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मख्खन या देसी घी, सेहत के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद? जानिए क्या कहते हैं पोषण विशेषज्ञ

Neelam Saini • 2026-08-31 22:46:50
मख्खन या देसी घी, सेहत के लिए कौन ज्यादा फायदेमंद? जानिए क्या कहते हैं पोषण विशेषज्ञ
मख्खन या देसी घी—किसे चुनना बेहतर?

भारतीय रसोई में मख्खन और देसी घी दोनों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है। पराठे से लेकर दाल, सब्जी और कई पारंपरिक व्यंजनों तक इनका इस्तेमाल स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि रोजमर्रा की डाइट में मख्खन ज्यादा बेहतर है या देसी घी। इसका सीधा जवाब यह है कि घी को मख्खन से हमेशा ज्यादा सेहतमंद या मख्खन को घी से हमेशा बेहतर बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। दोनों में वसा और कैलोरी काफी होती हैं तथा दोनों ही संतृप्त वसा के स्रोत हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन संतृप्त वसा की मात्रा सीमित रखने और उसकी जगह असंतृप्त वसा वाले स्रोतों को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। 

मख्खन और देसी घी में क्या अंतर है?

मख्खन दूध या क्रीम से बनने वाला डेयरी उत्पाद है। इसमें दूध के वसा के साथ कुछ मात्रा में पानी और दूध के अन्य घटक भी मौजूद रहते हैं। दूसरी तरफ, घी को मख्खन या दूध की मलाई से पानी और दूध के ठोस अंशों को काफी हद तक अलग करके तैयार किया जाता है। इसी वजह से घी अधिक केंद्रित वसा वाला खाद्य पदार्थ होता है। यानी दोनों में मुख्य अंतर उनके प्रसंस्करण और संरचना का है, लेकिन दोनों को स्वास्थ्य के लिहाज से असीमित मात्रा में खाना उचित नहीं माना जा सकता।

घी खाने के क्या फायदे हो सकते हैं?

देसी घी ऊर्जा और वसा प्रदान करता है। वसा शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है और शरीर में कुछ विटामिनों के अवशोषण में भी इसकी भूमिका होती है। घी का एक व्यावहारिक लाभ यह है कि यह खाना पकाने में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है और इसका धुआं बिंदु कई सामान्य खाना पकाने की परिस्थितियों के लिए उपयोगी होता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि घी किसी बीमारी का इलाज करता है या अधिक मात्रा में सेवन करने से स्वास्थ्य बेहतर हो जाएगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक घी संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों में शामिल है और संतृप्त वसा की मात्रा सीमित रखना जरूरी है। 

क्या मख्खन भी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है?

मख्खन में भी वसा और ऊर्जा होती है और यह भोजन को स्वाद तथा कुछ पोषण प्रदान करता है। इसमें दूध से प्राप्त वसा के अलावा कुछ मात्रा में अन्य दूध घटक भी हो सकते हैं। लेकिन मख्खन भी संतृप्त वसा का स्रोत है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, बहुत अधिक संतृप्त वसा का सेवन रक्त में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है, जिससे हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए मख्खन को केवल इसलिए ज्यादा स्वस्थ नहीं माना जा सकता क्योंकि वह पारंपरिक खाद्य पदार्थ है।

घी और मख्खन में कौन ज्यादा बेहतर?

अगर सवाल केवल घी बनाम मख्खन का है, तो इसका कोई सार्वभौमिक जवाब नहीं है। दोनों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी है कि व्यक्ति की कुल डाइट कैसी है, वह कितनी मात्रा में इनका सेवन करता है और उसकी स्वास्थ्य जरूरतें क्या हैं।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घी या मख्खन को भोजन में शामिल करते समय मात्रा नियंत्रित रखी जाए।विश्व स्वास्थ्य संगठन की मौजूदा सलाह के अनुसार वयस्कों के कुल ऊर्जा सेवन में संतृप्त वसा १० प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही, संतृप्त वसा की जगह मुख्य रूप से असंतृप्त वसा को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है। 

हृदय की सेहत के लिए क्या ध्यान रखें?

यदि किसी व्यक्ति की डाइट में पहले से ही मख्खन, घी, मलाई, पनीर, पूर्ण वसा वाले डेयरी उत्पाद और वसायुक्त मांस जैसे खाद्य पदार्थ अधिक हैं, तो संतृप्त वसा की कुल मात्रा बढ़ सकती है।अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन हृदय की सेहत के लिए संतृप्त वसा को सीमित करने और उसकी जगह असंतृप्त वसा वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने की सलाह देता है। संस्था कुल कैलोरी के ६ प्रतिशत से कम हिस्से को संतृप्त वसा से लेने का लक्ष्य सुझाती है, जो २,००० कैलोरी वाली डाइट में लगभग १३ ग्राम प्रतिदिन के बराबर है। इसलिए केवल यह तय करना पर्याप्त नहीं है कि घी अच्छा है या मख्खन। पूरे दिन में मिलने वाली कुल संतृप्त वसा पर नजर रखना अधिक महत्वपूर्ण है।

क्या वजन कम करने वालों को घी और मख्खन छोड़ देना चाहिए?

जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति को इन्हें पूरी तरह छोड़ना पड़े। लेकिन वजन नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे व्यक्ति के लिए मात्रा पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।वसा ऊर्जा से भरपूर होती है। इसलिए भोजन में जरूरत से ज्यादा घी या मख्खन शामिल करने से कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों में कुल वसा को आम तौर पर कुल ऊर्जा के ३० प्रतिशत या उससे कम रखने की सलाह देता है, हालांकि व्यक्ति की जरूरत के अनुसार डाइट अलग हो सकती है। ऐसे में रोटी या सब्जी में थोड़ी मात्रा इस्तेमाल करना और साथ में सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता देना अधिक संतुलित तरीका है।

घी को लेकर किन दावों से सावधान रहें?

सोशल मीडिया पर घी को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं—जैसे रोजाना ज्यादा घी खाने से शरीर की हर कमजोरी दूर हो जाती है, वजन तेजी से बढ़ता है या घटता है, अथवा घी कई बीमारियों से बचाता है। ऐसे दावों को बिना वैज्ञानिक प्रमाण के सच नहीं मानना चाहिए। घी पौष्टिक डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह किसी बीमारी की दवा नहीं है। इसी तरह मख्खन को पूरी तरह नुकसानदायक कहना भी उचित नहीं होगा। स्वास्थ्य पर प्रभाव केवल किसी एक खाद्य पदार्थ से नहीं, बल्कि पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ा होता है।

किसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों को पहले से उच्च कोलेस्ट्रॉल, हृदय रोग या वजन से जुड़ी समस्या है, उन्हें अपने भोजन में घी और मख्खन की मात्रा को लेकर चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से व्यक्तिगत सलाह लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में स्वयं इंटरनेट पर पढ़ी जानकारी के आधार पर घी या मख्खन की मात्रा अचानक बढ़ाना उचित नहीं है। खासकर अगर व्यक्ति की डाइट में पहले से कई संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं, तो पूरे आहार का मूल्यांकन ज्यादा उपयोगी रहेगा।

खाना पकाने के लिए कौन सा विकल्प बेहतर?

घी और मख्खन के बीच चुनाव केवल स्वास्थ्य के आधार पर करने की जरूरत नहीं है। स्वाद, व्यंजन और खाना पकाने की जरूरत भी मायने रखती है।लेकिन यदि उद्देश्य हृदय के लिए अधिक अनुकूल वसा का चुनाव करना है, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन और अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन दोनों संतृप्त वसा की जगह असंतृप्त वसा वाले विकल्पों को प्राथमिकता देने की दिशा में सलाह देते हैं। सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, कैनोला या जैतून जैसे पौधों से प्राप्त तेलों में असंतृप्त वसा अधिक हो सकती है, हालांकि किसी भी तेल का अत्यधिक सेवन उचित नहीं है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी तरल, गैर-उष्णकटिबंधीय वनस्पति तेलों को ठोस वसा की तुलना में बेहतर विकल्पों में रखता है। 

तो रोज कितना घी या मख्खन खाना चाहिए?

यह मात्रा हर व्यक्ति के लिए समान नहीं हो सकती। उम्र, कुल कैलोरी जरूरत, शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य स्थिति और पूरी डाइट को ध्यान में रखना जरूरी है।इसलिए बिना व्यक्तिगत जरूरत जाने किसी एक निश्चित मात्रा को सभी लोगों के लिए “सही” बताना उचित नहीं होगा।बेहतर तरीका यह है कि घी या मख्खन को स्वाद और भोजन का हिस्सा मानें, मुख्य पोषण स्रोत नहीं।

निष्कर्ष

मख्खन और देसी घी दोनों भारतीय भोजन का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी एक को हर व्यक्ति के लिए ज्यादा फायदेमंद कहना सही नहीं है। दोनों में संतृप्त वसा होती है और अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से ज्यादा अहम यह है कि कुल संतृप्त वसा सीमित रहे और उसकी जगह असंतृप्त वसा वाले स्रोतों को डाइट में प्राथमिकता मिले। संतुलित भोजन, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाइट तय करना किसी एक खाद्य पदार्थ को “सुपरफूड” मानने से ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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Neelam Saini

Neelam Saini

Shah Times Reporter

शाह टाइम्स के वरिष्ठ संवाददाता। स्थानीय, राजनीतिक, अपराध, शिक्षा एवं सामाजिक विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग।

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