कोल्ड ड्रिंक सेहत के लिए क्यों है नुकसानदायक? जानिए असर
रोज़ कोल्ड ड्रिंक पीने की आदत पड़ सकती है भारी, जानिए वजह
कोल्ड ड्रिंक से बढ़ सकता है वजन और डायबिटीज का जोखिम, जानिए क्यों
कोल्ड ड्रिंक स्वाद और ताज़गी के लिए लोकप्रिय है, लेकिन नियमित सेवन चिंता का विषय बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मुफ्त शर्करा सीमित करने की सलाह देता है। शोध में मीठे पेयों का संबंध वजन बढ़ने, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और दांतों की सड़न से पाया गया है।
📍 Location: नई दिल्ली
📰 Date: 8 अगस्त 2026
✍️ Neelam Saini
कोल्ड ड्रिंक सिर्फ प्यास बुझाने वाला पेय नहीं
गर्मियों में ठंडी कोल्ड ड्रिंक का एक गिलास कई लोगों को तुरंत राहत और ताज़गी का एहसास देता है। लेकिन अगर यही आदत रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन जाए, तो सवाल सिर्फ स्वाद का नहीं बल्कि सेहत का भी हो जाता है। खासतौर पर चीनी से भरपूर सॉफ्ट ड्रिंक शरीर को ऐसी अतिरिक्त कैलोरी दे सकते हैं, जिनसे पेट भरने का एहसास उतना नहीं होता जितना ठोस भोजन से होता है। यहां यह समझना भी ज़रूरी है कि हर कार्बोनेटेड पेय को एक ही श्रेणी में रखना सही नहीं होगा। इस लेख में मुख्य चिंता चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक और शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज को लेकर है। इनके नियमित और अधिक सेवन पर उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य स्वास्थ्य संबंधी कई जोखिमों की ओर इशारा करते हैं।
कोल्ड ड्रिंक में छिपी होती है अतिरिक्त चीनी
कोल्ड ड्रिंक से जुड़ी सबसे बड़ी चिंता इसकी अतिरिक्त चीनी है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक 12-औंस की एक सामान्य सोडा कैन में लगभग 42 ग्राम यानी करीब 10 चम्मच अतिरिक्त चीनी हो सकती है। हालांकि अलग-अलग ब्रांड और सर्विंग साइज में मात्रा अलग हो सकती है, इसलिए पैकेज पर दिया गया न्यूट्रिशन लेबल देखना सबसे सही तरीका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की गाइडलाइन के मुताबिक वयस्कों और बच्चों दोनों में फ्री शुगर का सेवन कुल दैनिक ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम रखना चाहिए। संगठन 5 प्रतिशत से नीचे जाने को अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ से जोड़ता है। यहां फ्री शुगर में खाद्य पदार्थों और पेय में जोड़ी गई शर्करा के साथ शहद, सिरप और फलों के रस में मौजूद शर्करा भी शामिल होती है।
कोल्ड ड्रिंक और वजन बढ़ने का संबंध
मीठे पेय की एक अहम समस्या यह है कि इन्हें पीने से मिलने वाली कैलोरी अक्सर भोजन की तरह पेट भरने का एहसास नहीं देती। हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के अनुसार, मीठे पेय में कैलोरी अधिक हो सकती है लेकिन पोषण संबंधी लाभ सीमित रहता है। इस वजह से व्यक्ति पेय से मिली अतिरिक्त कैलोरी के बावजूद सामान्य मात्रा में खाना जारी रख सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अधिक मात्रा में शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज के सेवन को वयस्कों में अस्वास्थ्यकर वजन बढ़ने से जोड़ता है। बच्चों में भी इनके अधिक सेवन और ओवरवेट तथा ओबेसिटी के बीच संबंध पाया गया है।
ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर
मीठी कोल्ड ड्रिंक में मौजूद शर्करा तेजी से शरीर तक पहुंच सकती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, सोडा में मौजूद अतिरिक्त चीनी फाइबर वाले पूरे फल की तुलना में तेजी से अवशोषित होती है, क्योंकि पूरे फल में फाइबर पाचन और शर्करा के अवशोषण को धीमा करता है। लंबे समय तक नियमित रूप से मीठे पेय का अधिक सेवन टाइप-2 डायबिटीज के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा पाया गया है। हार्वर्ड की समीक्षा में भी शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज के नियमित सेवन और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम के बीच संबंध का उल्लेख किया गया है। हालांकि किसी एक व्यक्ति में बीमारी केवल कोल्ड ड्रिंक की वजह से होती है, ऐसा कहना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा; खान-पान, वजन, शारीरिक गतिविधि और आनुवंशिक कारक भी भूमिका निभाते हैं।
दिल की सेहत को लेकर भी चिंता
कोल्ड ड्रिंक की लगातार आदत का असर केवल वजन या ब्लड शुगर तक सीमित नहीं माना जाता। उपलब्ध शोध में शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज के नियमित सेवन और हृदय रोग से जुड़े जोखिम के बीच संबंध सामने आया है। हार्वर्ड की समीक्षा में लंबे समय तक किए गए अध्ययनों का हवाला देते हुए मीठे पेयों के अधिक सेवन को हृदय संबंधी जोखिमों से जोड़ा गया है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी बताता है कि रोजाना मीठे पेय लेने की आदत हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज के बढ़े जोखिम से जुड़ी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि कभी-कभार एक गिलास कोल्ड ड्रिंक पीने से व्यक्ति को तुरंत हृदय रोग हो जाएगा। असली चिंता लंबे समय तक बनी रहने वाली अधिक सेवन की आदत है।
दांतों के लिए भी मीठा पेय चुनौती
कोल्ड ड्रिंक में मौजूद चीनी दांतों के लिए भी परेशानी पैदा कर सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार फ्री शुगर का सेवन डेंटल कैरीज़ यानी दांतों में सड़न का प्रमुख जोखिम कारक है और इस जोखिम को कम करने के लिए फ्री शुगर का सेवन सीमित रखना महत्वपूर्ण है। समस्या केवल एक बार मीठा पेय पीने से नहीं बनती, बल्कि बार-बार मीठे पेय का सेवन दांतों को लंबे समय तक शर्करा के संपर्क में रख सकता है। बच्चों में यह मुद्दा और महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि कम उम्र से मीठे पेय की आदत आगे चलकर उनकी कुल डाइट और स्वाद की पसंद को प्रभावित कर सकती है।
क्या जीरो शुगर कोल्ड ड्रिंक पूरी तरह सुरक्षित है?
यहां एक आम धारणा को चुनौती देना जरूरी है। किसी पेय पर “शुगर-फ्री” या “जीरो शुगर” लिखा होना अपने आप उसे स्वास्थ्यवर्धक पेय नहीं बना देता। ऐसे उत्पादों में आम तौर पर कैलोरी कम हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें असीमित मात्रा में पीना बेहतर विकल्प है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार लो-कैलोरी स्वीटनर वाले पेय कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी कम करने का विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इनके लंबे समय के प्रभाव और व्यक्तिगत उपयोग को लेकर संतुलित दृष्टिकोण जरूरी है। इसलिए रोजाना पानी की जगह किसी मीठे या कृत्रिम रूप से मीठे पेय पर निर्भर रहना आदर्श रणनीति नहीं मानी जानी चाहिए।
क्या कभी-कभार कोल्ड ड्रिंक पीना भी नुकसानदायक है?
यह सवाल अक्सर सामने आता है और इसका जवाब मात्रा तथा सेवन की आवृत्ति पर निर्भर करता है। उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्य मुख्य रूप से नियमित और अधिक मात्रा में शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज के सेवन को स्वास्थ्य जोखिमों से जोड़ते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति द्वारा कभी-कभार लिया गया एक पेय और रोजाना कई बार लिया जाने वाला मीठा पेय एक जैसी स्थिति नहीं है।मसलन, अगर किसी व्यक्ति की रोजाना की आदत में पानी की जगह लगातार मीठे पेय शामिल हैं, तो कुल चीनी और कैलोरी काफी बढ़ सकती है। इसके विपरीत, कभी-कभार सेवन करने वाले व्यक्ति के लिए समग्र डाइट, शारीरिक गतिविधि और कुल चीनी सेवन का आकलन ज्यादा मायने रखता है।
बच्चों के लिए क्यों जरूरी है सावधानी?
बच्चों के खान-पान में मीठे पेयों को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दो साल से कम उम्र के बच्चों को शुगर-स्वीटेंड बेवरेजेज नहीं देना चाहिए। संगठन बच्चों और वयस्कों दोनों में फ्री शुगर का सेवन सीमित रखने की सलाह देता है। बच्चों में कोल्ड ड्रिंक की जगह सादा पानी और बिना अतिरिक्त चीनी वाले विकल्पों को प्राथमिकता देना बेहतर रणनीति हो सकती है। इससे अनावश्यक चीनी और कैलोरी कम करने के साथ दांतों की सेहत पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
कोल्ड ड्रिंक की जगह क्या चुनें?
स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे सरल विकल्प सादा पानी है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी मीठे पेय कम करने के दौरान पानी को डिफॉल्ट विकल्प बनाने की सलाह देता है। स्वाद बदलने के लिए पानी में नींबू या खीरे के टुकड़े डाले जा सकते हैं, जबकि बिना चीनी वाली चाय या अन्य कम-चीनी विकल्प भी कुछ लोगों के लिए उपयोगी हो सकते हैं। कोल्ड ड्रिंक छोड़ना किसी व्यक्ति के लिए अचानक मुश्किल हो सकता है, खासकर जब लंबे समय से इसकी आदत हो। ऐसे में मात्रा धीरे-धीरे कम करना और कम मीठे विकल्प चुनना व्यवहारिक रास्ता हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी मीठे पेय को धीरे-धीरे कम करने की रणनीति सुझाता है।
असली सवाल पेय नहीं, रोज़ की आदत है
कोल्ड ड्रिंक को लेकर चर्चा अक्सर इस सवाल तक सीमित रह जाती है कि यह “अच्छी” है या “बुरी”। लेकिन वैज्ञानिक नज़रिया इससे अधिक व्यापक है। किसी भी खाद्य या पेय पदार्थ के असर को समझने के लिए उसकी मात्रा, सेवन की आवृत्ति, व्यक्ति की कुल डाइट और जीवनशैली को देखना जरूरी है।फिर भी उपलब्ध प्रमाण एक बात पर स्पष्ट संकेत देते हैं कि चीनी से भरपूर पेयों को रोजाना की आदत बनाना समझदारी भरा स्वास्थ्य विकल्प नहीं है। खासतौर पर तब, जब वही प्यास पानी जैसे बिना चीनी वाले पेय से आसानी से बुझाई जा सकती है।
आगे का रास्ता क्या होना चाहिए?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह का मूल संदेश प्रतिबंध से ज्यादा संतुलन और जागरूकता पर आधारित है। पैकेज पर मौजूद न्यूट्रिशन लेबल पढ़ना, अतिरिक्त चीनी की मात्रा समझना और रोजाना के पेय में पानी को प्राथमिकता देना छोटे लेकिन प्रभावी कदम हो सकते हैं। आखिरकार कोल्ड ड्रिंक का सवाल सिर्फ एक बोतल या एक गिलास का नहीं है, बल्कि उस आदत का है जो रोजाना की डाइट में अतिरिक्त चीनी और कैलोरी जोड़ती रहती है। ताज़गी कुछ मिनट की हो सकती है, लेकिन गलत आदत का असर लंबे समय तक चल सकता है। इसलिए स्वाद के साथ सेहत का संतुलन बनाए रखना ही सबसे बेहतर नज़रिया है।