फास्ट-फूड का बार-बार सेवन आहार में ज्यादा नमक, चीनी, अस्वास्थ्यकर वसा और कैलोरी बढ़ा सकता है। लंबे समय में यह वजन और हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है।
ज्यादा फास्ट-फूड खाना क्यों हो सकता है नुकसानदायक?
नई दिल्ली। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फास्ट-फूड लोगों के खान-पान का हिस्सा बन गया है। बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज, तले हुए स्नैक्स और मीठे पेय आसानी से उपलब्ध होने के कारण इनका सेवन अक्सर घर के संतुलित भोजन की जगह लेने लगता है। समस्या किसी एक दिन फास्ट-फूड खाने से ज्यादा उसके बार-बार और अधिक मात्रा में सेवन से जुड़ी है। ऐसे भोजन में अक्सर कैलोरी, नमक, चीनी और संतृप्त वसा अधिक हो सकती है, जबकि फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी स्वस्थ आहार में नमक, मुक्त शर्करा और अस्वास्थ्यकर वसा को सीमित करने की सलाह देता है।
बढ़ सकती हैं अतिरिक्त कैलोरी
फास्ट-फूड की कई चीजें ऊर्जा यानी कैलोरी से भरपूर होती हैं। अगर शरीर जितनी ऊर्जा खर्च करता है, उससे लगातार ज्यादा कैलोरी भोजन के जरिए मिलने लगे तो वजन बढ़ सकता है। खासकर जब फास्ट-फूड के साथ मीठे पेय, मिठाइयां या अन्य अधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ भी लिए जाएं, तो कुल कैलोरी सेवन और बढ़ सकता है।
ज्यादा नमक से बढ़ सकता है जोखिम
कई तैयार और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। अत्यधिक सोडियम सेवन रक्तचाप बढ़ने से जुड़ा है और लंबे समय में हृदय तथा रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों के लिए रोजाना पांच ग्राम से कम नमक लेने की सलाह देता है। इसमें भोजन में अलग से डाला गया नमक ही नहीं, बल्कि तैयार खाद्य पदार्थों में मौजूद नमक भी शामिल होता है।
ज्यादा चीनी भी बन सकती है परेशानी
फास्ट-फूड के साथ मिलने वाले शीतल पेय, मीठे पेय और मिठाइयों के जरिए शरीर में अतिरिक्त चीनी की मात्रा बढ़ सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मुक्त शर्करा का सेवन सीमित रखना चाहिए। ज्यादा मीठे खाद्य और पेय पदार्थों का नियमित सेवन अतिरिक्त कैलोरी बढ़ाने और दांतों की सड़न जैसी समस्याओं के जोखिम से जुड़ा है।
अस्वास्थ्यकर वसा का सेवन
कुछ फास्ट-फूड में संतृप्त वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। लंबे समय तक संतृप्त वसा का अधिक सेवन रक्त में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है और हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वस्थ आहार में संतृप्त वसा और ट्रांस वसा को सीमित करने तथा असंतृप्त वसा को प्राथमिकता देने की सलाह देता है।
फाइबर और पोषक तत्वों की कमी
अगर कोई व्यक्ति बार-बार फास्ट-फूड को सब्जियों, फल, साबुत अनाज, दालों और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों की जगह लेने देता है, तो उसके आहार में फाइबर, विटामिन और खनिजों की पर्याप्त मात्रा हासिल करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए सवाल केवल यह नहीं है कि कोई व्यक्ति क्या खा रहा है, बल्कि यह भी है कि वह किस पौष्टिक भोजन की जगह फास्ट-फूड खा रहा है।
पाचन पर भी पड़ सकता है असर
अधिक वसा और कम फाइबर वाला भोजन कुछ लोगों में पेट भारी होने, गैस या असहजता जैसी समस्या पैदा कर सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की प्रतिक्रिया अलग होती है। अगर फास्ट-फूड के साथ पर्याप्त फल, सब्जियां और साबुत अनाज नहीं लिए जाते, तो भोजन में फाइबर की कमी हो सकती है। पर्याप्त फाइबर स्वस्थ पाचन तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
बच्चों और युवाओं में आदत का सवाल
बचपन और किशोरावस्था में खान-पान की आदतें आगे भी बनी रह सकती हैं। अगर पौष्टिक घरेलू भोजन की जगह नियमित रूप से अत्यधिक प्रसंस्कृत या फास्ट-फूड लिया जाए, तो संतुलित आहार बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। इसलिए बच्चों को पूरी तरह किसी एक खाद्य पदार्थ से दूर रखने के बजाय संतुलित भोजन की आदत विकसित करना और फास्ट-फूड की मात्रा सीमित रखना अधिक व्यावहारिक तरीका है।
क्या फास्ट-फूड पूरी तरह बंद करना जरूरी है?
हर व्यक्ति के लिए फास्ट-फूड को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। महत्वपूर्ण बात है मात्रा, आवृत्ति और पूरे आहार का संतुलन।
कभी-कभार पसंद का भोजन लेने और रोजाना भोजन का बड़ा हिस्सा फास्ट-फूड पर निर्भर करने में बड़ा अंतर है। अगर अधिकांश भोजन पौष्टिक है, तो कभी-कभार कम मात्रा में पसंदीदा खाद्य पदार्थ लिया जा सकता है।
फास्ट-फूड खाते समय कैसे रखें ध्यान?
कुछ आसान आदतें खान-पान को संतुलित रखने में मदद कर सकती हैं—
* फास्ट-फूड को रोजाना के भोजन का हिस्सा न बनाएं।
* तली हुई चीजों की मात्रा सीमित रखें।
* मीठे पेय के बजाय पानी को प्राथमिकता दें।
* भोजन में फल और सब्जियां शामिल करें।
* साबुत अनाज और दालों को आहार का हिस्सा बनाएं।
* पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय पोषण संबंधी जानकारी देखें।
* अधिक नमक, चीनी और संतृप्त वसा वाले विकल्पों का सेवन सीमित करें।
* भोजन की मात्रा यानी हिस्से पर भी ध्यान दें।
निष्कर्ष
फास्ट-फूड स्वाद और सुविधा के लिहाज से आकर्षक हो सकता है, लेकिन इसका अत्यधिक और नियमित सेवन संतुलित आहार को प्रभावित कर सकता है। ज्यादा कैलोरी, नमक, चीनी और संतृप्त वसा का सेवन वजन, रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकता है। इसलिए बेहतर तरीका यह है कि फास्ट-फूड को कभी-कभार और सीमित मात्रा में लिया जाए तथा रोजाना के भोजन में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दी जाए। आखिरकार, स्वाद जरूरी है, लेकिन सेहत के साथ संतुलन उससे भी ज्यादा जरूरी है।