बरसात के मौसम में भूलकर भी न खाएं ये चीजें, बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
मानसून में खानपान की छोटी भूल पड़ सकती है भारी, रहें सतर्क
बरसात में इन खाद्य पदार्थों से बढ़ सकता है फूड इंफेक्शन का जोखिम
बरसात का मौसम अपने साथ ताजगी लेकर आता है, लेकिन यही मौसम संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों के लिए भी अनुकूल माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान खानपान में थोड़ी-सी लापरवाही फूड इंफेक्शन, पेट संबंधी समस्याओं और मौसमी बीमारियों का कारण बन सकती है। ऐसे में सुरक्षित और स्वच्छ भोजन का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
📍 स्थान: भारत
📰 दिनांक: 31 जुलाई 2026
✍️ नीलम सैनी
मानसून का मौसम और बढ़ता संक्रमण का खतरा
बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह मौसम कई प्रकार के संक्रमणों के लिए अनुकूल परिस्थितियां भी पैदा करता है। हवा में बढ़ी नमी, तापमान में उतार-चढ़ाव और खाद्य पदार्थों में तेजी से होने वाली बैक्टीरिया की वृद्धि हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ मानसून के दौरान खानपान में विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस मौसम में केवल यह मायने नहीं रखता कि आप क्या खा रहे हैं, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि आपका भोजन कितना स्वच्छ, ताजा और सुरक्षित है।
मानसून में भोजन जल्दी क्यों होता है खराब?
बरसात के मौसम में वातावरण में नमी का स्तर बढ़ जाता है। यह स्थिति बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने के लिए अनुकूल मानी जाती है। यदि भोजन को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा जाए तो उसमें संक्रमण पैदा करने वाले सूक्ष्मजीव तेजी से विकसित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में फूड पॉइजनिंग, डायरिया, गैस्ट्रोएंटेराइटिस और पेट से जुड़ी अन्य समस्याओं के मामले अपेाकृत अधिक देखने को मिल सकते हैं। इसलिए भोजन को सुरक्षित तापमान पर रखना और स्वच्छता का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
कटी हुई और लंबे समय से रखी हुई फल-सब्जियों से रखें दूरी
बरसात के मौसम में सड़क किनारे बिकने वाले पहले से कटे हुए फल और सलाद संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। खुले वातावरण में रखे जाने के कारण इनमें बैक्टीरिया और धूल-मिट्टी आसानी से पहुंच सकती है। घर पर भी लंबे समय तक कटे हुए फलों को बिना रेफ्रिजरेशन के रखना उचित नहीं माना जाता। विशेषज्ञ ताजे और अच्छी तरह धोए गए फलों के सेवन की सलाह देते हैं।
पत्तेदार सब्जियों के सेवन में बरतें सावधानी
मानसून के दौरान पत्तेदार सब्जियों में मिट्टी, कीटाणुओं और छोटे कीड़ों के मौजूद रहने की संभावना बढ़ जाती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए, बल्कि इन्हें अच्छी तरह साफ करके और पूरी तरह पकाकर खाना अधिक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। कई पोषण विशेषज्ञों का मानना है कि कच्ची पत्तेदार सब्जियों के बजाय इन्हें अच्छी तरह पकाकर खाना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है।
स्ट्रीट फूड बन सकता है परेशानी की वजह
बरसात के मौसम में गोलगप्पे, चाट, कटे हुए फल और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ आकर्षक लग सकते हैं, लेकिन इनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाला पानी और स्वच्छता का स्तर हमेशा सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। विशेष रूप से खुले में रखी चटनियां और पानी आधारित खाद्य पदार्थ संक्रमण का कारण बन सकते हैं। यदि आप स्ट्रीट फूड का सेवन करना चाहते हैं तो स्वच्छता और भोजन की ताजगी को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
बासी और बार-बार गर्म किया हुआ भोजन
मानसून के दौरान लंबे समय तक रखा हुआ भोजन बैक्टीरिया की वृद्धि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकता है। कई बार लोग बचे हुए भोजन को बार-बार गर्म करके उसका सेवन करते हैं, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि भोजन को आवश्यकतानुसार ही पकाएं और यदि उसे संग्रहित करना हो तो उचित तापमान पर सुरक्षित रखें। लंबे समय तक बाहर रखा हुआ भोजन खाने से बचना बेहतर विकल्प हो सकता है।
समुद्री खाद्य पदार्थों के सेवन को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मानसून के दौरान कुछ क्षेत्रों में समुद्री जीवों के प्रजनन का समय माना जाता है। इसी कारण कई स्थानों पर मछली पकड़ने पर अस्थायी प्रतिबंध भी लगाए जाते हैं। यदि समुद्री खाद्य पदार्थ ताजे और सुरक्षित तरीके से संरक्षित न हों तो इनके सेवन से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, यह कहना उचित नहीं होगा कि मानसून में सभी प्रकार के समुद्री खाद्य पदार्थ पूरी तरह वर्जित हैं। यदि वे प्रमाणित स्रोत से लिए गए हों, उचित तापमान पर संरक्षित हों और अच्छी तरह पकाए गए हों, तो उनका सेवन अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जा सकता है।
क्या दही और ठंडी चीजें बिल्कुल नहीं खानी चाहिए?
यह एक आम धारणा है कि बरसात में दही या ठंडी चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह सभी लोगों पर समान रूप से लागू नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति को बार-बार गले में संक्रमण, एलर्जी या पाचन संबंधी समस्या होती है तो उसे चिकित्सकीय सलाह के अनुसार खानपान अपनाना चाहिए। दही एक पौष्टिक खाद्य पदार्थ है, लेकिन उसकी गुणवत्ता, ताजगी और सेवन का तरीका महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए किसी भी खाद्य पदार्थ को लेकर अतिरंजित दावे करने के बजाय व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखना अधिक उचित है।
सुरक्षित खानपान क्यों है सबसे बड़ी सुरक्षा?
मानसून में केवल भोजन का चुनाव ही नहीं, बल्कि उसे तैयार करने और संग्रहित करने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। हाथों की स्वच्छता, साफ पानी का उपयोग और भोजन को ढककर रखना संक्रमण से बचाव के महत्वपूर्ण उपाय माने जाते हैं। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि भोजन की गंध, रंग या स्वाद में किसी प्रकार का बदलाव महसूस हो तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए। थोड़ी-सी सावधानी कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है।
मानसून में सेहत का सबसे बड़ा मंत्र
बरसात का मौसम आनंद और सुकून का मौसम है, लेकिन यह हमें अपनी दिनचर्या और खानपान के प्रति अधिक सजग रहने का संदेश भी देता है। संक्रमण का खतरा केवल किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं, बल्कि असुरक्षित और अस्वच्छ खानपान की आदतों से बढ़ता है।
इसलिए मानसून में ताजा, स्वच्छ और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें। यदि आप बाहर का भोजन कर रहे हैं तो उसकी गुणवत्ता और स्वच्छता पर अवश्य ध्यान दें। छोटी-छोटी सावधानियां न केवल आपको संक्रमण से बचा सकती हैं, बल्कि पूरे मौसम आपकी सेहत की बेहतर सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकती हैं।