बरसात में बढ़ता है फूड पॉइजनिंग का खतरा, ऐसे करें बचाव
मानसून में खाने-पीने में बरतें सावधानी, फूड पॉइजनिंग से रहेंगे सुरक्षित
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बरसात के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में दूषित भोजन या पानी के सेवन से फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। थोड़ी-सी सावधानी अपनाकर इस समस्या से बचा जा सकता है।
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📍 Location: भारत
📰 Date: 12 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini
बरसात के मौसम में फूड पॉइजनिंग से कैसे बचाव करें?
मानसून में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
बरसात का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं यह कई संक्रामक बीमारियों और फूड पॉइजनिंग का जोखिम भी बढ़ा देता है। हवा में बढ़ी नमी और तापमान में बदलाव के कारण भोजन में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनप सकते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में थोड़ी-सी लापरवाही भी स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में बाहर का अस्वच्छ भोजन, लंबे समय तक रखा हुआ खाना और दूषित पानी फूड पॉइजनिंग के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों में इसका खतरा अधिक रहता है।
फूड पॉइजनिंग क्या है?
फूड पॉइजनिंग वह स्थिति है जिसमें दूषित भोजन या पेय पदार्थ के सेवन से शरीर में संक्रमण या विषैले तत्व प्रवेश कर जाते हैं। इसके कारण पेट और आंतों पर असर पड़ता है और व्यक्ति अचानक बीमार महसूस करने लगता है।
शुरुआती लक्षणों को पहचानना जरूरी
फूड पॉइजनिंग के लक्षण कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। इनमें मतली, उल्टी, दस्त, पेट में ऐंठन, बुखार, कमजोरी, सिरदर्द और शरीर में पानी की कमी शामिल हो सकती है। यदि उल्टी या दस्त लगातार हो रहे हों या मल में खून दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ताजा और गर्म भोजन का करें सेवन
मानसून में हमेशा ताजा बना हुआ और अच्छी तरह पका भोजन खाना बेहतर माना जाता है। लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा भोजन बैक्टीरिया के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। बचा हुआ खाना दोबारा खाने से पहले उसे अच्छी तरह गर्म करना जरूरी है।
सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थों से रखें दूरी
बरसात के मौसम में खुले में बिकने वाले कटे फल, चाट, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड आसानी से धूल, मक्खियों और दूषित पानी के संपर्क में आ सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो, स्वच्छ और भरोसेमंद स्थान से ही भोजन करें।
साफ पानी पीना है सबसे जरूरी
दूषित पानी भी फूड पॉइजनिंग का बड़ा कारण बन सकता है। हमेशा उबला हुआ, फ़िल्टर किया हुआ या पैक्ड पीने योग्य पानी ही इस्तेमाल करें। यदि पानी की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसे उबालकर ही पिएं।
हाथों की सफाई को न करें नजरअंदाज
खाना बनाने से पहले, खाने से पहले और शौचालय के बाद साबुन से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। साफ हाथ कई प्रकार के बैक्टीरिया और वायरस के संक्रमण का खतरा कम कर सकते हैं।
फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोएं
कच्चे फल और सब्जियों को उपयोग से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। यदि संभव हो तो उन्हें बहते पानी में धोकर ही काटें। इससे उन पर मौजूद गंदगी और सूक्ष्म जीवों का जोखिम कम होता है।
रसोई की स्वच्छता भी उतनी ही महत्वपूर्ण
रसोई की सतह, चाकू, कटिंग बोर्ड और बर्तनों को साफ रखना जरूरी है। कच्चे मांस और तैयार भोजन के लिए अलग-अलग बर्तनों का उपयोग करना क्रॉस-कंटैमिनेशन के खतरे को कम करता है।
कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
यदि दस्त और उल्टी 24 घंटे से अधिक समय तक जारी रहें, तेज बुखार हो, शरीर में पानी की गंभीर कमी महसूस हो, चक्कर आएं या रोगी बच्चा, बुजुर्ग या गर्भवती महिला हो, तो बिना देर किए चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। समय पर इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।
निष्कर्ष
बरसात के मौसम में फूड पॉइजनिंग से बचाव के लिए केवल दवा ही नहीं, बल्कि स्वच्छता, सुरक्षित भोजन और साफ पानी सबसे प्रभावी उपाय हैं। मानसून के दौरान छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल फूड पॉइजनिंग बल्कि कई अन्य मौसमी संक्रमणों से भी बचा जा सकता है।