रोजाना कितनी चीनी खानी चाहिए? जानिए एक्सपर्ट गाइडलाइन
चीनी सेवन कितना हो? WHO की गाइडलाइन में मिली अहम सलाह
ज्यादा चीनी सेहत पर डाल सकती है असर, जानिए रोज की सही मात्रा
रोजाना चीनी की मात्रा सिर्फ चाय में डाली गई चीनी तक सीमित नहीं है। शहद, सिरप और फलों के जूस में मौजूद फ्री शुगर भी कुल सेवन में शामिल होती है। WHO वयस्कों और बच्चों में फ्री शुगर को दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है, जबकि 5 प्रतिशत से कम अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।
📍 स्थान: नई दिल्ली
📰 तारीख: 8 अगस्त 2026
✍️ नीलम सैनी
चीनी सेवन कितना होना चाहिए?
मीठा स्वाद ज्यादातर लोगों की रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा है। सुबह की चाय से लेकर मिठाई, बिस्किट, पैकेज्ड ड्रिंक और कई प्रोसेस्ड फूड तक चीनी अलग-अलग रूपों में हमारी डाइट में शामिल होती है। सवाल यह है कि आखिर रोजाना कितनी चीनी शरीर के लिए उचित मानी जाती है? विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ की गाइडलाइन के मुताबिक वयस्कों और बच्चों को फ्री शुगर का सेवन कुल दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम रखना चाहिए। करीब 2,000 कैलोरी प्रतिदिन लेने वाले स्वस्थ व्यक्ति के लिए यह मात्रा लगभग 50 ग्राम यानी करीब 12 छोटी चम्मच के बराबर है। डब्ल्यूएचओ यह भी कहता है कि इसे 5 प्रतिशत या उससे कम रखने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
फ्री शुगर और प्राकृतिक शुगर में फर्क
यहां एक अहम बात समझना जरूरी है। हर तरह की शुगर को एक ही नजरिए से नहीं देखा जाता। डब्ल्यूएचओ की सिफारिश मुख्य रूप से फ्री शुगर पर केंद्रित है। फ्री शुगर में वह चीनी शामिल है जिसे निर्माता, रसोइया या उपभोक्ता खाने-पीने की चीजों में मिलाता है। इसके अलावा शहद, सिरप और फलों के जूस तथा फलों के जूस कॉन्संट्रेट में स्वाभाविक रूप से मौजूद शुगर भी इसी श्रेणी में आती है। इसके विपरीत पूरे ताजे फल और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर को डब्ल्यूएचओ की इस सीमा में उसी तरह शामिल नहीं किया गया है। दूध में स्वाभाविक रूप से मौजूद शुगर भी इस सिफारिश का मुख्य लक्ष्य नहीं है। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए फल खाना और मीठे पेय पीना एक जैसा मामला नहीं माना जाना चाहिए।
50 ग्राम की सीमा का मतलब क्या है?
कई लोगों को 50 ग्राम सुनकर लगता है कि वे रोजाना 50 ग्राम टेबल शुगर आराम से खा सकते हैं। ऐसा समझना सही नहीं होगा। यह आंकड़ा कुल फ्री शुगर के संदर्भ में है और इसमें अलग-अलग खाद्य पदार्थों तथा पेय पदार्थों से मिलने वाली फ्री शुगर भी शामिल होती है।
मसलन, दिनभर में चाय में डाली गई चीनी के अलावा मिठाई, बिस्किट, मीठे पेय, पैकेज्ड फूड, सॉस या अन्य उत्पादों से मिलने वाली चीनी भी कुल सेवन में जुड़ सकती है। इसलिए सिर्फ चाय में डाली गई चीनी की मात्रा देखकर पूरे दिन का सेवन तय करना पर्याप्त नहीं है।
5 प्रतिशत वाली सलाह क्यों महत्वपूर्ण है?
डब्ल्यूएचओ फ्री शुगर को 10 प्रतिशत से नीचे रखने की मजबूत सिफारिश करता है। वहीं 5 प्रतिशत से नीचे ले जाने को अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ से जोड़ा गया है, हालांकि इस स्तर की सिफारिश को डब्ल्यूएचओ ने सशर्त बताया है। करीब 2,000 कैलोरी की डाइट में 5 प्रतिशत ऊर्जा लगभग 25 ग्राम फ्री शुगर के बराबर बैठती है। इसे करीब 6 छोटी चम्मच के आसपास समझा जा सकता है। लेकिन वास्तविक जरूरत व्यक्ति की उम्र, ऊर्जा आवश्यकता, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
ज्यादा चीनी खाने से क्या असर पड़ सकता है?
अधिक फ्री शुगर का सेवन डाइट में अतिरिक्त ऊर्जा बढ़ा सकता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक ज्यादा फ्री शुगर का सेवन अस्वस्थ वजन बढ़ने और मोटापे के जोखिम से जुड़ा है। बच्चों में अधिक चीनी वाले पेय के सेवन और अधिक वजन के बीच भी संबंध के प्रमाण मिले हैं। दांतों की सेहत पर भी इसका असर महत्वपूर्ण है। फ्री शुगर का अधिक सेवन दांतों में कैविटी यानी डेंटल कैरीज के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। इसी वजह से चीनी की मात्रा कम करना सिर्फ वजन नियंत्रण का मुद्दा नहीं, बल्कि ओरल हेल्थ का भी हिस्सा है।
मीठे पेय क्यों बन सकते हैं बड़ी चुनौती?
चीनी का सेवन सिर्फ मिठाई खाने से नहीं बढ़ता। मीठे शीतल पेय, पैकेज्ड फ्रूट ड्रिंक, मीठी चाय-कॉफी और अन्य शुगर स्वीटेंड बेवरेज भी फ्री शुगर का महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार चीनी वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन वयस्कों में अस्वस्थ वजन बढ़ने के जोखिम से जुड़ा है। ऐसे पेय आसानी से ज्यादा मात्रा में पी लिए जाते हैं और व्यक्ति को यह महसूस भी नहीं होता कि उसने कितनी चीनी ले ली।
छिपी हुई चीनी पर भी रखें नजर
चीनी का सबसे बड़ा भ्रम यही है कि लोग इसे केवल मिठाई से जोड़ते हैं। जबकि कई प्रोसेस्ड फूड में भी फ्री शुगर मौजूद हो सकती है। डब्ल्यूएचओ ने उदाहरण देते हुए बताया है कि कुछ सामान्य खाद्य उत्पादों में भी काफी मात्रा में फ्री शुगर हो सकती है। इसलिए पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय न्यूट्रिशन लेबल देखना उपयोगी आदत है। सिर्फ उत्पाद पर लिखे “हेल्दी”, “नेचुरल” या दूसरे मार्केटिंग दावों पर निर्भर रहने के बजाय उसमें मौजूद शुगर की मात्रा और सर्विंग साइज को देखना ज्यादा अहम है।
महिलाओं और पुरुषों के लिए क्या अलग सलाह है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य सिफारिश महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग ग्राम सीमा तय नहीं करती। वह फ्री शुगर को कुल दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम और संभव हो तो 5 प्रतिशत या उससे कम रखने की बात करता है। इसलिए किसी व्यक्ति की कुल कैलोरी जरूरत के अनुसार ग्राम में सीमा बदल सकती है। हालांकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन अतिरिक्त चीनी के लिए अधिक सख्त व्यावहारिक सीमा बताता है। उसके मुताबिक ज्यादातर महिलाओं के लिए अतिरिक्त चीनी करीब 25 ग्राम और पुरुषों के लिए करीब 36 ग्राम प्रतिदिन से अधिक नहीं होनी चाहिए। यह सलाह विशेष रूप से “ऐडेड शुगर” के संदर्भ में है, इसलिए इसे WHO की “फ्री शुगर” सिफारिश के साथ बिल्कुल समान मानना उचित नहीं होगा।
क्या चीनी पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए?
यहां भी संतुलित नजरिया जरूरी है। उपलब्ध गाइडलाइन यह नहीं कहती कि हर व्यक्ति को भोजन में हर प्रकार की शुगर पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए। जोर फ्री या अतिरिक्त चीनी की मात्रा सीमित करने पर है। फल, सब्जियां और दूध जैसे खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर को टेबल शुगर या मीठे पेय के बराबर समझना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। डब्ल्यूएचओ की 2026 की हेल्दी डाइट गाइडलाइन भी कम फ्री शुगर वाले न्यूनतम प्रोसेस्ड और अनप्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को स्वस्थ डाइट का हिस्सा मानती है।
चीनी कम करने का बेहतर तरीका क्या है?
चीनी कम करने के लिए सबसे पहले उन स्रोतों की पहचान करना जरूरी है जहां से रोजाना सबसे ज्यादा फ्री शुगर मिल रही है। चाय या कॉफी में चीनी धीरे-धीरे कम करना, मीठे पेय की जगह पानी या बिना चीनी वाले विकल्प चुनना और पैकेज्ड फूड का लेबल पढ़ना व्यावहारिक कदम हो सकते हैं। मीठे की इच्छा होने पर पूरे फल को प्राथमिकता देना भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक स्वस्थ डाइट में फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों जैसे पोषक खाद्य पदार्थों को प्रमुख स्थान मिलना चाहिए, जबकि फ्री शुगर का सेवन सीमित रखना चाहिए।
क्या गुड़ और शहद चीनी से बिल्कुल अलग हैं?
गुड़ और शहद को अक्सर सफेद चीनी का पूरी तरह सुरक्षित विकल्प समझ लिया जाता है। लेकिन अगर इन्हें भोजन या पेय में मीठा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है तो इनसे मिलने वाली शुगर को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। डब्ल्यूएचओ की परिभाषा में शहद और सिरप में स्वाभाविक रूप से मौजूद शुगर भी फ्री शुगर में शामिल है। इसलिए सिर्फ चीनी की जगह शहद या सिरप इस्तेमाल करने से फ्री शुगर की कुल मात्रा अपने आप कम नहीं हो जाती।
बच्चों के लिए क्यों जरूरी है नियंत्रण?
बचपन में विकसित होने वाली खाने की आदतें आगे की जिंदगी में भी बनी रह सकती हैं। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि बचपन और किशोरावस्था में स्थापित डाइटरी बिहेवियर अक्सर वयस्क जीवन तक जारी रहते हैं। बच्चों में अधिक मीठे पेय और ज्यादा फ्री शुगर का सेवन वजन बढ़ने तथा दांतों की समस्या से जुड़ सकता है। इसलिए बच्चों को मीठे पेय की आदत लगाने के बजाय पानी और संतुलित भोजन को प्राथमिकता देना अहम है।
डायबिटीज के मरीजों को क्या करना चाहिए?
डायबिटीज या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए केवल सामान्य चीनी सीमा को व्यक्तिगत डाइट प्लान मान लेना उचित नहीं है। उनकी कुल कार्बोहाइड्रेट जरूरत, दवाएं, शारीरिक गतिविधि और ब्लड ग्लूकोज जैसे कई पहलू मायने रखते हैं। ऐसे लोगों को अपनी डाइट में चीनी और मीठे खाद्य पदार्थों की मात्रा तय करने के लिए डॉक्टर या पंजीकृत डाइटिशियन की सलाह लेनी चाहिए। किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने या अचानक डाइट बदलने के बजाय व्यक्तिगत मेडिकल जरूरत को ध्यान में रखना अधिक सुरक्षित दृष्टिकोण है।
निष्कर्ष: मिठास रहे, मगर मात्रा पर नियंत्रण जरूरी
रोजाना चीनी सेवन का सवाल सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि चाय में कितनी चम्मच चीनी डाली गई। असली तस्वीर पूरे दिन के फ्री और अतिरिक्त शुगर सेवन से सामने आती है। WHO के मुताबिक इसे कुल दैनिक ऊर्जा के 10 प्रतिशत से कम रखना चाहिए और करीब 5 प्रतिशत या उससे कम रखने से अतिरिक्त लाभ मिल सकता है। इसलिए मीठे को दुश्मन मानने के बजाय मात्रा और स्रोत पर नजर रखना ज्यादा समझदारी है। स्वस्थ डाइट का असल नज़रिया यही है कि स्वाद और पोषण के बीच संतुलन बना रहे—क्योंकि सेहत के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं कि हम कितना खाते हैं, बल्कि यह भी है कि वह किस रूप में और कितनी बार हमारी डाइट में शामिल हो रहा है।