गुरुवार, 09 July 2026
GOLD ₹0 ▼ 0%
SENSEX 0 ▼ 0%
BITCOIN $0 ▼ 0%
38°C मुजफ्फरनगर
EDITION:
BREAKING
#ShahTimes #Muzaffarnagar #Bijnor #Moradabad #BreakingNews #Politics #Education #Crime #Sports #Business
SmarterASP.NET Hosting
Health

खड़े होकर पानी पीना: क्या यह आदत सेहत के लिए सही है? जानिए वैज्ञानिक कारण?

Neelam Saini 2026-07-09 12:59:34
खड़े होकर पानी पीना: क्या यह आदत सेहत के लिए सही है? जानिए वैज्ञानिक कारण?

खड़े होकर पानी पीने को लेकर लंबे समय से अनेक पारंपरिक धारणाएं प्रचलित हैं। हालांकि उपलब्ध वैज्ञानिक शोध यह स्पष्ट नहीं करते कि केवल खड़े होकर पानी पीना स्वयं में नुकसानदायक है। वास्तविक महत्व पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धीरे-धीरे पीने और शरीर की जरूरत के अनुसार हाइड्रेशन बनाए रखने का है।


📍 Location: भारत
📰 Date: 9 जुलाई 2026
✍️ Byline: Neelam Saini

खड़े होकर पानी पीना: परंपरा और विज्ञान के बीच की सच्चाई?

खड़े होकर पानी पीना भारतीय समाज में वर्षों से चर्चा का विषय रहा है। अक्सर यह कहा जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से घुटनों पर असर पड़ता है, पाचन तंत्र प्रभावित होता है, किडनी को नुकसान पहुंचता है या पानी सीधे पेट से गुजर जाता है। सोशल मीडिया और डिजिटल मीडिया पर भी ऐसे दावे बार-बार सामने आते रहते हैं। लेकिन जब इन दावों का फैक्ट-चेक किया जाता है तो तस्वीर कुछ अलग दिखाई देती है। चिकित्सा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थानों के उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि केवल खड़े होकर पानी पीना किसी गंभीर बीमारी का प्रत्यक्ष कारण बनता है। इसका मतलब यह नहीं कि पानी पीने का तरीका बिल्कुल महत्वहीन है, बल्कि यह समझना ज़रूरी है कि सही हाइड्रेशन किन बातों पर निर्भर करता है।

क्या कहता है वैज्ञानिक नज़रिया

अब तक प्रकाशित अधिकांश वैज्ञानिक रिसर्च में ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि खड़े होकर पानी पीने से किडनी खराब होती है, गठिया बढ़ता है या पाचन तंत्र स्थायी रूप से प्रभावित हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शरीर पानी को पाचन तंत्र के माध्यम से सामान्य जैविक प्रक्रिया के अनुसार अवशोषित करता है। व्यक्ति बैठा हो या खड़ा, शरीर की यह प्रक्रिया मूल रूप से समान रहती है। इसलिए केवल शरीर की मुद्रा को नुकसान का मुख्य कारण मानना वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उचित नहीं माना जाता। हालांकि कुछ डॉक्टर यह सलाह देते हैं कि यदि व्यक्ति आराम से बैठकर और धीरे-धीरे पानी पीता है तो वह अधिक सहजता से पानी पी पाता है और जरूरत से ज्यादा तेजी से पानी पीने की संभावना भी कम रहती है।

धीरे-धीरे पानी पीना क्यों बेहतर माना जाता है

विशेषज्ञ इस बात पर अपेक्षाकृत अधिक सहमत हैं कि पानी को एक ही बार में तेजी से गटकने के बजाय धीरे-धीरे पीना अधिक आरामदायक हो सकता है। धीरे पानी पीने से व्यक्ति अपने शरीर की प्यास को बेहतर ढंग से महसूस कर सकता है। बहुत तेजी से पानी पीने पर कुछ लोगों को पेट फूलने, असहजता या अस्थायी भारीपन का अनुभव हो सकता है। यह समस्या खड़े होने की वजह से नहीं बल्कि पानी पीने की गति से जुड़ी हो सकती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर आराम से बैठकर या स्थिर अवस्था में छोटे-छोटे घूंट लेकर पानी पीने की सलाह देते हैं।

आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का अलग दृष्टिकोण

आयुर्वेद में भोजन और पानी पीने के कई नियम बताए गए हैं। वहां बैठकर धीरे-धीरे पानी पीने को बेहतर माना गया है क्योंकि इसे पाचन प्रक्रिया के अनुकूल बताया जाता है।दूसरी ओर आधुनिक चिकित्सा उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर काम करती है। वर्तमान मेडिकल एविडेंस यह नहीं कहता कि खड़े होकर पानी पीना अपने आप में हानिकारक है। इसलिए दोनों दृष्टिकोणों को उनके अपने संदर्भ में समझना आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि कोई व्यक्ति पारंपरिक तरीके से बैठकर पानी पीना पसंद करता है और इससे उसे आराम महसूस होता है तो इसमें कोई नुकसान नहीं है। लेकिन इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध चिकित्सा तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों का तजज़िया

हाल के वर्षों में सोशल मीडिया पर ऐसे अनेक वीडियो वायरल हुए हैं जिनमें दावा किया जाता है कि खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों में दर्द, किडनी फेल होना या हृदय संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इन दावों की समीक्षा करने पर अधिकांश मामलों में विश्वसनीय वैज्ञानिक संदर्भ उपलब्ध नहीं मिलते। कई फैक्ट-चेक संगठनों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी स्पष्ट किया है कि ऐसे दावों को प्रमाणित करने वाला पर्याप्त वैज्ञानिक डेटा मौजूद नहीं है। यही कारण है कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी वायरल नैरेटिव को स्वीकार करने से पहले उसकी क्रेडिबिलिटी और स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए

कुछ परिस्थितियों में पानी पीने का तरीका व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार महत्वपूर्ण हो सकता है। यदि किसी व्यक्ति को निगलने में कठिनाई, न्यूरोलॉजिकल बीमारी, बुजुर्गावस्था या संतुलन संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर बैठकर आराम से पानी पीने की सलाह दे सकते हैं। इसका उद्देश्य गिरने या सांस की नली में पानी जाने जैसी जटिलताओं के जोखिम को कम करना होता है। इसी प्रकार भारी व्यायाम के तुरंत बाद भी एकदम तेजी से अधिक मात्रा में पानी पीने के बजाय धीरे-धीरे पानी लेना बेहतर माना जाता है।

असली चिंता पानी पीने की मुद्रा नहीं, हाइड्रेशन है

विशेषज्ञों के अनुसार अधिकांश लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि वे बैठकर पानी पी रहे हैं या खड़े होकर, बल्कि यह है कि वे दिनभर पर्याप्त पानी पी भी रहे हैं या नहीं। शरीर में पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, चक्कर, कब्ज, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। मौसम, शारीरिक गतिविधि, आयु और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पानी की आवश्यकता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए नियमित अंतराल पर पानी पीना और शरीर की प्यास के संकेतों को समझना कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या भोजन के साथ पानी पीने का भी असर पड़ता है। एक और सामान्य धारणा यह है कि भोजन के दौरान पानी पीना पाचन को खराब कर देता है। हालांकि वर्तमान वैज्ञानिक शोध इस दावे का भी स्पष्ट समर्थन नहीं करते। विशेषज्ञों का कहना है कि सामान्य मात्रा में पानी भोजन के साथ या भोजन के आसपास पीना अधिकांश स्वस्थ लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है। बल्कि कई मामलों में यह भोजन को निगलने और पाचन प्रक्रिया में भी सहायता कर सकता है। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को विशेष गैस्ट्रिक या पाचन संबंधी बीमारी है तो उसे अपने चिकित्सक की व्यक्तिगत सलाह का पालन करना चाहिए।

स्वस्थ जीवनशैली का व्यापक परिप्रेक्ष्य

सिर्फ पानी पीने की मुद्रा बदल देने से स्वास्थ्य में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद करना वास्तविकता से दूर हो सकता है। बेहतर स्वास्थ्य संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और पर्याप्त हाइड्रेशन जैसे अनेक कारकों के संयुक्त प्रभाव से बनता है। इसीलिए चिकित्सा विशेषज्ञ किसी एक आदत को चमत्कारी समाधान या गंभीर खतरे के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय समग्र जीवनशैली पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।

निष्कर्ष

खड़े होकर पानी पीना विषय पर वर्षों से चली आ रही मान्यताओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन यह बताता है कि केवल खड़े होकर पानी पीना गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सिद्ध कारण नहीं है। वर्तमान मेडिकल एविडेंस इस दावे की पुष्टि नहीं करता कि इससे किडनी, घुटनों या पाचन तंत्र को प्रत्यक्ष नुकसान पहुंचता है। फिर भी आराम से बैठकर, धीरे-धीरे और आवश्यकता के अनुसार पानी पीना कई लोगों के लिए अधिक सहज और व्यावहारिक तरीका हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे, क्योंकि स्वस्थ जीवन की असली बुनियाद सही हाइड्रेशन और संतुलित जीवनशैली में छिपी है।

ADVERTISEMENT
Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

BREAKING NEWS

संबंधित खबरें

सौंफ का पानी: क्या रोज़ाना सेवन से पाचन, वज़न और सेहत पर पड़ता है सकारात्मक असर?

2026-07-08 15:20:43

बरसात में खान-पान: किन चीजों से करें परहेज़, जानिए क्या कहते हैं हेल्थ एक्सपर्ट्स

2026-07-08 15:11:34

सुबह खाली पेट पपीता खाना कितना फायदेमंद? जानिए इसके लाभ, सावधानियां और सही मात्रा

2026-07-08 12:19:56

हीटवेव में पुदीना डाइट का कितना असरदार साथी, जानिए क्या कहती है रिसर्च

2026-06-30 08:05:27

मानसिक विकास के लिए सही आहार कितना ज़रूरी, जानिए कौन से फूड्स बन सकते हैं ब्रेन के सबसे बड़े साथी?

2026-07-08 12:44:46

गर्मियों में कॉफी का सेवन: सेहत के लिए फायदेमंद या बढ़ा सकता है डिहाइड्रेशन का खतरा?

2026-06-20 11:36:29

बारिश का मौसम बीमारियों को भी देता है निमंत्रण, जानिए संक्रमण से बचाव के असरदार उपाय?

2026-07-09 12:19:56

बरसात में बाल झड़ना क्यों बढ़ जाता है, हेयर फॉल रोकने के असरदार उपाय जानिए

2026-07-09 11:58:05

TRENDING

ताज़ा ख़बरें
BREAKING NEWS
ADVERTISEMENT

Your Ad Here
TRENDING
आज का ई-पेपर
मुजफ्फरनगर (12 पेज)
बिजनौर (10 पेज)
सहारनपुर (11 पेज)
मुरादाबाद (14 पेज)
Home Video Epaper Reel Menu
Chat With Us
SHAH TIMES
ख़बरें छुपाता नहीं, छापता है
🏠 होम ⚡ ब्रेकिंग न्यूज़ 📰 ताज़ा खबरें 🇮🇳 देश 🌍 दुनिया 🏛 राजनीति 🚔 क्राइम 📈 बिजनेस 🏏 स्पोर्ट्स 🎓 शिक्षा ❤️ स्वास्थ्य 📰 ई-पेपर