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बरसात में पेड़-पौधों की देखभाल क्यों है जरूरी? जानिए आसान उपाय

Neelam Saini • 2026-07-14 12:54:12
बरसात में पेड़-पौधों की देखभाल क्यों है जरूरी? जानिए आसान उपाय

बारिश में ऐसे रखें पेड़-पौधों का ख्याल, रहेंगे हमेशा हरे-भरे

मानसून में पौधों की देखभाल के आसान तरीके, जानिए विशेषज्ञों की सलाह

बरसात में पौधों को बचाने के लिए अपनाएं ये जरूरी उपाय

मानसून पौधों की तेज़ वृद्धि का मौसम माना जाता है, लेकिन यही समय फंगल रोग, जलभराव और कीटों के बढ़ने का भी होता है। सही सिंचाई, जल निकासी, छंटाई और नियमित निगरानी अपनाकर पौधों को स्वस्थ रखा जा सकता है।

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📍 Location: भारत
📰 Date: 13 जुलाई 2026
✍️ Neelam Saini

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बरसात के मौसम में कैसे रखें अपने पेड़-पौधों का ख्याल?

मानसून का मौसम हरियाली लेकर आता है। इस दौरान अधिकांश पेड़-पौधे तेजी से बढ़ते हैं, नई पत्तियां निकलती हैं और बगीचे की सुंदरता बढ़ जाती है। लेकिन लगातार बारिश, अधिक नमी और जलभराव कई बार पौधों के लिए परेशानी भी बन जाते हैं। यदि समय रहते सही देखभाल न की जाए तो पौधों में फंगल संक्रमण, जड़ों का सड़ना और कीटों का हमला शुरू हो सकता है। बागवानी विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के मौसम में पौधों की देखभाल का तरीका गर्मियों और सर्दियों से अलग होता है। इस मौसम में केवल पानी देना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि मिट्टी, जल निकासी और पौधों की नियमित निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।

जलभराव से बचाना सबसे पहली जिम्मेदारी

लगातार बारिश के कारण गमलों या क्यारियों में पानी भर जाना आम बात है। यदि पानी लंबे समय तक जड़ों के आसपास जमा रहता है तो ऑक्सीजन की कमी के कारण जड़ें सड़ने लगती हैं। यही वजह है कि विशेषज्ञ गमलों के ड्रेनेज होल हमेशा खुले रखने की सलाह देते हैं। यदि पौधे खुले मैदान में लगे हैं तो अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था करना भी जरूरी है।

जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचें

बरसात में अक्सर लोग आदत के अनुसार पौधों को रोज पानी देते रहते हैं। जबकि इस मौसम में कई बार बारिश ही पौधों की पानी की जरूरत पूरी कर देती है। मिट्टी की ऊपरी परत को देखकर ही सिंचाई करें। यदि मिट्टी पहले से नम है तो अतिरिक्त पानी देने से बचें।

फंगल संक्रमण पर रखें नजर

अधिक नमी फफूंद के विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाती है। पत्तियों पर सफेद या काले धब्बे, तनों पर सड़न या पत्तियों का पीला पड़ना फंगल संक्रमण के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में संक्रमित पत्तियों को हटाना और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उपयुक्त जैविक या स्वीकृत फफूंदनाशक का उपयोग करना बेहतर माना जाता है।

पौधों की नियमित छंटाई भी जरूरी

सूखी, पीली और रोगग्रस्त शाखाओं को समय-समय पर हटाने से पौधों में हवा का संचार बेहतर होता है। इससे नमी कम समय तक पत्तियों पर टिकती है और संक्रमण का खतरा भी घट सकता है। घने पौधों की हल्की छंटाई मानसून में काफी लाभदायक मानी जाती है।

कीटों की बढ़ सकती है संख्या

बारिश के मौसम में घोंघे, स्लग, दीमक, एफिड्स और कई अन्य कीट सक्रिय हो जाते हैं। ये पत्तियों और नई टहनियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सप्ताह में कम से कम दो बार पौधों का निरीक्षण करें ताकि शुरुआती अवस्था में ही समस्या पर नियंत्रण पाया जा सके।

पौधों को पोषण भी चाहिए

हालांकि बारिश में पौधे तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन लगातार पानी से मिट्टी के कुछ पोषक तत्व बह भी सकते हैं। इसलिए जरूरत के अनुसार जैविक खाद, वर्मी कम्पोस्ट या अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद का सीमित उपयोग किया जा सकता है। अत्यधिक उर्वरक डालने से बचना चाहिए क्योंकि इससे पौधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

गमलों की सफाई रखें

गमलों के आसपास गिरे हुए पत्ते, खरपतवार और कचरा हटाते रहें। इससे मच्छरों, कीटों और फंगल संक्रमण की संभावना कम होती है तथा पौधों के आसपास स्वच्छ वातावरण बना रहता है।

धूप भी है जरूरी

बारिश के बीच जब भी धूप निकले, पौधों को पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी मिलने दें। लगातार अंधेरा और नमी कई पौधों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है। इनडोर पौधों को भी समय-समय पर ऐसी जगह रखें जहां उन्हें हल्की प्राकृतिक रोशनी मिल सके।

निष्कर्ष

बरसात के मौसम में पेड़-पौधों का ख्याल रखना केवल पानी देने तक सीमित नहीं है। जल निकासी, फंगल संक्रमण से बचाव, नियमित निरीक्षण, संतुलित पोषण और उचित छंटाई जैसे छोटे-छोटे कदम आपके बगीचे को पूरे मानसून में स्वस्थ, हरा-भरा और आकर्षक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सही देखभाल अपनाकर आप अपने पौधों की उम्र और गुणवत्ता दोनों बढ़ा सकते हैं।
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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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