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बरसात में खान-पान: किन चीजों से करें परहेज़, जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

Neelam Saini 2026-07-08 15:11:34
बरसात में खान-पान: किन चीजों से करें परहेज़, जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स
मानसून के मौसम में नमी, दूषित पानी और बैक्टीरिया के बढ़ते प्रभाव के कारण संक्रमण और पाचन संबंधी बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस दौरान कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज़ और स्वच्छ भोजन का चयन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

📍 Location: भारत

📰 Date: 08 जुलाई 2026

✍️ Byline: Neelam Saini


बरसात में खान-पान: छोटी लापरवाही भी बढ़ा सकती है बीमारी का जोखिम

मानसून में बढ़ जाती हैं स्वास्थ्य चुनौतियाँ

बरसात में परहेज़ केवल एक पारंपरिक सलाह नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं। यही वजह है कि इस मौसम में फ़ूड पॉइज़निंग, डायरिया, टाइफाइड, हैजा और पेट के संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस मौसम में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय सुरक्षित भोजन और साफ़ पानी को प्राथमिकता देना अधिक प्रभावी रणनीति है। खान-पान में थोड़ी सी सावधानी कई गंभीर बीमारियों से बचाव कर सकती है।

स्ट्रीट फूड क्यों बन सकता है जोखिम

बरसात के दौरान खुले में बिकने वाला भोजन धूल, गंदे पानी और सूक्ष्म जीवों के संपर्क में अधिक रहता है। गोलगप्पे, चाट, कटे हुए फल और खुले स्नैक्स जैसी चीज़ों में संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हालाँकि सभी विक्रेता अस्वच्छ परिस्थितियों में काम करते हैं, ऐसा मान लेना उचित नहीं होगा। यदि किसी स्थान पर स्वच्छता के मानकों का पालन किया जा रहा हो तो जोखिम कम हो सकता है, लेकिन विशेषज्ञ फिर भी सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

हरी पत्तेदार सब्ज़ियों पर क्यों दी जाती है अतिरिक्त सावधानी

मानसून में पालक, मेथी, सरसों और अन्य पत्तेदार सब्ज़ियों पर मिट्टी, कीड़े और सूक्ष्म जीव अधिक चिपके रह सकते हैं। यदि इन्हें अच्छी तरह धोए बिना पकाया जाए तो संक्रमण की संभावना बढ़ सकती है। इसका अर्थ यह नहीं कि पत्तेदार सब्ज़ियाँ पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए। यदि इन्हें साफ़ पानी से कई बार धोकर और अच्छी तरह पकाकर खाया जाए तो पोषण के साथ सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।

कच्चे सलाद और कटे फलों पर क्या कहती है विशेषज्ञों की राय

कच्चे सलाद और पहले से कटे हुए फलों में बैक्टीरिया पनपने की आशंका अधिक रहती है, विशेषकर तब जब उन्हें लंबे समय तक खुले वातावरण में रखा गया हो। घर पर ताज़े फल धोकर तुरंत खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है। बाहर पहले से कटे हुए फल खरीदने से बचना बेहतर विकल्प हो सकता है।

समुद्री भोजन और अधपका मांस क्यों हो सकता है ख़तरनाक

मानसून के दौरान समुद्री खाद्य पदार्थ जल्दी खराब हो सकते हैं यदि कोल्ड चेन सही तरीके से बनाए न रखी जाए। अधपका मांस और मछली बैक्टीरियल संक्रमण का कारण बन सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मांसाहारी भोजन हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही खाया जाए। इससे संक्रमण का जोखिम काफ़ी हद तक कम किया जा सकता है।

बासी भोजन से क्यों बनानी चाहिए दूरी

बरसात के मौसम में भोजन अपेक्षाकृत जल्दी खराब हो सकता है। यदि पका हुआ खाना लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा जाए तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। यदि भोजन को दोबारा उपयोग करना हो तो उसे उचित तापमान पर सुरक्षित रखने और अच्छी तरह गर्म करने के बाद ही सेवन करना चाहिए।

तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन

बरसात में पाचन तंत्र अपेक्षाकृत संवेदनशील हो सकता है। अत्यधिक तला-भुना और मसालेदार भोजन गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। हालाँकि स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार सीमित मात्रा में ऐसा भोजन ले सकते हैं, लेकिन जिन लोगों को पहले से पाचन संबंधी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

दूषित पानी सबसे बड़ा ख़तरा

मानसून में जलजनित बीमारियाँ सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। दूषित पानी के माध्यम से कई प्रकार के संक्रमण फैल सकते हैं। विशेषज्ञ उबला हुआ, फ़िल्टर किया हुआ या सुरक्षित पैकेज्ड पानी पीने की सलाह देते हैं। बर्फ का उपयोग भी केवल स्वच्छ पानी से बनी होने पर ही सुरक्षित माना जाता है।

क्या दही और दूध से पूरी तरह परहेज़ करना चाहिए?

सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि बरसात में दही बिल्कुल नहीं खाना चाहिए। उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस दावे का पूर्ण समर्थन नहीं करते। यदि दही ताज़ा हो, सही तरीके से संग्रहित किया गया हो और व्यक्ति को उससे कोई स्वास्थ्य समस्या न हो, तो सीमित मात्रा में इसका सेवन सामान्यतः सुरक्षित माना जाता है। यही बात दूध और दुग्ध उत्पादों पर भी लागू होती है।

निष्कर्ष

बरसात में परहेज़ का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं बल्कि संक्रमण के जोखिम को कम करना है। स्वच्छ भोजन, सुरक्षित पानी, ताज़ा खाद्य पदार्थ और संतुलित आहार मानसून में स्वस्थ रहने की सबसे प्रभावी रणनीति माने जाते हैं। मौसम बदलने के साथ खान-पान की आदतों में भी विवेकपूर्ण बदलाव आवश्यक है। छोटी-छोटी सावधानियाँ न केवल बीमारी से बचा सकती हैं बल्कि पूरे परिवार की सेहत को भी सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।


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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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