ज्यादा नमक शरीर के लिए क्यों बन सकता है परेशानी?
भारतीय खान-पान में नमक का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। दाल, सब्जी, रोटी से लेकर अचार, पापड़, नमकीन और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों तक नमक भोजन का अहम हिस्सा है। शरीर को सोडियम की जरूरत होती है, क्योंकि यह सामान्य कोशिका कार्य, नसों के संदेश और शरीर में तरल पदार्थों के संतुलन में भूमिका निभाता है। लेकिन जरूरत से ज्यादा सोडियम का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, वयस्कों को रोजाना 5 ग्राम से कम नमक, यानी करीब एक चम्मच से कम, लेने की सलाह दी जाती है। यह मात्रा पूरे दिन में खाए जाने वाले कुल नमक की है, जिसमें खाना पकाते समय इस्तेमाल होने वाला नमक और खाद्य पदार्थों से मिलने वाला नमक दोनों शामिल हैं।
ज्यादा नमक खाने का सबसे बड़ा असर रक्तचाप पर
अधिक सोडियम वाले आहार का सबसे प्रमुख स्वास्थ्य प्रभाव रक्तचाप बढ़ना माना जाता है। शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ने पर रक्तचाप प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्तचाप हृदय और रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इसी वजह से भोजन में नमक की मात्रा सीमित रखना उच्च रक्तचाप की रोकथाम और नियंत्रण में महत्वपूर्ण माना जाता है।
हृदय की सेहत पर पड़ सकता है असर
लगातार ज्यादा नमक का सेवन रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा है और उच्च रक्तचाप हृदय संबंधी बीमारियों का एक प्रमुख जोखिम कारक है। रक्तचाप को नियंत्रित रखने से हृदय रोग और उससे जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए जिन लोगों के भोजन में नमक की मात्रा बहुत अधिक है, उनके लिए नमक कम करना संतुलित आहार का अहम हिस्सा हो सकता है।
स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है
उच्च रक्तचाप स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। ज्यादा सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है और इस तरह लंबे समय में स्ट्रोक के जोखिम को प्रभावित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सोडियम की मात्रा कम करने को हृदय रोग और स्ट्रोक के जोखिम को घटाने की रणनीति का हिस्सा मानता है।
किडनी पर भी पड़ सकता है असर
किडनी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अधिक सोडियम का सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है और किडनी रोग के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा हुआ है। इसलिए लंबे समय तक बहुत अधिक नमक खाने की आदत को सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सिर्फ ऊपर से डाला गया नमक ही जिम्मेदार नहीं
अक्सर लोगों को लगता है कि नमक का मतलब केवल वह नमक है, जो खाना बनाते समय या खाने के ऊपर डाला जाता है। लेकिन सोडियम कई ऐसे खाद्य पदार्थों में भी मौजूद हो सकता है, जिनका स्वाद बहुत ज्यादा नमकीन महसूस नहीं होता।पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ सोडियम के महत्वपूर्ण स्रोत हो सकते हैं। इनमें ब्रेड, प्रोसेस्ड मीट, नमकीन स्नैक्स, चीज, तैयार भोजन, सॉस और अन्य पैकेज्ड उत्पाद शामिल हो सकते हैं। यानी सिर्फ नमकदानी को दूर रखने से ही हमेशा पर्याप्त कमी नहीं आती। बाजार से खरीदे जाने वाले खाद्य पदार्थों के पोषण लेबल पर सोडियम की मात्रा देखना भी जरूरी है।
अचार, पापड़ और नमकीन में भी रखें सावधानी
भारतीय भोजन में अचार, पापड़, नमकीन और कई तरह के चटपटे स्नैक्स लोकप्रिय हैं। इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर है, क्योंकि ऐसे खाद्य पदार्थों से दिनभर के कुल सोडियम सेवन में काफी योगदान हो सकता है। इसी तरह इंस्टेंट नूडल्स, तैयार सूप, कुछ सॉस और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में भी सोडियम अधिक हो सकता है।
रोज कितना नमक लेना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए रोजाना 5 ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। यह लगभग एक चम्मच से कम मात्रा के बराबर है और इसमें पूरे दिन भोजन से मिलने वाला कुल नमक शामिल है। पांच ग्राम नमक करीब 2,000 मिलीग्राम सोडियम के बराबर होता है। यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है—नमक और सोडियम एक ही चीज नहीं हैं। सामान्य नमक मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड होता है, जबकि सोडियम उसका एक प्रमुख घटक है। खाद्य पदार्थों के लेबल पर कई बार मात्रा सोडियम के रूप में लिखी होती है।
नमक कम करने के आसान तरीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुरूप नमक कम करने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों में बदलाव किया जा सकता है—
* खाना पकाते समय नमक की मात्रा धीरे-धीरे कम करें।
* खाने के ऊपर से अतिरिक्त नमक डालने की आदत छोड़ें।
* नमकीन, चिप्स और दूसरे पैकेज्ड स्नैक्स कम खाएं।
* अचार और पापड़ का सेवन सीमित रखें।
* पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का लेबल पढ़कर सोडियम की मात्रा देखें।
* ताजे और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें।
* स्वाद बढ़ाने के लिए नींबू, मसाले और हरी जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नमक पूरी तरह बंद करना भी सही नहीं
नमक में मौजूद सोडियम शरीर के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी है। इसलिए इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को नमक पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। लक्ष्य अत्यधिक सेवन से बचना और संतुलित मात्रा रखना है। WHO भी वयस्कों के लिए प्रतिदिन 5 ग्राम से कम नमक की सीमा सुझाता है। साथ ही, WHO के अनुसार इस्तेमाल किया जाने वाला नमक आयोडीनयुक्त होना चाहिए, क्योंकि आयोडीन शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है।
निष्कर्ष
नमक भोजन का जरूरी हिस्सा है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा सेहत के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। ज्यादा सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है और लंबे समय में हृदय रोग, स्ट्रोक तथा किडनी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़ा है। इसलिए खाने में स्वाद के साथ मात्रा का संतुलन रखना भी जरूरी है। विशेष रूप से पैकेज्ड और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना तथा भोजन में कुल नमक की मात्रा पर नजर रखना स्वस्थ खान-पान की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।