर 175 रन की पारी खेली थी। बाद में जिम्बाब्वे दौरे पर भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया।
इंग्लैंड में संघर्ष के बाद जिम्बाब्वे में वापसी
वैभव का अंतरराष्ट्रीय सफर पूरी तरह एकतरफा नहीं रहा। आईसीसी ने दर्ज किया है कि इंग्लैंड के खिलाफ पदार्पण के दौरान उन्हें संघर्ष करना पड़ा, लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे के खिलाफ उन्होंने अपनी लय हासिल की।
यही वजह है कि उनके प्रदर्शन और भविष्य को लेकर चर्चा लगातार बनी हुई है। हालांकि अफगानिस्तान सीरीज में टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम एकादश में उतारने के बजाय मौजूदा शीर्ष क्रम पर भरोसा किया।
अभिषेक शर्मा ने भी मजबूत किया दावा
अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में अभिषेक शर्मा ने 30 गेंदों पर शतक बनाया। आईसीसी के मुताबिक यह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीसरा सबसे तेज शतक था। भारत ने इस मुकाबले में 127 रन से जीत दर्ज की और सीरीज में क्लीन स्वीप किया।
ऐसे प्रदर्शन के बाद शीर्ष क्रम में बदलाव करना टीम प्रबंधन के लिए आसान नहीं होता। सैमसन और अभिषेक दोनों के प्रभावी प्रदर्शन ने वैभव के लिए तत्काल अवसर की गुंजाइश सीमित कर दी।
आगे क्या है वैभव के सामने?
बीसीसीआई की 16 सितंबर को घोषित आगामी वेस्टइंडीज सीरीज की टी20 टीम में भी वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन दोनों शामिल हैं। इसका मतलब है कि वैभव के लिए अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अगला मौका अभी खुला हुआ है।
इसके अलावा वैभव भारत की 2026 एशियन गेम्स टीम का भी हिस्सा हैं। आईसीसी के अनुसार पुरुष क्रिकेट प्रतियोगिता 24 सितंबर से 3 अक्टूबर तक जापान में होगी।
टीम चयन में असली चुनौती
मौजूदा स्थिति को केवल संजू सैमसन बनाम वैभव सूर्यवंशी की प्रतिस्पर्धा के तौर पर देखना अधूरा होगा। भारतीय टीम के पास शीर्ष क्रम में कई विकल्प हैं और चयन का सवाल टीम संतुलन, मौजूदा फॉर्म, अनुभव और भविष्य की जरूरतों से जुड़ा है।
गंभीर के बयान से यह स्पष्ट है कि टीम प्रबंधन तत्काल प्रदर्शन और लंबे समय की योजना दोनों को ध्यान में रख रहा है। वैभव के लिए चुनौती यह होगी कि जब अवसर मिले, तब वह अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन के सामने अपना दावा मजबूत करें।
संजू सैमसन की अफगानिस्तान सीरीज में वापसी ने उनके चयन को लेकर चल रही बहस को फिलहाल नया संदर्भ दिया है। वहीं वैभव सूर्यवंशी के लिए मौजूदा इंतजार उनके अंतरराष्ट्रीय सफर का एक स्वाभाविक हिस्सा बन गया है।
गौतम गंभीर का संदेश स्पष्ट है कि भारतीय टीम में जगह केवल प्रतिभा या उम्र के आधार पर तय नहीं होगी। मौजूदा प्रदर्शन, टीम संयोजन और सही समय पर अवसर का इस्तेमाल चयन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाएगा। आने वाली टी20 सीरीज और एशियन गेम्स यह बताएंगे कि वैभव को अगला मौका कब और किस भूमिका में मिलता है।
Shah Times Reporter
शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।